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राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला : पुलिस की ड्यूटी करेगी किन्नर गंगा कुमारी

राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से सोमवार को एक किन्नर के पक्ष में सुनाए गए फैसले ने प्रदेश में किन्नरों के लिए सरकारी नौकरियों के दरवाजे खोल दिए. प्रदेश के जालोर जिले की किन्नर गंगा कुमारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस विभाग को उसे नियुक्ति देने का फैसला सुनाया. बता दें कि किसी किन्नर को सरकारी नौकरी दिए जाने का राजस्थान प्रदेश में यह पहला और देश में तीसरा मामला है.
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश से अब राजस्थान पुलिस विभाग में पुलिस कांस्टेबल के पद पर पहली बार किन्नर को नियुक्ति दी जाएगी. हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश मेहता की अदालत ने जालौर निवासी किन्नर गंगाकुमारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए छह सप्ताह में नियुक्ति देने एवं साल 2015 से ही नोशनल बेनिफिट देने के आदेश दिए हैं.
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रितुराज सिंह ने पैरवी करते हुए कहा कि गंगाकुमारी पुलिस कांस्टेबल के पद के पात्र होने के बावजूद जालौर पुलिस अधीक्षक द्वारा नियुक्ति नहीं दी गई थी. कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में चयनित किन्नर की नियुक्ति को लेकर पुलिस गृह विभाग के आला अधिकारी पशोपेश में थे.
पिछले तीन साल से गृह विभाग पुलिस के अधिकारी किन्नर की नियुक्ति को लेकर निर्णय नहीं कर पा रहे थे. लम्बे समय तक मामले की फाइल गृह विभाग में पड़ी हुई थी.
हाईकोर्ट जस्टिस दिनेश मेहता ने पुलिस विभाग को आदेश दिए है कि छह सप्ताह में नियुक्ति दी जाए. वर्ष 2013 में 12 हजार पदों के लिए कांस्टेबल भर्ती परीक्षा हुई थी. परीक्षा में प्रदेश के सभी जिलों में 1.25 लाख अभ्यार्थियों ने हिस्सा लिया था. इसमें से पुलिस ने 11400 अभ्यार्थियों का कांस्टेबल पद के लिए चयन कर लिया था. इसमें रानीवाड़ा थाना इलाके जालौर में रहने वाली गंगाकुमारी पुत्री बीकाराम का भी चयन हो गया.
सभी अभ्यार्थियों का मेडिकल कराया गया तो गंगा के किन्नर होने की पुष्टि हुई. ऐसे में नियुक्ति को लेकर पुलिस अधिकारी असमंजस में पड़ गए. गंगा के किन्नर होने की पुष्टि होने के बाद जालौर एसपी ने फाइल रेंज आईजी जोधपुर जीएल शर्मा को भेजकर नियुक्ति को लेकर राय मांगी थी.
ऐसा मामला पहली बार आने पर आईजी ने 3 जुलाई 2015 को फाइल पुलिस मुख्यालय भेज दी गई थी, लेकिन यहां पर भी पुलिस के अधिकारी कुछ निर्णय नहीं कर पाए. ऐसे में पुलिस मुख्यालय ने राय जानने के लिए फाइल गृह विभाग को भेज दी थी. गंगा कुमारी का तीन साल पहले परीक्षा में चयन हो गया था.

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