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मार्शल अर्जन सिंह का 98 साल की उम्र में निधन, एकमात्र 5 स्टार रैंक अफसर थे

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह का 98 वर्ष की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। वह भारतीय वायुसेना के एकमात्र फाइव स्टार रैंक प्राप्त अफसर थे। उनके नेतृत्व में ही भारतीय वायुसेना ने 1965 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। युद्ध में कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें पद्म विभूषण से भी नवाजा गया।

1919 में हुआ जन्म
अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल, 1919 को अविभाजित भारत के लयालपुर, पंजाब में हुआ था। लयालपुर इस वक्त पाकिस्तान के फैसलाबाद में है। उनका परिवार सैन्य सेवा में था। उनके पिता सेना की हॉडसन हॉर्स कैवेलरी रेजीमेंट में लांस दफादार थे और रिसालदार के पद से रिटायर हुए थे। कुछ समय के लिए वह डिवीजन कमांडर के एडीसी भी रहे। उनके दादा रिसालदार मेजर हुकम सिंह गाइड्स कैवलरी में 1883 से 1917 तक रहे। उनकी पढ़ाई अविभाजित भारत के मॉन्टगोमेरी में हुई। यह अब पाकिस्तान का साहीवाल शहर कहलाता है।

सिंह की ऊंची उड़ान
– 19 साल की उम्र में उन्होंने 1938 में ब्रिटिश सेना के आरएएफ कॉलेज क्रॉनवेल में दाखिला लिया।
– 1939 में अंबाला में स्क्वाड्रन 1 में पायलट ऑफिसर बने।
– 1944 में भारतीय वायुसेना की नंबर 1 स्क्वाड्रन के नेतृत्वकर्ता के रूप में जापानियों के खिलाफ अराकन अभियान में हिस्सा लिया। इसके कारण उन्हें ब्रिटिश वायुसेना के अहम पुरस्कार डिस्टिनग्यूस्ड फ्लाइंग क्रॉस (डीएफसी) से नवाजा गया। उन्हें स्क्वाड्रन लीडर बनाया गया।
– आजादी के तुरंत बाद उन्हें गु्रप कैप्टन, अंबाला बनाया गया।
– 1962 के युद्ध के बाद उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ बनाया गया। 1963 में वाइस चीफ बने।
– एक अगस्त, 1964 को सिंह को चीफ ऑफ एयर स्टाफ बनाया गया।
– 1969 में तीन दशक वायुसेना में सेवा देने के बाद रिटायर हुए।
– सिंह ने 60 विभिन्न विमान उड़ाए।
– 2002 में उन्हें मार्शल की रैंक प्रदान की गई।

फ्लाई पास्ट का नेतृत्व किया
सिंह ने 15 अगस्त, 1947 को दिल्ली के लालकिले के ऊपर से भारतीय वायुसेना के सौ विमानों के फ्लाई पास्ट का नेतृत्व भी किया।

एओसी
1949 में एयर कमोडोर की रैंक पर प्रमोट होने के बाद उन्होंने ऑपरेशनल कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिग (एओसी) की जिम्मेदारी संभाली। बाद में इसे ही वेस्टर्न एयर कमांड कहा गया। उन्होंने ऑपरेशन बेस में एओसी के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल भी पूरा किया। 1949-52 और 1957-61 तक।

राजदूत और उप राज्यपाल रहे
1971 में उन्हें स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया। इसके बाद 1974 में केन्या में भारतीय उच्चायुक्त नियुक्त किए गए। 1989 में उन्हें दिल्ली का उप राज्यपाल नियुक्त किया गया।

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