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वाहनों की सरकारी खरीद में देश में विनिर्मित उत्पादों को वरीयता, मेक इन इंडिया को बढ़ावा

नई दिल्ली। सरकार ने वाहनों की सार्वजनिक खरीद में कम से कम 65 प्रतिशत स्थानीय कलपुर्जों से तैयार घरेलू विनिर्मित वाहनों को प्राथमिकता देना अनिवार्य किया है। सरकारी अधिसूचना में यह बात कही गयी है। इसका उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ और स्थानीय रूप से सेवाओं और उत्पादों के उत्पादन एवं विनिर्माण को बढ़ावा देना है। सभी सरकारी इकाइयों को सार्वजनिक खरीद में स्थानीय स्तर पर बने वाहन और वाहन के कलपुर्जों को तवज्जो देनी होगी। उद्योग मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए नियम आईसी (ईंधन की आंतरिक दहन प्रणाली) वाले इंजन वाले वाहनों पर लागू होगी। इसमें दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन और उनके कलपुर्जों तथा रख रखाव भी शामिल होगा। इसमें कहा गया है कि केवल उन्हीं वाहनों को देश में विनिर्मित वाहन माना जायेगा जिसमें लगे कम से कम 65 प्रतिशत कल पुर्जे देश में तैयार हुए हो। वहीं, वाहन कलपुर्जों को स्थानीय रूप से विनिर्मित उत्पाद का दर्जा तभी मिलेगा जब उनमें इस्तेमाल होने वाली कम से कम 60 प्रतिशत चीजें देश के अंदर बनी होंगी। नए नियम लागू हो गए हैं और 31 मार्च 2019 के बाद इसकी समीक्षा की जायेगा। संशोधित अधिसूचना जारी होने तक यह अधिसूचना वैध रहेगी। अधिसूचना में कहा कि स्थानीय आपूर्तिकर्ता को निविदा या बोली के समय खुद से यह प्रमाणित करना होगा कि उसका उत्पाद स्थानीय सामग्री के लिये तय मानक को पूरा करता है और उस स्थान की भी जानकारी देनी होगी।

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