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भारत में बढ़ते भ्रष्टाचार को कैसे रोक पायेगें ?

कभी समाज सेवा के लिए जाना जाने वाला हमारा भारत देश आज भ्रष्टाचार का मुख्य केन्द्र बन चुका है। फलस्वरूप भारतीय संस्कृति तथा उसका पवित्र एवं नैतिक स्वरूप धुंधला होता जा रहा है। आज हर व्यक्ति नैतिक और अनैतिक तरीकों से धन कमाने में लगा हुआ है। जिसके कारण भ्रष्टाचार रूपी कीड़ा पनपता जा रहा है जो भारत के विकास में बाधक बनता जा रहा है।
एशिया महाद्वीप में भ्रष्टाचार के मामले में भारत प्रथम स्थान पर है। एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि भारत में रिश्वतखोरी की दर 69 प्रतिशत है। फोब्र्स पत्रिका द्वारा करवाये गए 18 महीने लंबे एक सर्वेक्षण में भारत को सर्वोच्च 5 देशों में पहला स्थान दिया गया है। भारत के अलावा वियतनाम, पाकिस्तान, थाईलैंड और म्यांमार भी फोब्र्स पत्रिका की सर्वोच्च 5 भ्रष्ट एशियाई देशों की सूची में शामिल हैं। भारत में स्कूल, अस्पताल, पुलिस, पहचान पत्र और जनोपयोगी सुविधाओं के मामलो से जुड़े सर्वे में भाग लेने वाले लगभग आधे लोगों ने कहा कि उन्होंने कभी न कभी रिश्वत दी है। 53 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि 63 प्रतिशत मानते हैं कि आम लोगों पर उनके प्रयासों से कोई असर नहीं पड़ेगा। फोब्र्स पत्रिका के इस सर्वेक्षण में पड़ोसी देश पाकिस्तान को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। सर्वेक्षण के नतीजों में पाया गया है कि रिश्वतखोरी दर 40 प्रतिशत है। 65 प्रतिशत रिश्वतखोरी दर के साथ वियतनाम दूसरे स्थान पर है, तो वहीं 41 प्रतिशत के साथ थाईलैंड तीसरे स्थान पर है। सर्वे में म्यांमार को पांचवां स्थान प्राप्त हुआ है जहां रिश्वतखोरी दर 40 प्रतिशत है।
आधुनिक युग को यदि भ्रष्टाचार का युग कहा जाए, तो अत्युक्ति न होगी। आज भ्रष्टाचार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में फैल चुका है। इसकी जड़े इतनी गहरी जम चुकी हैं कि समाज का कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह पाया है। भ्रष्टाचार के मूल में शासन तंत्र बहुत हद तक उत्तरदायी है। ऊपर से निचे तक जब सभी भ्रष्टाचारी हों, तो भला कोई ईमानदार कैसे हो सकता है। जिसका दायित्व भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायत सुनना है या जिनकी नियुक्ति उन्मूलन के लिए की गई है, अगर वही भ्रष्टाचारी बन जाएं, तो फिर भ्रष्टाचार कैसे मिट पायेगा ?
आज भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हैं कि कोई भी अपराधी रिश्वत देकर छूट जाता तथा निर्दोष को सजा हो सकती है। लोगों में न तो कानून का भय है और न ही सामाजिक दायित्व की भावना। भ्रष्टाचार की प्रवाह ऊपर से नीचे की और बहता है। जब देश के बड़ेे – बड़े नेता ही धोटालों में लिप्त हों, तो नीचे क्या होगा? हाल ही में भ्रष्टाचार विरोधी वैश्विक नागरिक संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने एक भ्रष्टोचार-घूसखोरी के मामलों पर सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की है। जिसमें एशिया के सर्वाधिक भ्रष्ट देशों में भारत का नाम सामने आया है। वहीं सर्वेक्षण में एक बात और चौकाने वाली सामने आई है कि भारत में लोगों को वर्तमान सरकार से काफी उम्मीादे हैं। यहां की जनता को लगता है कि पीएम मोदी इस पर काफी हद तक काबू पा लेंगे।
भ्रष्टाचार विरोधी वैश्विक नागरिक संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की यह सर्वेक्षण रिपोर्ट जुलाई 2015 और जनवरी 2017 के बीच की है। इसमें भारत, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, साउथ कोरिया, हांगकांग, कंबोडिया, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ताइवान, म्यामार, श्रीलंका, थाईलैंड आदि देश इसमें शामिल रहे। 16 देशों के करीब 21861 लोगों से बात की गई है। जिसमें भ्रष्टाचार के प्रति उनके अनुभव और विचार सामने आए हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार व घूसखोरी के इस अध्ययन में भारत को सर्वाधिक घूसखोरी वाला देश बताया गया है। रिपोर्ट में रिश्वत खोरी के सबसे ज्यादा मामले पब्लिक स्कूल, सार्वजनिक अस्पताल, सरकारी दस्तावेज, पुलिस और अदालतों में सामने आए हैं।
इसमें यह साफ है कि साल 2016 में जापान में करीब 0.2 फीसदी से लेकर भारत के करीब 69 फीसदी लोगों को सरकारी सेवाओं के उपयोग के लिए घूस देनी पड़ी। हालांकि इस सर्वे रिपोर्ट में कई आधारों पर लोगों से बात की गई है। जिसमें यह भी साफ हुआ है कि इन 16 देशों में कई देशों के नागरिकों को अपने देश की सरकारों से काफी उम्मीदें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मुख्य मुद्दा लेकर सत्ता में आई थी। इस दौरान एनडीए सरकार ने भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की आलोचना भी की थी। एनडीए ने भ्रष्टाचार मिटाने का वादा किया था। जिसमें 2 जी स्पेक्ट्रम, कोयला आवंटन और सीडब्ल्यूजी घोटालों के मामलों को उजागर करने और भ्रष्टाचार मिटाने का वादा खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। जिससे आज बड़ी संख्या में भारतीयों को अपने देश के प्रधानमंत्री से बड़ी उम्मींदे और उन पर भरोसा है।
रिपोर्ट में साफ हुआ है कि मोदी के नोटबंदी जैसे प्रयास सफल भी हो रहे हैं। भारत की तरह दूसरे देशों में भी अपनी सरकारों से उम्मीद है। भ्रष्टाचार के स्तर को लेकर पांच लोगों में से एक व्यक्ति को लगता है कि इसके स्तर में कमी आ रही है। वहीं पांच में से दो लोगों को लगता है कि भ्रष्टाचार का स्तर बढ़ गया है। वहीं एक तिहाई लोगों को लगता है कि कोई परविर्तन नहीं हुआ है। वहीं चीन में 73 प्रतशित लोगों को भ्रष्टाचार के स्तर में बढ़ोतरी होने की संभावना लगती है। थाईलैंड में सिर्फ 14 प्रतिशत लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है। भारत में सर्वेक्षण के दौरान 41 प्रतिशत लोगों माना कि भ्रष्टाचार का स्तर बढ़ गया है। इंडोनेशिया में 65 प्रतिशत, मलेशिया में 59 प्रतिशत, वियतनाम में 56 , प्रतिशत दक्षिण कोरिया में 50 प्रतिशत और हांगकांग में 46 प्रतिशत लोग हैं। हालांकि भारत में करीब 53 प्रतिशत लोगों ने यह माना है कि उनकी सरकार सफल प्रयास कर रही है।
बिजनस में भ्रष्टाचार और घूस को आधार मानते हुए एक सर्वे ने भारत को 41 देशों की सूची में 9वें नंबर पर रखा है। यूरोप, पश्चिम एशिया, भारत और अफ्रीका धोखाधड़ी सर्वे 2017 में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसके अनुसार इसमें भारत से शामिल लगभग 78 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि कम्पनियों के अंदर रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार आम बात है। इस लिहाज से भारत को यूक्रेन, यूनान, स्लोवेनिया, क्रोएशिया, कीन्या, दक्षिण अफ्रीका और हंगरी के बाद रखा गया है। हालांकि सर्वे में भारत की स्थिति इस साल कुछ सुधरी है क्योंकि 2015 में भारत को छठवें स्थान पर रखा गया था।
आज देश में समाज में भ्रष्टाचार व्यापक रुप में नजर आता है । हर जगह भ्रष्टाचार का बोल बाला है चाहे घर हो या बाहर भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में दिखाई देता है। आज उच्च स्तर से लेकर निम्न स्तर तक भ्रष्टाचार पनप रहा है। आज की स्थिति यह हो गई है कि सबसे ज्यादा राजनीति में, सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार रूपी कीड़ा बड़ी तेजी से पनप रहा है। आज देश पर शासन करने वाला मंत्री वर्ग सबसे अधिक भ्रष्टाचार में लिप्त है। देश में जितने भी गोरखधंधे पनप रहे हैं उन का रास्ता सीधे मंत्रियों तक ही जा कर रुकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि भ्रष्टाचार मंत्रियों से ही शुरु होकर मंत्रियों तक ही जाकर समाप्त होता है जिसके कारण देश में अनैतिक कृत्य पनपते हैं। आज अधिकांश नौकरशाही भ्रष्ट आचरण में लिप्त हो गई है जो देश की प्रगति और विकास के लिए घातक सिद्ध हो रही है।
भ्रष्टाचार को किस प्रकार दूर किया जाए यह गंभीर प्रश्न है। इसके लिए स्वच्छ प्रशासन तथा नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक है। भ्रष्टाचार की समाप्ति के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा और एक भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण करने के लिए कृतसंकल्प होना पड़ेगा। आज सभी भारतीय नागरिकों को इसे दूर करने हेतु कृतसंकल्प होने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय जन-जागृति को अपनी आवाज भ्रष्टाचार के विरूद्व बुलंद करनी होगी। यदि हमें देश को प्रगति पथ पर ले जाना है तो हमें अपने लोभ पर विराम लगाना होगा। हमें अपने व्यक्तित्व में सुधार लाना होगा तभी हम देश के अस्तित्व पर छाए धुंधलेपन को मिटा पाएंगे और अपने देश भारत को प्रगति के पथ पर ले जाकर उसका मान सम्मान और भी अधिक बढ़ा कर उसे उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा पाएंगे।

आलेख:-
रमेश सर्राफ धमोरा
स्वतंत्र पत्रकार

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