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बेलगाम उत्तर कोरिया और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक गतिविधियां

उत्तर कोरिया की तरफ से लगातार परमाणु हमले और परमाणु परीक्षण की धमकी अमेरिका और उसके सीमावर्तीयों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। इस वक्त पूरी दुनिया की नजर उत्तर कोरिया और उसकी सीमाओं पर हो रही गतिविधियों पर है। उत्तर कोरिया जिस प्रकार लगातार लंबी दूरी की मिसाइलों का तथा परमाणु परीक्षण कर रहा है। यह स्थिति अगर नियंत्रण में नहीं आई, तो अमेरिका उत्तर कोरिया मैं युद्ध भी हो सकता है। फिलहाल अमेरिका उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया दोनों इस वक्त अमेरिका के निशाने पर हैं। उत्तर कोरिया को अगर किसी भी तरह का डर हुआ तो वह तुरंत दक्षिण कोरिया पर हमला कर देगा, और फिर अमेरिका को दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर उत्तर कोरिया पर युद्ध की कार्यवाही करनी पड़ेगी। जिस प्रकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, कि उसका एक बड़ा युद्धपोत और बोर शिप्स कोरिया की तरफ रवाना हो चुके हैं। उस समय यह जहाजी बेड़ा कोरियन प्रायद्वीप से 5, 633 किमी दूर था। जिस प्रकार उत्तर कोरिया को अमेरिका द्वारा यकीन दिलाने की कोशिश की गई, कि अमेरिकी नौसेना उसके बहुत करीब है। इससे लगता है। अमेरिका उत्तर कोरिया पर दबाव की रणनीति के तहत कार्य कर रहा है। चीन के मित्र माने जाने वाले उत्तर कोरिया को सबक सिखाने के लिए अमेरिका चीन की ही रणनीति का सहारा ले रहा है। दर्शल उत्तर कोरिया अमेरिका पर परमाणु हमले की धमकी दे चुका है। इसके बाद उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं। युद्ध की आशंकाओं को देखते हुए चीन तथा रूस ने अपने अपने सैन्य बलों को कोरियाई सीमा पर बढा दिया है। लेकिन अब सवाल यह है, कि भारत से 5000 किमी दूर कोरियाई प्रायद्वीप में आखिर ऐसा क्या हो रहा है? कि उत्तर कोरिया, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान युद्ध छेड़ने की धमकी दे रहे हैं। उत्तर कोरिया की तरफ से एक बयान में कहा गया था, कि उत्तर कोरिया हर हफ्ते, हर महीने, हर साल, मिसाइलों के परीक्षण करता रहेगा। उत्तर कोरिया ने यह भी कहा था, कि उसे लगा कि अमेरिका उस पर हमला कर सकता है। तो वह उससे पहले ही दक्षिण कोरिया और अमेरिका पर हमला कर देगा। हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं, कि फिलहाल उत्तर कोरिया के पास अमेरिका पर हमला करने लायक शक्ति नहीं है। लेकिन उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया और जापान पर परमाणु हमला जरूर कर सकता है। क्योंकि यह देश उसकी रेंज में आते हैं। उत्तर कोरिया 5 बार परमाणु परीक्षण कर चुका है। जिसके बाद अमेरिका और यूनाइटेड नेशंस समेत दुनिया भर के तमाम देश उस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। लेकिन फिर भी उत्तर कोरिया दोबारा परमाणु परीक्षण करना चाहता है। उत्तर कोरिया जिस परमाणु युद्ध की धमकी देता है। उसका खामियाजा उसके पड़ोसी देशों दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका को उठाना पड़ेगा, जो उस की मिसाइलों की रेंज में आते हैं। तब रूस, चीन, जापान का इस युद्ध में क्या रोल होगा। चीन और उत्तर कोरिया की मित्रता बहुत पुरानी है। क्योंकि जब वर्ष 1950 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर हमला किया था। तब चीन ने उत्तर कोरिया का साथ दिया था, तथा रूस ने भी चीन और उत्तर कोरिया का साथ दिया था। जबकि अमेरिका ने दक्षिण कोरिया का साथ दिया था, तथा जापान ने कोरियाई युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था।
चीन ने अपने 150, 000 सैनिक और लड़ाकू विमान उत्तर कोरिया के बार्डर की तरफ तैनात कर दिये हैं। इसकी दो मुख्य वजह हैं। पहली वजह तो चीन उत्तर कोरिया का 1961 में हुआ समझौता है। जिसके अनुसार दोनों देशों में से किसी पर भी हमला होने की स्थिति में, बिना शर्त एक दूसरे की मदद करेंगे। इसमें सैन्य और हथियारों की भी मदद शामिल है। यानी अगर कोई देश उत्तरी कोरिया पर हमला करता है, तो चीन को उत्तर कोरिया का साथ देना पड़ेगा। तथा दूसरी बड़ी वजह यह है, कि चीन उत्तर कोरिया के साथ 1420 किमी लंबा बॉर्डर साझा करता है। अगर अमेरिका उत्तर कोरिया पर हमला करेगा, तो उत्तर कोरिया से बड़ी संख्या में रिफ्यूजी चीन की तरफ घुसेंगे, और यह चीन के लिए बड़ी परेशानी की वजह बन जाएगी। चीन युद्ध में उत्तर कोरिया का साथ इसलिए भी दे सकता है। क्योंकि चीन कम्युनिज्म का समर्थक है। और उत्तर कोरिया कम्युनिस्ट विचारों का सख्ती से पालन करने वाला देश है। लेकिन अमेरिका चाहता है, कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग से बात करें, और उसे अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने को बाध्य करें। चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है। इसीलिए चीन व्यापार में कमी लाकर भी उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। रूस को भी यह आशंका है, कि युद्ध की स्थिति में रिफ्यूजी रूस में दाखिल होने की कोशिश करेंगे। हालांकि अभी यह साफ नहीं है, कि रूस खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है, या उत्तर कोरिया को बचाने की कोशिश कर रहा है। उत्तर कोरिया के पास दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी सेना है। जिसमें 7 लाख सैनिक हैं, और 45 लाख लोग ऐसे भी हैं। जो युद्ध की स्थिति में सैनिक की भूमिका निभा सकते हैं। उत्तर कोरिया और अमेरिका का टकराव एक गंभीर और विनाशकारी युद्ध में बदल सकता है। अगर अमेरिका ने उत्तर कोरिया के परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए हमला किया, तो यह एक अंतरराष्ट्रीय गंभीर समस्या का विषय बन जाएगा। भले ही भारत से उत्तर कोरिया की दूरी 5000 किमी हो, लेकिन इसका असर पूरे दक्षिण एशिया सहित भारत पर भी पड़ेगा।

अश्विनी शर्मा
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
बिद्यार्थी
पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण
(M.A. Journalism and Mass Communication )

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