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व्यंग्य : बनाएँ जायकेदार कुर्सी रबड़ी मलाई

कुर्सी रबड़ी मलाई में भारी मात्रा में विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा भी काफी मात्रा में पाई जाती है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कुर्सी रबड़ी मलाई के नियमित सेवन से स्मरण शक्ति में भारी इजाफा होता है; जिससे पूरी दुनिया पर आधिपत्य जमाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में बड़ी सहायक होती है। कुर्सी रबड़ी मलाई में फाइबर और आयरन भी भारी मात्रा में पाए जाते हैं। इससे शरीर चुस्त-तंदुरुस्त और ऊर्जावान बना रहता है व विरोधी राजनीति बाजों के पंख पल भर में काटने के काम आता है। इसके सेवन से मनचाहे आकार-प्रकार, रंग-रूप व डिजाइन में घोटाला करने की क्षमता बढ़ती ही चली जाती है। इसके निरंतर सेवन से संसार के सभी अनैतिक कार्य करने की सुपरमैनीय शक्ति मिलती है व जेल एक पर्यटन केंद्र बन जाता है। कुर्सी रबड़ी मलाई बनाने के लिए कोई ज्यादा सामग्री की जरूरत भी नहीं होती है। बहुत कम सामग्री में इससे कई कुर्सियाँ तैयार की जा सकती है। इसमें मुख्यतः 3 प्रकार की कुर्सियाँ बड़ी जायकेदार होती है। एक कुर्सी मंत्री पद के लिए, दूसरी कुर्सी क्रिकेट खेल संघ के अध्यक्ष पद के लिए और तीसरी कुर्सी किसी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पद के लिए बनाई जाती है। इस हेतु एक टन झूठ का रायता, एक मासूमियत भरा रंग बदलता गिरगिटीय चेहरा, धोखेबाजी के 4 बड़े चम्मच, 2 बड़े चम्मच झूठ की कतरन व एक बड़ा चम्मच बयान बाजी की बारीक कतरन वाला चाहिए। साथ ही एक बड़ा चम्मच जुमलेबाजी, वक्त जरूरत व आवश्यकता के अनुरूप नमक व मिर्च, कट-पेस्ट किए साहित्य के कटे प्याज की बारीक कतरनों, स्वार्थ का नीबू रस व बहुजन हित का हरा धनिया जो पहले ही चापलूसी के चाकू से काटा गया हो। इन्हें पहले से ही तैयार रख लें।

कुर्सी रबड़ी मलाई बनाने का सबसे आसान तरीका यह है कि सबसे पहले एक नॉन स्टिक भावनात्मक मुद्दों वाली कड़ाही में झूठ का रायता गरम कर लें। इसमें चुपके से मासूमियत भरे चेहरे को मिला दें और इसे हल्की सी आँच पर धीरे-धीरे से उबलने दें। जब झूठ कड़ाही से बुड़बुड़ कर बाहर निकलने लगे तो हर एक 15 मिनट बाद धोखेबाजी से भरे हुए बड़े चम्मच की चालबाजियाँ इसमें मिलाते जाएँ। इसे बराबर हिलाते जाएँ। याद रखें अगर धोखेबाजी को पहले से ही किसी काँयेपन के कूकर में उबालकर तैयार कर लिया गया हो और इसे इस समय डाला गया तो कुर्सी के स्वाद में अभिवृद्धि होती देखी-चखी गई है। थोड़ी-थोड़ी देर में घोषणा पत्र, वादों एवं जुमलों को एक-दो उबाल आने पर इसे गाढ़े पेस्ट रूप में मिलाते रहें। याद रखें हर समय मासूमियत भरे चेहरे के साथ में धर्म के तेल में नमक व मिर्च मिलाते जाएँ। ऐसा करने पर भावनाओं की इस नॉन स्टिक कढ़ाई में से कई प्रकार की कुर्सियाँ निकलती नजर आएगी। ये कुर्सियाँ तरह-तरह की रबड़ी मलाई की दिखाई देगी। चुनावी दीपावली के अवसर पर ये बड़ी प्रभावशाली देखी गई है। इन छोटी-मोटी कुर्सियों पर आपका मन होगा। कुर्सी देखते ही मुँह में पानी का पूरा टैंकर आने लगेगा। यह आप जैसे घाघ कुर्सीदास के लिए स्वभाविक ही है। लेकिन आपको केवल बड़ी कुर्सियों पर ही निगाह रखनी है। याद रखें आपने कभी जिंदगी में गुल्ली-डंडा भी नहीं खेला है; लेकिन आप क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद की कुर्सी रबड़ी मलाई को चट करना चाहते हैं। अतः उस कुर्सी की तरफ ध्यान लगा कर बैठे रहिए। अब कड़ाही में से पल-पल कुर्सियाँ पैदा होने लगेगी। आप तुरंत ही लपक लीजिए! झपक लीजिए! एक ही सांस में इस कुर्सियों को गटक लीजिए! अगर इसी समय कुर्सी आसन के नॉन स्टिक पैन में जेल में रहे आपके अनुभवों का गरमा-गरम तेल उँढ़ेल देंगे तो एक अन्य विशिष्ट प्रकार की सेवनीय कुर्सी पैदा होने लगेगी। जिसे हम मंत्री पद की कुर्सी कहते हैं। कई बार यह कुर्सी मुख्य मंत्री पद व उप मुख्य मंत्री पद की भी हो सकती है। इधर-उधर से कट- पेस्ट किए हुए साहित्य की प्याज नुमा बारीक कटी-कटी परम संवेदना की हरी मिर्च में बहुजन हिताय के हरे धनिए की बारीक कटी बुरकें कड़ाही में डालने पर साहित्य की एक नई कुर्सी पैदा होती है। इस तरह से कुर्सी मलाई रबड़ी खाइए और कुर्सी फाइबर-आयरन से भीतरी व बाहरी ताकत बनाइए। कुर्सी के नियमित सेवन से हर जगह, हर समय देश-दुनिया पर/में/पे आराम से लट्ठ बजाइए।

रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान

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