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वसुन्धरा के चार साल : आधी हकीकत आधा फसाना

राजस्थान में भाजपा नीत वसुंधरा सरकार ने 13 दिसम्बर को अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर लिए। किसी भी सरकार की गति, प्रगति और अर्जित उपलब्धियों के लेखे जोखे के लिए चार साल पर्याप्त होते है। वसुंधरा सरकार का दावा है कि इन चार सालों में सरकार ने जनता की सरकार के रूप में संवेदनशीलता से कार्य किये और यह उसीका परिणाम है कि आज समाज के सभी वर्ग सरकार के कार्यों से बेहद संतुष्ट है। वहीँ विपक्ष का आरोप है कि सरकार की जनविरोधी नीतियों से सम्पूर्ण समाज खफा है। वसुंधरा सरकार का दावा है कि चार सालों में सरकार लगातार जनता के बीच गई और जन हितैषी कार्यों को अमलीजामा पहनाया। अनेक नवाचार अपनाये। भामाशाह योजना के माध्यम से साढ़े पांच करोड़ लोगों को जोड़ कर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया। जल स्वावलम्बन जैसी योजना को क्रियान्वित कर मरुधरा को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चैतरफा प्रयास किये। रिसर्जेंट राजस्थान ,सड़क विकास ,अन्नपूर्णा भंडार राजश्री योजना, कौशल प्रशिक्षण आदि में कीर्तिमान स्थापित किये। जन समस्याओं को उनके बीच जाकर सुना और निपटाया। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे पिछलेे चार सालों में जनसेवा की अपनी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के आर्थिक विकास और आधारभूत ढांचे को जन आंकाक्षाओं के अनुरूप मजबूत बनाने में जुटी हैं। उन्होंने कहा हम एक खुशहाल शिक्षित संवेदनशील और समृद्ध राजस्थान की कामना करते हैं ।
वसुंधरा सरकार के दावे के विपरीत विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने चार सालों में कुछ नहीं किया जिससे हर वर्ग दुखी और परेशान है। किसान कर्जा माफी के लिए और कर्मचारी अपनी मांगों के लिए संघर्षरत है। कानून व्यवथा छिन्न भिन्न है। चिकित्सक सडकों पर है। पूरा राजस्थान सड़कों में गड्ढों से भरा पड़ा है। सफाई व्यवथा अस्त व्यस्त है। महंगाई आसमान को छू रही है। रोजगार देने का वादा पूरा नहीं हुआ है। खान घोटाले ने भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किये। आमजन बेहाल है ऐसे में खुशहाली की बात करने जनता के जख्मों पर नमक छिड़कना है। भाजपा के नाराज विधायक घनश्याम तिवाड़ी शुचिता की लड़ाई लड़ रहे है। तिवाड़ी वसुंधरा और सरकार पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगा रहे है।
विकास के दावों और प्रतिदावों के बीच आम आदमी अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी संघर्षरत है। रेतीले धोरों से आच्छादित मरू प्रदेश राजस्थान में आधारभूत सुविधाओं की जंग आज भी जारी है। यह जंग आजादी के 71 वर्षों के बाद आज भी अनवरत जारी है। आम आदमी को जीवन बसर के लिए तीन सुविधाओं की जरूरत होती है। ये तीन बुनियादी और आवश्यक सुविधाएँ रोटी, कपड़ा और मकान की है। इन तीनों बुनियादी सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए आजादी के बाद से ही जदोजहद चल रही है।
यह सही है कि हमने हर क्षेत्र में प्रगति हासिल की है। स्कूलों की संख्या बढ़ी है। छात्रों का नामांकन भी दुगुना-चैगुना हुआ है। राशन सस्ता हुआ है। राशन की दुकानों में पहले की अपेक्षा वृद्धि हुई है। विद्युत के क्षेत्र में भी हम आगे बढ़े हैं। विद्युत क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। बिजली के कनेक्शन तुरन्त दिये जा रहे हैं। गांव-गांव और घर-घर बिजली की रोशनी प्रज्जवलित हुई है। सड़कों का जाल भी चहुंओर देखने को मिल रहा है। गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ा गया है। अच्छी और गुणवत्ता युक्त सड़क निर्माण का दावा किया गया है। पेयजल के क्षेत्र में अच्छी खासी प्रगति हुई है। गांव-गांव और शहर-शहर में पानी पहुंचाया गया है। दूर दराज के क्षेत्रों में पानी पहुंच रहा है। जो गांव पेयजल के लिए सिर्फ वर्षा पर आधारित थे वहाँ जल विभाग की योजनाओं के जरिये पानी पहुंचाया जा रहा है। शुद्ध और स्वच्छ पीने के पानी का दावा किया जा रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्रों में बड़ी कामयाबी हासिल की गई है। गांव-गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाया गया है। आज लगभग सभी ग्रामों में स्वास्थ्य की सुविधा पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। मैट्रो सिटी में बड़े अस्पताल बनाये गये हैं और जटिल से जटिल रोगों का ईलाज किया जा रहा है। परिवार कल्याण की सुविधाएँ भी आम आदमी तक पहुंच रही हैं। औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी हम आगे बढ़े हैं।
प्रदेश के बहुमुखी विकास में तीन चीजें बाधक बनी हुई है। भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और कुशासन प्रगति और विकास के दुश्मन के रूप में उभरे है। बेरोजगारी ने आग में घी का काम किया है। जब तक इन पर काबू नहीं पाया जायेगा तब तक विकास और प्रगति एकांगी होगी। हर सरकार लोक कल्याण का वादा करती है मगर लोक कल्याण के मार्ग में अवरोध बने इन कारकों को समाप्त करने की दिशा में कोई कारवाही नहीं करती। चूँकि राजनेताओं के हित इनसे जुड़े है इसलिए इन बुराइयों को समाप्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि विकास पर भ्रष्टाचार हावी रहता है। जब तक समाज से यह बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं होगी, हम भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगते रहेंगे।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

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