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शहर में लगे अवैध होर्डिंग बने निगम अधिकारियों की कमाई का साधन

49 यूबी बोर्ड और 33 गैनडी बोर्ड के महज 26 लाख प्रतिमाह रुपए निगम में होते है जमा

मनोज तोमर/विजय न्यूज ब्यूरो

फरीदाबाद। मंदी की मार झेल रहे नगर निगम फरीदाबाद को निगम के अधिकारी ही हर माह लाखों रुपए का चूना लगा रहे है। शहर में लगे हजारों अवैध विज्ञापनों से होने वाली लाखों की कमाई अधिकारियों की जेब में जा रही है, जबकि नगर निगम को लाल एंड कंपनी द्वारा विज्ञापन की मद से प्रतिमाह महज 26 लाख रुपये मिलते हैं। सूत्रों के अनुसार एसडीओ विज्ञापन ने इन अवैध विज्ञापनों की वसूली करने के लिए कार्यालय में एक निजी व्यक्ति भी तैनात कर रखा है। यह आरोप नगर निगम विज्ञापन विभाग में तैनात सहायक राजेंद्र सिंह ने अपने अधिकारी पर लगाते हुए मुख्यमंत्री और वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव नगर निकाय विभाग से की है। एसडीओ का कहना है कि अवैध वसूली करने से रोकने पर राजेेंद्र सिंह उनके खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है। जांच में सबकुछ सामने आ जाएगा। नगर निगम में बतौर सहाय नलकूप चालक भर्ती हुए राजेंद्र सिंह जाटव के मुताबिक वह 20 जुलाई 2017 से अजरौंदा चौक स्थित कार्यालय में एसडीओ पद्मभूषण के मातहत काम कर रहे हैं। एसडीओ ने उनकी ड्यूटी अवैध विज्ञापन बोर्ड हटाने में लगाई थी। आरोप है कि जब वह अवैध विज्ञापन के बोर्ड हटाते हैं तो एसडीओ कुछ विशेष राजनैतिक पार्टियों के सभी बोर्ड को हटाने का दबाव देते हैं। इसी तरह कुछ निजी अस्पतालों और शिक्षण संस्थाओं के अवैध बोर्ड उतारने से रोक देते हैं। कई बार जनता के दबाव में आकर उन्होंने सभी अवैध बोर्ड हटाए तो अधिकारी ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी तक दे डाली। राजेंद्र सिंह का यह भी आरोप है कि एसडीओ ने सोनू नाम के एक निजी युवक को कार्यालय के सारे अधिकार दे रखे हैं। जी-8 रजिस्टर जो कि सिर्फ सरकारी कर्मचारी के पास ही होना चाहिए उसे सोनू ही अपने पास रखता है और रसीदें काटता है। राजेंद्र सिंह का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने इसकी शिकायत सिटी मजिस्ट्रेट से करने को कहा तो एसडीओ ने धमकी दी, कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट कौन होता है जांच करने वाला, वह मुझसे प्रश्र पूछने का अधिकारी नहीं है। राजेंद्र सिंह ने एसडीओ के खिलाफ मुख्यमंत्री मनोहरलाल, वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव, जिला उपायुक्त, निगम आयुक्त से इसकी लिखित शिकायत की है। गौरतलब है कि नगर निगम ने लाल एंड कंपनी को 26 लाख प्रतिमाह पर विज्ञापन बोर्ड लगाने का ठेका छोड़ा हुआ है। कंपनी के मालिक नवीन अरोड़ा का कहना है कि उनके शहर में 49 यूबी बोर्ड और 33 गैनडी बोर्ड लग रहे है। शेष बोर्ड किसने व किसके कहने से लगाये है, उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट माना कि ये बोर्ड अवैध लगे है व पंजाब एवं हाईकोर्ट के आदेशों की उल्लंघना है। निगम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अवैध होर्डिंग पर निगम 10 हजार रुपए जुर्माना व बोर्ड के साईज पर 660 रुपए प्रति स्केयर फीट का जुर्माना ऐड कर सकता है यानी 100 स्केयर फुट के होर्डिंग पर 6600 रुपए एवं 10,000 यानी कुल 16600 का जुर्माना वसूला जा सकता है। इसी प्रकार मोबाइल वैन पर विज्ञापन चलाने पर 50 हजार तक का जुर्माना नगर निगम वसूल सकता है। कुल मिलाकर इस वक्त पूरे शहर में करीब 50 हजार छोटे-बड़े बोर्ड-होर्डिंग लगे हुए है, जिनसे अगर नियमानुसार जुर्माना वसूला जाए तो न केवल शहर की सडक़ें साफ सुथरी नजर आएगी करोड़ों रुपए का राजस्व भी निगम को प्राप्त होगा। जानकारों का कहना है कि ज्यादातर बोर्ड सत्ता एंड पार्टियों के नेताओं, स्कूलों, कालेजों व बड़े प्रतिष्ठानों के लग रहे है और एक अनुमान के अनुसार प्रतिमाह 20 से 25 लाख की धांधली हो रही है, जिसकी जांच की आवश्यकता है।

क्या कहते है विज्ञापन विभाग के एसडीओ

नगर निगम विज्ञापन विभाग के एसडीओ पदमभूषण का कहना है कि राजेंद्र सिंह ने उन पर झूठे आरोप लगाए हैं। उन्होंने सहायक को अवैध वसूली से रोका तो उनकी झूृठी शिकायत की गई, शिकायत और जांच आने पर वह अपना पक्ष रख कर सच्चाई सामने लाएंगे।

क्या कहती है नगर निगम की मेयर

नगर निगम की मेयर सुमन बाला का कहना है कि विज्ञापन विभाग में अवैध कमाई का मामला मेरे संज्ञान में आया है इसकी जांच करा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी।

 

 

 

 

 

 

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