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शादी का ऑनलाइन पैकेज

मामला अच्छा खासा ऑनलाइनी हो लिया है । सामने ही सब्जी मंडी में पड़ी – पड़ी भिंडियां करवट बदल बदलकर आंखें सुजाए बैठी है ; पर कमबख्त कोई खरीदार नहीं मिल रहा है । हां नेता हो तो उसको हर कोई खरीदने के लिए तैयार है । नेता भिंडियों के मुकाबले ज्यादा बिकाऊ हो लिया है । सारी भिंडियां ऑनलाइन बेची जा रही है । नेता जी ऑनलाइन, ऑफ़लाइन, बेलाइन, टेलाइन हर तरह से बिक रहे हैं । फुटपाथ पर लेटा एक भिखारी भी अपने बोरे में नेता लिए पड़ा है । सामने एक सेल्समैन दिखाई पड़ रहा है ; जो भारी भरकम लगेज बोरे के भीतर चमकीले – दमकीले पैकेट में इठलाती भिंडियों का पैकेट सीधे मिसेज जांगिड़ के घर पहुंचा रहा है । दाना जी की ढाणी से गवाड़िया तक ऑनलाइनी हो लिया है । गोभी, कद्दू, टमाटर, केले, नेता, अफसर … । सब बिक रहे हैं ऑनलाइन फर – फर । जैसे कोई मंत्री बिकता हो किसी रिसॉर्ट में मुख्यमंत्री की लालसा में ! दसों दिशाओं में ऑनलाइनी बवंडर अपनी रफ्तार से सबको चपेट में ले रहा है । हर गांव ढाणी तक नेता – अफसर ऑनलाइन बिकने के लिए तैयार खड़े हैं ।

बड़ा ही चकाचक सीन दिखाई पड़ रहा है ऑनलाइन प्रेम, प्यार, लफड़ा, झगड़ा, सब कुछ हुआ जा रहा है । ऑनलाइन प्यार हुआ और अब ऑनलाइन शादी की रस्म अदायगी भी । सीन इस तरह से है कि मोटरसाइकिल धारक एक बड़े से बोरे में से शानदार पैकेट को मिस्टर जांगिड़ के हवाले कर रहे हैं । पेटीएम, एटीएम, भीम या अन्य किसी क्लिक से पेमेंट किया जा रहा है । बिल्कुल यंत्रवत ! खोला, देखा । शादी का कार्ड और उसमें दर्ज एक विशेष मोबाइल ऐप । जिसे डाउनलोड करके शादी की रस्म अदायगी का अपूर्व अवसर । तुरत – फुरत ही वांछित शादी एप डाउनलोड किया । उसमें खाने का मीनू, आशीर्वाद के तरीके, एंजॉयमेंट के तरीके, डांसियाने का फोर्मेट और न जाने क्या-क्या ! बस आपने उसमें पांच सौ रुपये का आशीर्वाद पेटीएम किया । तुरंत ही धन्यवाद के रेप सॉन्ग बजने लग गए । सीन यह है कि यह सब कार्यक्रम आप मजे से बाथरूम सीट पर बैठे – बैठे कर रहे हैं । फिर बाथरूम सीट पर बैठे – बैठे ही अपने मनपसंद भोजन का ऑर्डर भी दे रहे हैं । ऑनलाइन शादी का मजा ही कुछ और है !

आगे के ऑप्शन में आपको खाने के लिए ऑर्डर प्लेस करना होगा । अगर पांच सौ रुपये आशीर्वाद में दिए तो दो जनों के लिए खाना । अगर हजार रुपये दिए तो चार जनों के लिए । मीनू दर मीनू खुलते जा रहे हैं । बस आप क्लिकियाते रहिए ! टचियाते रहिए मोबाइल की स्क्रीन को ! थोड़ी ही देर में आपकी छत पर ड्रोन मंडरा रहा होगा । अब आपको यह करना कि सीधा बाथरूम सीट छोड़कर छत पर खड़े – खड़े अपना ‘ओटीपी’ बताना होगा । बस यह लीजिए शादी का डिनर घर पर हाजिर ! बस हो गई ऑनलाइन शादी ! न आपको जाना ; न उनको आना ! दंपति ऑनलाइन सुहागपंथी निपटा रहे हैं । एक दूसरे को डिजिटली माला पहना रहे हैं । ऑनलाइन बच्चे की डिलीवरी होगी तो आपको फिर से कोई नया ऐप डाउनलोड करना पड़ेगा ! चलूं ! छत की ओर कोई ड्रोन मंडरा रहा है । ऑनलाइन रोटी का आर्डर दिया था । पत्नी के आर्डर की अनुपालना में छत पर खड़ा ‘ओटीपी’ चैक रहा हूं ।

— रामविलास जांगिड़ , 18 , उत्तम नगर , घूघरा , अजमेर (305023) राजस्थान

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