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राजधानी लगातार प्रदूषण की चपेट में , सभी एजेंसियां सतर्क

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरे के निशान से उपर बना हुआ है आैर इसे देखते हुए विभिन्न मंत्रालय तथा एजेंसियां सतर्क हो गई है जिन्होंने संबंधित एजेेंसियोें कों उनकी अक्षम कार्य शैली के चलते जम कर लताड़ लगाई है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की खतरनाक स्थिति पर चिन्ता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केन्द्र तथा दिल्ली सरकार के साथ साथ पंजाब और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर स्थिति से निपटने के लिए किए गये उपायों की जानकारी देने को कहा है ।
आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है और केन्द्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राजमार्ग एवं परिवहन मंत्रालय के सचिवों के साथ साथ दिल्ली , पंजाब और हरियाणा के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किये हैं ।
आयोग ने आज एक वक्तव्य में कहा कि लगता है सम्बन्धित अधिकारियों ने इस समस्या से निपटने के लिए उचित कदम नहीं उठाये जो इस क्षेत्र के निवासियों के स्वास्थ्य तथा जीने के अधिकार का उल्लंघन करने के समान है । उसने कहा कि केन्द्र और राज्यों की संबंध्रात एजेंसियों को इस बारे में तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरुरत है । पर्यावरण संबंधी नियमों का उचित क्रियान्वयन जरुरी है । सरकारी तंत्र अपने नागरिकों को जहरीले धुएं से मरने के लिए नहीं छोड़ सकता ।
आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। केन्द्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय , स्वास्थ्य एवं
प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने दिल्ली तथा आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए रणनीति बनाने के वास्ते सात सदस्यीय समिति का गठन किया है।
समिति की अध्यक्षता पर्यावरण सचिव करेंगे और यह नियमित रूप से वायु प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखकर इससे निपटने की रणनीति पर काम करेगी। समिति के अन्य सदस्यों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी सचिव, नीति आयोग के अवर सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख, पर्यावरण प्रदूषण(बचाव एवं नियंत्रण) प्राधिकरण और विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी का प्रतिनिधि शामिल हैं।
समिति की पहली बैठक आज यहां हुई जिसमें वायु प्रदूषण की वर्तमान स्थिति का आकलन कर इसे नियंत्रित करने के उपाय पर विचार किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस मामले में संबंधित राज्यों से निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने, कूड़े को जलाने, ऊर्जा संयंत्रों को नियंत्रित करने तथा उद्योगों और वाहनों के उत्सर्जन को कम करने के लिए उपाय करने का अनुरोध किया जाएगा।
इस बीच दिल्ली में जहरीले प्रदूषण से पार पाने के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार ने एक बार फिर आड ईवन का सहारा लिया है और 13 नवम्बर से 17 नवम्बर तक इसे लागू करने की घोषणा की है ।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की लताड खाने के बाद आज हरकत में आई केजरीवाल सरकार ने इसकी घोषणा की । पांच दिन के दौरान लागू आड ईवन याेजना सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक लागू होगी ।
दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि योजना को सही और बेहतर ढंग से लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों से सहयोग मांगा गया है ।
श्री गहलोत ने हालांकि राजधानी में बढते प्रदूषण का दोष आसपास के राज्यों में धान की पराली जलाने पर मढा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हरियाणा और पंजाब सरकार से बात करने के लिए समय मांगा है । उन्होंने कहा कि आड ईवन के दौरान सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर करने के लिए दिल्ली परिवहन निगम से 500 अतिरिक्त बसों का प्रबंधन करने को कहा गया है ।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास निर्माणाधीन सड़कों पर परियोजना निदेशकों, ठेकेदारों और फील्ड स्तर के अधिकारियों को निर्माण स्थल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिये हैं
श्री गडकरी ने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सभी निर्माण स्थलों और उसके आसपास के क्षेत्र में पानी का छिड़काव करना, फ्लाइऐश, अन्य निर्माण सामग्री तथा मलबे के परिवहन के समय डम्परों को ढंकना, निर्माण स्थल पर खुली धूल-मिट्टी को ढंककर रखना और क्षेत्र के सभी संयंत्रों में वायु गुणवत्ता के मानदंडों का पालन करने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।
राजधानी दिल्ली में हवा में मौजूद खतरनाक प्रदूषक तत्वों का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की तय सीमा से 40 गुना अधिक पाया गया है। इसके चलते बुजु्र्गों और बच्चों को घर में ही रहने की सलाह दी गई है।

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