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“बुक्स ओ’ सांसद”- 2017: साहित्यकार सांसदों के पुस्तकों की रचनात्मक प्रदर्शनी

80 सांसदो द्वारा लिखित, संपादित एवं प्रकाशित पुस्तक की रचनात्मक प्रदर्शनी को मिली सराहना
80 से ज्यादा सांसदों की लिखित, प्रकाशित एवं संपादित पुस्तकों की रचनात्मक प्रदर्शनी “बुक्स ओ’ सांसद“- 2017 का आयोजन 2 अगस्त को दोपहर 3 बजे से रात 8 बजे तक कांस्टीट्यूशन क्लब आँफ इंडिया, नई दिल्ली, रफी मार्ग में किया गया था। प्रदर्शनी में साहित्यकार सांसदों के साथ ही शहर के गणमान्य लोगों ने शिरकत की और इसे सराहा। कार्यक्रम का उद्देश्य सांसदो की रचनात्मकता और सकारात्मकता को आम जनता और मीडिया तक पहुंचाने का था, साथ ही सांसदों की चुनौतियों और उनके साहित्यिक पहलू को भी दिखाना था।
“बुक्स ओ’ सांसद”, सांसदो द्वारा लिखित, प्रकाशित एवं सम्पादित पुस्तकों की रचनात्मक प्रदर्शनी थी, जिसमें 80 पुस्तकों की फ्रेम रखी गई थी। 3” बाय 2“ की फ्रेम में सांसदों और उनकी पुस्तक का संक्षिप्त परिचय दिया गया था। कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित गणों को साहित्य जगत से जुड़े सांसदो से रुबरु होने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम में ट्रान्सपरेन्सी इंटरनेशनल इंडिया के सहयोग से श्भारत की राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिताश् पर संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया था। इसमें सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद, भूतपूर्व चुनाव आयुक्त एस‐ वाई‐ कुरैशी, ट्रान्सपरेन्सी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक रामा नाथ झा एवं अन्य कई बडे़ अधिकारियों ने भी शिरकत की।
लोकतंत्र के चार महत्वपुर्ण स्तंभो में से एक की बागडोर हमारे देश के नीति-निर्माताओं के हाथों में हैं, जो सिर्फ आलोचना के शिकार है। जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली के सही अवलोकन के लिए आलोचना तो हमेशा ही होती रहती है शायद ये एक हद तक सही है। बतौर जनप्रतिनिधि, सांसदों का मुख्य काम अपने देश और देश के लोगों के लिए अच्छे कानून बनाना है। लेकिन अच्छे कानून बनाते हुए उनका आत्मविश्वास मजबूत रहे, ऐसे में आलोचना के साथ उनके अच्छे कार्यो की सराहना भी बहुत जरूरी है। “दृष्टि क्रिएटिव प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड” के बैनर तले “बुक्स ओ’ सांसद” की टीम ने अपने कार्यक्रम के माध्यम से उपरोक्त विषय को रचनात्मक रूप में प्रदर्शित करने का एक प्रयास किया।

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