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वन कानून से बांस हटाने से 90 साल पुरानी मांग पूरी: जितेंद्र

गैर वन क्षेत्र में ‘बांस’ को ‘वृक्ष’ के स्थान पर ‘घास’ माना जाएगा।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जितेंद्र सिंह

नयी दिल्ली। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारतीय वन अधिनियम से ‘बांस’ को हटाने की सराहना करते हुए कहा है कि इससे पूर्वोत्तर के लोगों की लगभग 90 वर्ष से अधिक पुरानी मांग पूरी हो गयी है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता मेें केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बांस को वन अधिनियम से हटाने के प्रस्ताव के अनुमोदन के बाद राष्ट्रपति ने कल भारतीय वन (संशोधन)अध्यादेश 2017 को मंजूरी दे दी। इसके अनुसार गैर वन क्षेत्र में ‘बांस’ को ‘वृक्ष’ के स्थान पर ‘घास’ माना जाएगा। इसके बाद बांस को आर्थिक रुप से इस्तेमाल करने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
डा. सिंह ने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक है क्योंकि भारतीय वन अधिनियम 1927 में बांस को वृक्ष माना गया। इसके कारण गैर वन क्षेत्र में बांस की खेती में परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व में बांस का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और यह पूर्वोत्तर में इसकी खेती बहुतायत में होती है। सरकार का यह निर्णय पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ले कर आएगा। इससे क्षेत्र में बांस आधारित उद्योग धंधें शुरु होंगे और लोगाें को रोजगार मिलेगा।
उन्होेंने कहा कि पूर्वोत्तर में दो करोड़ से ज्यादा लोग बांस आधारित गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। मात्र एक टन बांस से 315 लोगों को रोजगार दिया जा सकता है।

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