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‘लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन’ के कार्य और उद्देश्य

नई दिल्ली। जब तक संर्घषरत समाचार पत्रों को महत्व नहीं दिया जाएगा वह अपना अस्तित्व बचाने के लिए संर्घष करते रहेंगे जिसमें उनकी काफी उर्जा खत्म होगी। यही वजह की क्षेत्रीय समाचारपत्र/पत्रिका प्रकाशकों की समस्याओं के समाधान हेतु तथा उन्हें एक मंच पर एकत्रित व संगठित करने के लिए वर्ष 2010 में ‘लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिऐशन (लीपा)’ की स्थापना’ की गई। हमे गर्व है कि हम ऐसी संस्था का अंग है जिसके बनाने में देश के सबसे अधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का निजि मार्गदर्शन शामिल रहा। लीपा क्षेत्रीय समाचारपत्र प्रकाशको के हित में काम करने वाला अकेला संगठन है। रीजनल मीडिया के लिये लीपा सरकारी मदद के बिना आर्थिक स्वावलम्बन के लिये भी काम कर रही है। लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिऐशन (लीपा) “लीड इंडिया ग्रुप” का एक विजनरी प्रयास है। व्यापक अध्ययन व शोध के बाद “लीड इंडिया ग्रुप” के संस्थापक व प्रकाशक होने के नाते कई अन्य प्रकाशकों से उनकी राय व समस्याओं को जाना गया। इसके उपरांत 2010 में लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिऐशन’ (लीपा) का गठन किया गया। इसके कुछ उद्देश्य निर्धारित किये गये। 2010 से निरंतर लीपा अपने निर्धारित लक्ष्यों पर सतत सेवा कर रही है।
लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन (लीपा) का उद्देश्य
लीपा का एक प्रमुख उद्देश्य प्रकाशकों की समस्याओं का समाधान व प्रगति करने में सहायता करना है। लीपा अलग-अलग ईकाई की तरह कार्य कर रहे समाचारपत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशकों को एक समूह के रूप में जोड़ना चाहती है ताकि जब वो किसी मुद्दे को उठाएं तो उसे सशक्त आवाज की तरह सुना जा सके।
लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन (लीपा) के कार्य:
लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन’ समाचारपत्र-पत्रिका प्रकाशकों को हरसंभव सहायता करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इसके लिए प्रकाशकों के सामने आने वाली बुनियादी समस्याओं को पहचाना, उनके समाधान के लिये कार्य विभाजन किया गया। लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिऐशन की ओर से
निम्नलिखित सहायता प्रदान की जाती हैं।
1. एसएमस सेवा
लीपा अपने सभी सदस्यों को आरएनआई, डीएवीपी, पीसीआई में होने वाली सभी गतिविधियो जैसे, एनुअल स्टेटमेंट ई-फालिंग, डीएवीपी इम्पैनलमेंट ईफाइलिंग, डीएवीपी रेट रिन्यूअल ईफाइलिंग आदि के निर्धारित समय की जानकारी प्रदान करती है ताकि प्रकाशक समय पर अपने अखबार के लिये जरूरी डॉक्युमेंटेशन कर सके। इसके अलावा एसएमएस सेवा के माध्यम से उन्हें अन्य उपयोगी जानकारियाँ भी भेजी जाती हैं।
2. मिशन वेबसाइट:
आज भारत तेजी से डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहा है, अखबार का डिजिटलाइजेशन आज के समय की मांग है। अखबार का डिजिटलाइजेशन कम कर्च में अधिक प्रसार और विज्ञापन का नया रास्ता है। वर्तमान में डीएवीपी में अखबार की तरह वेबसाइट्स का भी विज्ञापन हेतु इम्पैनलमेंट होने लगा है। लीपा अखबारों को मिशन वेबसाइट के अंतर्गत 2010 से ही डिजिटल बनाने में सहायता कर रही है।
3. मोबाइल एप
लीपा ने नये वर्ष पर 2017 में अपने सदस्यों के लिये मोबाइल एप की सुविधा भी लॉन्च कर दी है। मोबाइल एप एक आधुनिकतम सोफ्टवेयर है जिसे समाचारपत्र और समाचार चैनल पहले से ही इस्लेमाल कर रहे है। इसके माध्यम से वो अधिक से अधिक पाठको और विज्ञापनदाताओ को आकर्षित कर रहे हैं। लेकिन यह सुविधा काफी महंगी होती है जिसे रीजनल मीडिया द्वारा लिया जाना मुश्किल होता है। अत: लीपा ने मोबाइल एप की यह सुविधा लॉन्च की है। लीपा अपने सदस्यों को मोबाइल एप को बेहद कम कीमत में उपलब्ध करा रही है।
4. तकनीकी सहायता:
संचार क्रांति के युग में तकनीक से किनारा नहीं किया जा सकता। परंतु प्रत्येक समाचारपत्र-पत्रिका प्रकाशक के पास तकनीकी जानकारी हो यह संभव नहीं। कई बार मामूली तकनीकी समस्या के चलते प्रकाशन पर व्यापक असर पड़ता है। अत: लीपा अखबार निकालने में होने वाली तकनीकी समस्याओं (कंप्यूटर संबधित) से निपटने में हरसंभव सहायता प्रदान करती है। यह सहायता रिमोट असिसटेंट द्वारा प्रदान की जाती है।
5. ईफाइलिंग:
लीपा प्रत्येक वर्ष अपने सदस्यों को नोमिनल फी में एनुअल स्टेटमेंट ई-फालिंग, डीएवीपी इम्पैनलमेंट ईफाइलिंग, डीएवीपी रेट रिन्यूअल ई-फाइलिंग करने में सहायता करती है। इसके लिये हर वर्ष एक एक्सपर्ट टीम हायर की जाती है। और जीरो मिस्टेक पर ई-फाइलिंग की जाती है।
6. दस्तावेजी सहायता:
मीडिया संबंधी विभाग जैसे आरएनआई, डीएवीपी, पीसीआई आदि विभागों में होने वाले डॉक्युमेंटेशन और उनके फोर्मेट्स आदि की जानकारी ‘लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिऐशन’ नि:शुल्क उपलब्ध कराती है।
7. परामर्श:
कई बार समाचारपत्र-पत्रिका प्रकाशक जानकारी के अभाव में विज्ञापन अथवा अन्य लाभों से वंचित रह जाते हैं। अत: समय समय पर लीपा अपने सदस्यों को ऐसी सभी जानकारी SMS द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराती है। इसके अलावा आरएनआई, डीएवीपी पीसीआई आदि विभागो के संबंध में किसी भी प्रकार की सलाह लीपा की एक्सपर्ट टीम द्वारा नि:शुल्क प्रदान की जाती है।
8. ऑडिट सहायता:
आरएनएनआई में एनुअल स्टेटमेंट फाइलिंग में व अखबार के ऑडिट के दौरान कई प्रकार की समस्याएं आती हैं। लीपा कम से कम खर्च पर चार्टर्ड एकाउंटेंट की सेवा उपल्ब्ध कराती है। ताकि सभी प्रकार की वित्तीय सलाह मिले व संबंधित कागजात समय पर पूरे कराए जा सकें।
8. जीएसटी रजिस्ट्रेशन:
नये नियमो के तहत लीपा ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू कर दी है।

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