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लड़कियों को होना होगा आत्मरक्षा के लिए आत्मनिर्भर

चंडीगढ़ की हाईप्रोफाइल छेड़छाड़ की घटना बड़ी अजीबोगरीब है, कुछ लोग उसके आर्टिफिशियल होने के बारे में भी तर्क दे रहे हैं कि लड़की के आईएएस पिता विपक्षी पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी हैं, इसलिए सत्तासीन पार्टी को बदनाम करने के लिए उन्होंने यह सब ड्रामा किया, हो सकता है यह सही हो या गलत हो, मुझे उससे कोई मतलब नहीं !
एक दूसरी बात भी है, चंडीगढ़ पंजाब का एक हिस्सा है, पंजाब की म्यूजिक इंडस्ट्री उसी के आसपास घूमती है। पंजाबी गानों में हम देखेंगे तो लड़की पटाने के एक लाख तरीके आपको मिल जाएंगे, भले ही किसी ने जमीन बेच कर एल्बम निकलवाई हो लेकिन गाने में नाचते समय बंदा पूरे दुनिया का शहंशाह सोने में गड़ा हुआ मिलेगा, ट्रंप भी उसकी बात नहीं टाल सकता, और 5 मिनट के अंदर ही नखरे दिखा कर लड़की उससे पट जाती है, अब एक नेता के लड़के ने जिसकी सही में ही सरकार चलती है, इसका प्रैक्टिकल दिखाने की कोशिश की तो इतनी हाय-तौबा क्यों ? बिहार यूपी की तरफ जाएंगे या बंगाल की तरफ तो और बुरा हाल है ऐसे गाने जिनको घर में चला कर सुनने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता, ऐसी एल्बम रिलीज हो रही हैं और बिक भी रही हैं, नैतिकता त्याग कर हर कोई वैसा ही करने लग जाए तो जीना मुश्किल हो जाएगा ! लेकिन लोगों को सीखने में थोड़ा टाइम लगता है, धीरे-धीरे अभी हाई प्रोफाइल करते हैं, बाद में आम आदमी भी ऐसी फूहड़ता में शामिल हो जाएंगे, इसमें कोई दो राय नहीं, तो इलाज क्या है इसका ?
क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर निकलने वाली असामाजिक फिल्मों और एल्बम पर स्वतंत्रता का हनन करके रोक लगा देनी चाहिए, जिस अवार्ड वापसी का नया शो शुरू हो सके या कोई और इलाज है ? क्योंकि मुझे पता है फूहड़ता भरे नए गाने आने बंद हो गए तो वही आईएएस की बेटी सबसे पहले तख्ती लेकर धरने पर बैठेगी, क्योंकि उसके अनुसार यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है, ऐसे गानों के आने से हुए साइड इफेक्ट के बारे में उसके साथ हुई घटना का उदाहरण देकर जब कोई उस को समझाने की कोशिश करेगा तो वह कहेगी कि आदमी को उसकी सोच पर काबू रखना आना चाहिए उसकी रिस्पांसिबिलिटी है ! बड़ी कॉन्प्लिकेटेड सिचुएशन है, एक तरफ तो गलत तरीके से दादागिरी करने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है, एक पॉजिटिव एनवायरमेंट बता रहा है कि ऐसी नीच हरकत करने से वह अपनी विजय पताका फहराएंगे दूसरी तरफ कुछ सही गलत होने पर दोषी आम आदमी ! यहां पर तीन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रताएं टकरा रही हैं, पहली गाना बनाने वाले की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरा छेड़खानी करने वाले की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और तीसरी छेड़खानी का शिकार होने वाली लड़की की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पहले दो ने तो अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर लिया, अब लड़की कैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करे ? जितनी भी छेड़खानी की घटनाएं या रेप होते हैं उनका कारण यह नहीं होता कि पुलिस नहीं थी, दिन था, रात थी, आधे कपड़े थे, पूरे कपड़े थे, या कपड़े नहीं थे, कारण यह होता है कि सबने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल किया। लेकिन लड़की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल नहीं कर पाई, और ऐसा करने के लिए सबसे जरूरी जो चीज होनी चाहिए वह है- आत्मरक्षा की आत्मनिर्भरता।
लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए आत्मनिर्भर होना चाहिए। सामान्य रूप से महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कमजोर होती हैं शक्ति की समानता के लिए किसी युद्ध कला की थोड़ी बहुत जानकारी और कोई ना कोई हथियार जरुरी होना चाहिए, ताकि यदि कोई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रदर्शन करने वाला आ जाए तो उससे अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए होने वाले द्वंद्व में शक्ति संतुलन बना रहे ! मेरे हिसाब से यदि लड़कियां किसी भी तरह खाने-पीने, सोने-जागने, उठने-बैठने, घूमने, किसी भी तरह के कपड़े पहनने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मानती हैं, तो उस स्वतंत्रता की रक्षा करने का पहला अधिकार भी उन्हीं लड़कियों का होना चाहिए, किसी भी घटना के लिए समाज या लड़की जिम्मेदार नहीं होती, जिम्मेदार होता है लड़ने वाले दोनों की शक्ति का अंतर, जिसको भापकर सामने वाला किसी पर हमला करने के लिए प्रेरणा लेता है, और मुझे लगता है कि यदि यह शक्ति संतुलन स्थापित हो गया तो फिर शायद ही हमें कभी किसी निर्भया के लिए तख्ती काली करनी पड़े !

– देवेन्द्रराज सुथार

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