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शहीदों के बच्चों की ट्यूशन फीस का समाधान जल्द : सेना प्रमुख

नयी दिल्ली। शहीदों के बच्चों की ट्यूशन फीस के भुगतान की सीमा 10 हजार रूपये तय किये जाने के मामले के तूल पकड़ने के बीच सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आज कहा कि सरकार को इसकी जानकारी दी गयी है और रक्षा मंत्री ने भी इस मुद्दे के समाधान का आश्वासन दिया है।
जनरल रावत ने आज यहां एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा , “ इस मामले की जानकारी सरकार को दी गयी है। रक्षा मंत्री को भी इसकी जानकारी है और उन्होंने इसके प्राथमिकता से समाधान का आश्वासन दिया है। ”
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कल ही कहा था कि यह निर्णय सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप लिया गया है लेकिन यह भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है और वह इसकी समीक्षा करेंगी। इससे पहले नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने भी स्टाफ कमेटी के प्रमुख की हैसियत से सरकार के समक्ष यह मामला उठाया है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने पाकिस्तान के साथ 1971 की लड़ाई के बाद 1972 में शहीदों और युद्ध के दौरान शारीरिक रूप से अक्षम हुए जवानों के बच्चों की स्कूल, कॉलेज और अन्य पेशेवर कॉलेजों की ट्यूशन फीस को माफ कर दिया था। इसके तहत इन बच्चों की नर्सरी से लेकर स्नातक तक की शिक्षा का बोझ रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाया जाता था लेकिन गत 1 जुलाई को सरकार ने आदेश जारी कर इन बच्चों की ट्यूशन फीस की सीमा 10 हजार रूपये तक करते हुए कहा था कि सरकार ट्यूशन और छात्रावास के नाम पर केवल 10 हजार रूपये प्रति माह की दर से ही भुगतान करेगी।
सशस्त्र सेनाओं के कर्मियों के 3000 से अधिक बच्चे अभी इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।

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