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रहष्य,रोमांच और ऐय्यासी का तिलिस्मी डेरा

दुनिया में ऐसी बहुत-सी जगह है जो अपने रहष्य रोमांच और अजीबोगरीब कामों के लिए जानी जाती है। भारत में ऐसी कई तिलिस्मी जगह हैं जिनके बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। बाबू देवकीनंदन खत्री के उपन्यास चंद्रकांता संतति में नवगढ और विजयगढ़ के महलों, रास्तों, बागों, गुफाओं, दरिया और रनिवासों का जोरदार ढंग से चित्रण किया गया है। चंद्रकांता के नाम से बनने वाले टीवी सीरियलों में भी तिलिस्म, जादूगरी, रहस्यलोक, एय्यारी का भरपूर भरमार है। ऐसी ही एक जगह सिरसा में है जो डेरा सच्चा सौदा की नाम से मशहूर है। सातसौ एकड़ में फैला यह एक तिलिस्मी आश्रम है जिसमें एक पूरा शहर समाया हुआ है। जिसका बेताज बादशाह बाबा राम रहीम है। इस डेरे में बाबा का एक कथित रनिवास भी है जिसे गुफा के नाम से जाना और पहचाना जाता है। बताया जाता है आधुनिक शानों शौकत से युक्त इस गुफा की पहरेदारी का काम बाबा की कुछ खास महिला अनुचरों ने संभाल रखा है। बाबा की अनुमति के बिना यहाँ एक पत्ता भी नहीं खड़कता। इसी गुफा में बाबा अय्याशी करता था। साध्वी ने इसी गुफा में उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। जिसकी वजह से बाबा राम रहीम सलाखों के पीछे पहुंच गया है। बाबा जहां रहता था, उसे कहा तो गुफा जाता था, लेकिन असल में वह जगह भी किसी राजमहल से कम नहीं थी। यहां तक कि उसने अपने लिए राजाओं की तरह हरम तक बनवा रखा था, जिसमें 200 से ज्यादा सुंदर साध्वियों को रखा गया था। उसमें बायोमीट्रिक कोड से बेडरूम खुलता था।
सिरसा में करीब 700 एकड़ में फैला डेरा सच्चा सौदा कहने को एक आश्रम है लेकिन ये एक आश्रम नहीं, अपने आप में एक अजूबा है। जिसके दरवाजे बाबा की मर्जी से खुलते हैं और उनकी मर्जी से बंद हो जाते हैं। डेरा सच्चा सौदा आश्रम की दो दुनिया हैं। एक दुनिया वो है जो लोगों को नजर आती है, जिसमें उनकी भलाई के कार्यक्रम चलते हैं। उनके लिए ठहरने , खाने का इंतजाम किया जाता है। धर्मशालाएं बनी हैं। अस्पताल बने हैं। जिसकी तस्वीरें समय-समय पर बाहर भी आती हैं। डेरा सच्चा सौदा आश्रम के भीतर जा चुके मीडियाकर्मियों और राजनेताओं के मुताबिक, बाबा राम रहीम जब लोगों से नहीं मिल रहे होते, तब वो आश्रम के भीतर ही एक गुफानुमा जगह में रहते हैं। यूं इसका आकार भले गुफा जैसा हो लेकिन इसके अंदर दुनिया की सारी सुख-सुविधाएं मौजूद हैं। डेरा सच्चा सौदा आश्रम में बाबा राम रहीम ने जो दुनिया बसाई है, उसमें हर वो चीज मौजूद है, जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। फिर चाहे वो ऐसी लग्जरी गाड़ियां हों जो आपकी नजरों को चकाचोंध करदें या स्पोर्ट्स की वो सुविधाएं जो शायद बड़े-बड़े सरकारी स्टेडियमों में भी न दिखें। बाबा का जब मन होता है, वो एक बड़ी सी स्टेज पर चढ़कर अपने चाहने वालों के बीच प्राइवेट म्यूजिक कॉन्सर्ट कर लेते हैं, जब दिल करता है, फिल्म प्रमोशन के लिए डांस कर लेते हैं। बाबा ने अपने कुछ चहेते पत्रकारों को इस रहस्यलोक की सैर कराई है। पत्रकारों के मुताबिक, आश्रम के भीतर ही एक घूमता हुआ रेस्त्रां है जो पानी से घिरा हुआ है। बाबा राम रहीम इसी रेस्त्रां में बैठकर कुछ खास मेहमानों और पत्रकारों से मुखातिब होते हैं। डेरा सच्चा सौदा में धर्मशाला,, अस्पताल ,स्कूल, कॉलेज, खेल मैदान, विशाल सत्संग भवन थियेटर कॉम्पलेक्स, फैक्ट्री, स्टेडियम, बाग-बगीचे, खेत और तालाब आदि सब चलाने के लिए आश्रम में ही सैकड़ों घर बनाए गए हैं। इस कथित डेरे में एक आलीशान फाइव स्टार होटल की सभी सुविधाएँ उपलब्ध है। राम रहीम के एसएमजी रिजोर्ट में दुनिया के सात अजूबों होने की बात कही जाती है। इसका रेस्तरां पानी के अदंर हैं। इस तीन मंजिला हॉटल में करीब 59 कमरे हैं जिनकी कीमत 9 हजार रुपए से ज्यादा प्रति कमरा है। इसके अलावा इस रिजोर्ट में हेल्थ कल्ब, स्पा कल्ब और जकूबी जैसी कई चीजें हैं। इसके अलावा यहां 13 भव्य भवन हैं जो अलग-अलग डिजाइन के हैं। इसमें स्थायी तौर पर करीब हजार लोग रहते हैं जो 700 एकड़ के इस आश्रम को चलाने में मदद करते हैं। राम रहीम के आश्रम में एक हेलीपैड भी है जिसपर केवल राम रहीम का हेलीकॉप्टर उतरता था।
बताया जाता है की इस आश्रम के भीतर निर्माण अदि कार्यों के लिए बाबा को किसी सरकारी महकमें की इजाजत नहीं लेनी पड़ती। चूँकि बाबा यहाँ के कर्त्ाधर्ता और सर्वशक्तिमान है इसलिए अपने मन के मुताबिक इस रहष्यलोक का निर्माण कराया। बाबा का एक बाजार भी यहाँ है जिसमें सब प्रकार की वस्तुएं उपलब्ध है। यहाँ भी सरकार का नहीं बाबा का ही कानून चलता है। राजनीतिक नेता और मंत्री, मुख्यमंत्री यहाँ बाबा के दर्शनों के लिए लाइन में खड़े रहते है। इसलिए बाबा के इस साम्राज्य को कभी कोई चुनौती देने वाला नहीं मिला है।
डेरा सच्चा सौदा की शुरुआत 1948 में एक संत शाह मस्ताना ने की थी। लेकिन 1990 में डेरा की सत्ता संभालने के बाद ये राम रहीम की जागीर बन गया।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
9414441218

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