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राम रहीम के 2 मामलों में HC में सुनवाई आज, साध्वियों ने की उम्रकैद की अपील

चंडीगढ़. राम रहीम ने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 20 साल की सजा को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं दोनों पीड़ित साध्वियों ने डेरामुखी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कराने के लिए हाईकोर्ट में पिटीशन लगाई है। दोनों ही याचिकाओं पर सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुधीर मित्तल की बेंच सुनवाई करेगी। राम रहीम ने अपनी सजा को खारिज करने की मांग की है। बता दें कि 28 अगस्त को राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई थी। मामला भावनाओं से खिलवाड़ का है…
– राम रहीम की तरफ से कहा गया है कि सीबीआई कोर्ट ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि वह रेप कर सकता है या नहीं। जज ने पूर्वाग्रह के आधार पर ही सजा सुना दी।
– यही नहीं दो अलग अलग डेरों में अलग अलग समय पर हुए रेप के मामलों को एक साथ कर सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया। इसमें भी विक्टिम एक साल तक कुछ नहीं बोली। अपने घर वालों को भी कुछ नहीं बताया। अगर बताया तो फिर वे एक साल तक चुप क्यों रहे। दूसरी तरफ साध्वियों ने राम रहीम की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग करते हुए कहा गया कि यह मामला भावनाओं से खिलवाड़ का है। एक गुरु ने अपनी अनुयायी से रेप किया। उसे ज्यादा से ज्यादा सजा देकर एक एग्जाम्पल पेश करना चाहिए।

कैसे सामने आया मामला?
– 2002 में एक साध्वी ने गुमनाम चिट्ठी लिखी। इसमें बताया गया था कि कैसे डेरा सच्चा सौदा के अंदर लड़कियों का सेक्शुअल हैरेसमेंट होता था। यह चिट्ठी पंजाब और हरियाणा कोर्ट को भी भेजी गई थी। इसके बाद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ यौन शोषण का केस शुरू हुआ। सीबीआई ने जांच शुरू की।
– माना जाता है कि ये चिट्ठी राम रहीम के 20 साल ड्राइवर रहे रणजीत सिंह की बहन ने लिखी थी। बाद में रणजीत का मर्डर हो गया था। इसका शक भी बाबा समर्थकों पर जताया गया।

राम रहीम को 20 साल की सजा
– 15 साल बाद 25 अगस्त 2017 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया। दो साध्वियों के रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को CBI की स्पेशल कोर्ट ने 20 साल की सजा सुनाई। यानी डेरा चीफ को कुल 20 साल जेल में गुजारने होंगे।

क्या रहीं इस केस की 5 अहम कड़ियां?
– दो पूर्व साध्वियों के CBI स्पेशल मजिस्ट्रेट के सामने अलग-अलग बयान हुए। दोनों बयानों में समानता मिली।
– सेवादार रहे रणजीत के साले परमजीत के भी 164 बयान हुए, जिनमें उसने अपने जीजा की हत्या की बात बताई।
– कोर्ट के सामने डेरे से जुड़ी घटनाओं की कड़ी से कड़ी जुड़ती गई। चूंकि बाबा डेरे के कस्टोडियन थे, इसलिए जिम्मेदारी उसी की थी।
– इस मामले में मेडिकल एविडेंस नहीं थे। ‘रीलेट चेन ऑफ इवेंट्स’ ही बाबा को दोषी ठहराने का बेस बना।
– क्रॉस एग्जामीनेशन में भी बाबा की ओर से दी गई दलीलें सही नहीं पाई गईं।

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