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महिलाओं को प्रवेश दिया, तो थाईलैंड बन जाएगा सबरीमाला मंदिर: बोर्ड

नई दिल्ली। केरल के विश्व प्रसिद्ध सरबीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला गर्मागया है। इस संबंध में याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामला संविधान पीठ को सौंप दिया है। इस बीच, मंदिर की देखरेख करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष पी. गोपालकृष्ण ने एक बयान पर विवाद हो गया है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देकर इसे थाईलैंड बनाने की कोशिश न की जाए। यदि महिलाओं को प्रवेश दिया गया तो यह मंदिर एक टूरिस्ट सेंटर बनकर रह जाएगा। बकौल गोपालकृष्ण, क्या होगा जब मुश्किल मौसम में 10 साल से 50 साल की महिलाएं बिना किसी सुरक्षा के पहाड़ी पर चढ़ेंगी?

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कोट्टयम में गोपालकृष्ण ने कहा, इन्हीं कारणों से हम मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ हैं। हमारी महिलाओं से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। चाहे सुप्रीम कोर्ट अनुमति दे दे, लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि कोई सम्मानित परिवार ऐसा नहीं चाहेगा।

जानें क्या कुछ हुआ है सुप्रीम कोर्ट में

  • इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दायर केस पर सुनवाई के बाद यह मामला संविधान पीठ को भेज दिया। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान पीठ के ध्यानार्थ 6 सवाल भी उठाए। 
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला इसी साल फरवरी के महीने में सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान पिछले साल अप्रैल में केरल सरकार ने कहा था कि वो मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में है।
  • इंडिया यंग लायर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को लिंग आधारित भेदभाव बताते हुए निरस्त करने की मांग की है।
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