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शिकायत मिलते ही जेल जाने वाले भारत के पहले व्यक्ति बने दीपक गौड़

नई दिल्ली। आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है की जिस संसद मार्ग थाने में आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रिय संयोजक दीपक गौड़ के विरुद्ध मुकद्दमा दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। घटना के वक्त दीपक गौड़ उसी संसद मार्ग थाने के ड्यूटी आफिसर के साथ पुलिस जीप में बैठ कर राष्ट्रपति भवन एवं प्रधान मंत्री कार्यालय ज्ञापन देने गए हुए थे। .
शिकायत-कर्ता संगठनो एवं न्यूज़ चेनलों द्वारा  घटना के प्रत्यक्ष प्रमाण के तौर पर दिखाई गयी किसी भी वीडियो में घटना स्थल पर दीपक गौड़ अथवा आरक्षण विरोधी पार्टी का एक भी सदस्य मौजूद नहीं है गैरतलब है कि संसद मार्ग पर कम से कम 20  कैमरे भी मौजूद हैं संसद मार्ग थाना इंचार्ज ने उनमे से किसी भी कैमरे की जाँच करना भी जरुरी नहीं समझा और न ही अपने ड्यूटी आफिसर से पूंछा कि वह घटना के वक्त कहाँ था सिर्फ शिकायत मिलते ही मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया।
ज्ञात होना चाहिए की मोदी सरकार द्वारा एससी एक्ट में जनवरी 2016 में बदलाव किया था जिसके अनुसार एससी एक्ट में मामला दर्ज करने के लिए कोई गवाह की जरुरत नहीं , कोई जाँच की जरुरत नहीं, आरोपी को शिकायत मिलते ही तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए, शिकायत करता द्वारा शिकायत वापस लेने पर भी 6 महीने जमानत न दी जाये जैसे प्रावधान कर इस एक्ट को मजबूत बनाया था
सुप्रीम कोर्ट ने इस संशोधन पर संज्ञान लेते हुए कहा था की हम किसी निर्दोष को जेल नहीं भेज सकते इसलिए मुकद्दमा दर्ज होने से पहले एक अधिकारी जाँच करेगा की शिकायत झूठी तो नहीं है। उसके उपरांत ही मामला दर्ज किया जाए।
प्रधान मंत्री मोदी जी ने स्वयं अगुवाई करते हुए लोकसभा एवं राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को निरस्त करने का बिल पेश किया था जो पूर्ण बहुमत के साथ दोनों सदन से पास हो गया कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों ने इसे प्रधान मंत्री द्वारा देरी से लिया हुआ। फैसला बताते हुए समर्थन कर बिल को बहुमत से पास करवाया ही साथ में अपने सिर ताज बांधने में कोई कसर नहीं छोड़ी
आरक्षण विरोधी पार्टी के संयोजक दीपक गौड़ ने इस बिल के विरोध में थाना संसद मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर जातिगत आरक्षण एवं एससी एक्ट को पूर्णतया समाप्त करने की मांग को लेकर प्रधान मंत्री मोदी जी को 9 अगस्त को ज्ञापन दिया था और मांगे ना माने जाने पर पूरे देश में आरक्षण विरोधी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किये जाने की चेतावनी दी थी परन्तु मोदी सरकार ने उनको झूठे मनगढ़ंत आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

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