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रफ्तार दुगुनी कर हासिल होगा सड़क निर्माण का लक्ष्य

नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चिंतित मोदी सरकार ने युद्धस्तर पर सुधार के प्रयास शुरू कर दिए है। इसी क्रम में दो बड़ी घोषणाएं की गई है। इनमें एक राजमार्गों के विकास की है। योजना के तहत अगले पांच साल में सात लाख करोड़ रुपये खर्च करके 83,000 किलोमीटर से अधिक राजमार्ग का विकास किया जाएगा। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बताया कि सरकार ने इन परियोजनाओं को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इससे 14.2 करोड़ श्रमदिवस का रोजगार पैदा होगा। मगर  देखने की बात यह है कि सरकार ने जो लक्ष्य निर्धारित किया है उसकी पूर्ति तय समय में कैसे होगी। भारत अपनी पूरी क्षमता से तभी विकास कर सकेगा, जब बुनियादी ढांचा सुविधाओं में सुधार हो, जो इस समय बढ़ रही अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। वर्तमान में सरकार की सड़क निर्माण की क्षमता 30 किलोमीटर प्रतिदिन है। वर्ष  2016-17 में सरकार ने केवल 22 किलोमीटर रोजाना सड़क का निर्माण किया। अगले पांच साल में अपने सड़क निर्माण के लक्ष्य की पूर्ति के लिए अपनी रफ्तार बढाकर दुगुनी करनी होगी। वर्ष  2022 तक 83 हजार किलोमीटर सड़क बनाने के लिए सरकार को हर रोज लगभग 45 किलोमीटर सड़क बनानी होगी, अथार्त  रोड बनाने की क्षमता में एकसौ फीसदी बढ़ोतरी करनी होगी। जिन राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, उसमें आर्थिक गलियारा विकास शामिल है। इसका मकसद माल ढुलाई में तेजी लाना होगा। इसके साथ ही प्रमुख शहरों के बीच तय किए जाने वाले समय में भी काफी कमी आएगी। आर्थिक गलियारे के तहत मुंबई-कोचीन-कन्याकुमारी, बेंगलुरु-मेंगलुरु, हैदराबाद-पणजी, संबलपुर-रांची के मार्ग शामिल हैं। भारतमाला परियोजना के तहत कुल 44 आर्थिक गलियारों की पहचान की गई है। इससे पहले सरकार आर्थिक गलियारे के तहत 21 हजार किलोमीटर और फीडर रूट के 14 हजार किलोमीटर सड़क निर्माण का ऐलान कर चुकी है। प्रधानमंत्री कार्यालय सार्वजनिक निवेश बोर्ड से प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण की परियोजनाओं को मंजूरी का निर्देश दे चुका है। परिवहन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवहन के कारण ही कच्चा माल कारखानों तक पहुँच पाता है और उत्पाद ग्राहकों तक पहुँच पाते हैं। भारत में सड़क परिवहन की शुरुआत रेल परिवहन से बहुत पहले ही हो गया था। निर्माण और रखरखाव के मामले में रेल की तुलना में सड़कें बेहतर साबित होती हैं। देश के आर्थिक जीवन में परिवहन का अत्यधिक महत्व होता है। वर्तमान प्रणाली में यातायात के अनेक साधन, जैसे-रेल, सड़क, वायु परिवहन इत्यादि शामिल हैं। सड़कों का देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। सड़कों का आधारभूत ढांचा हमारी अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार है। भारत के परिवहन क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 5.5 प्रतिशत का योगदान है । इनमें सड़क परिवहन का हिस्सा लगभग 5 प्रतिशत है। सड़कों का आधारभूत ढांचा हमारी अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार है। सड़कें हमारे परिवहन का मुख्य साधन हैं। जहाँ हर रोज हमारे लाखों व्यवसायिक और निजी वाहन सरपट सड़कों पर दौड़ते हैं। सड़क परिवहन ने  सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। सड़क परिवहन छोटी एवं मध्यम दूरी तय करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह विश्वसनीय, तेज, लचीला तया मांगपूरित तरीका है, जो घर-घर जाकर सेवाएं उपलब्ध करा सकता है। यह गांवों को बाजारों, कस्बों, प्रशासनिक व सांस्कृतिक केन्द्रों से जोड़ता है और इस प्रकार उन्हें देश की मुख्य धारा में शामिल करता है। सड़क परिवहन सुदूरवर्ती पहाड़ी, मरुस्थलीय, जनजातीय तथा पिछड़े क्षेत्रों को जोड़ता है। सड़क नेटवर्क के मामले में देश दुनिया में दूसरे स्थान पर है। सड़कें देश के सभी हिस्सों और समाज के सभी वर्गों को स्पर्श करती हैं। कृषि हो या व्यापार, उद्योग हो या सामाजिक सरोकार, सड़कें सबके लिए विकास का मार्ग हैं। सड़कें किसी भी इलाके के विकास की बुनियाद होती हैं। सड़क परिवहन किसी भी राष्ट्र की जीवन रेखा मानी जाती है। भारत में सड़क परिवहन में काफी विकास हुआ है। यात्रियों की कुल संख्या में से 80 प्रतिशत से ज्यादा सड़क परिवहन से यात्रा करते हैं और माल की आवा-जाही 60 प्रतिशत से ज्यादा सड़क परिवहन से होती है। भारत में लगभग 47 लाख किमी लंबी सड़कों का जाल है। इस नेटवर्क में राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, स्टेट हाइवे, जिला सड़क, पीडब्लूडी सड़कें, परियोजना सड़कें, ग्रामीण सडकें हैं।सड़कों को चार वगों में विभाजित किया गया। ये राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रांतीय राजमार्ग, जिला सड़कें और ग्रामीण सड़कें है। भारत में सड़क घनत्व इस समय लगभग 1.43 किलोमीटर प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो कई देशों से बेहतर है। सड़कों के नेटवर्क के विकास की जिम्मेदारी केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन की होती है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 82,803 किलोमीटर है, जो सड़कों के कुल नेटवर्क के दो प्रतिशत से कम है। लेकिन इन मार्गों से कुल सड़क परिवहन का 40 प्रतिशत से अधिक परिवहन होता है। 
         

बाल मुकुन्द ओझा, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार, डी-32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर                                मो.- 9414441218

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