National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

शहरभर में हर्षाेल्लास के साथ मनाया गुरुनानक देव का प्रकाशोत्सव

फरीदाबाद। गुरूनानक देव जी के प्रकोशोत्सव आज शहरभर में हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान जहां जगह-जगह लंगर व भंडारों का आयोजन किया गया वहीं विशाल नगर कीर्तन भी निकाला गया। यह नगर कीर्तन शहर के विभिन्न मार्गाे से होकर गुजरा, जहां सिख समुदायों की साध संगत उनका जोरदार स्वागत किया। प्रकाशोत्सव में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के अनुसार गुरू नानक देव  सिखों के प्रथम गुरू थे। बचपन से ही नानक के मन में आध्यात्मिक भावनाएँ मौजूद थीं। पिता ने पंडित हरदयाल के पास उन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा। पंडितजी ने नानक जी को और ज्ञान देना प्रारंभ किया तो बालक ने अक्षरों का अर्थ पूछा। पंडितजी निरुत्तर हो गए। नानकजी ने क से लेकर ड़ तक सारी पट्टी कविता रचना में सुना दी। पंडितजी आश्चर्य से भर उठे। अनिल वासुदेव ने कहा कि उन्हें अहसास हो गया कि नानक जी को स्वयं ईश्वर ने पढ़ाकर संसार में भेजा है। इसके उपरांत नानक को मौलवी कुतुबुद्दीन के पास पढऩे के लिए बिठाया गया। नानक के प्रश्न से मौलवी भी निरुत्तर हो गए बचपन से ही नानक के मन में आध्यात्मिक भावनाएँ मौजूद थीं। पिता ने पंडित हरदयाल के पास उन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा। पंडितजी ने नानक को और ज्ञान देना प्रारंभ किया तो बालक ने अक्षरों का अर्थ पूछा। पंडितजी निरुत्तर हो गए। नानकजी ने क से लेकर ड़ तक सारी पट्टी कविता रचना में सुना दी। पंडितजी आश्चर्य से भर उठे। उन्हें अहसास हो गया कि नानक को स्वयं ईश्वर ने पढ़ाकर संसार में भेजा है। इसके उपरांत नानक को मौलवी कुतुबुद्दीन के पास पढऩे के लिए बिठाया गया। नानक के प्रश्न से मौलवी भी निरुत्तर हो गए तो उन्होंने अलफए बे की सीफहीं के अर्थ सुना दिए। मौलवी भी नानकदेवजी की विद्वता से प्रभावित हुए। श्रद्धालुओं ने बताया कि गुरू नानक सिखों के प्रथम गुरु हैं। इनके अनुयायी इन्हें गुरु नानक, गुरु नानक देव जी,, बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं। लद्दाख व तिब्बत में इन्हें नानक लामा भी कहा जाता है। इस अवसर पर स्कूली बच्चों के साथ-साथ साध संगत ने शहर में साफ सफाई भी की और पंच प्यारों का स्वागत किया।

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar