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शिक्षक पात्रता परीक्षा में पूछा जातिसूचक सवाल, खड़ा हुआ विवाद

नई दिल्ली। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) की शिक्षक पात्रता परीक्षा में जातिगत सवाल पूछे जाने का मामला सामने आया है। दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने जाति को लेकर प्रश्न में प्रयोग किए शब्द को लेकर सवाल उठाएं है। मंत्री गौतम ने मामले की जांच की मांग करते हुए सोमवार को इस मामले में मुख्य सचिव से मिलने की बात कही है। वहीं, मामले में डीएसएसएसबी का कहना है कि इस प्रकार का मामला संज्ञान में आया है। परीक्षा के मूल्यांकन के दौरान संबंधित प्रश्न का अंक नहीं जोड़ा जाएगा। दरअसल, पूरा मामला शनिवार को प्राइमरी शिक्षक के लिए आयोजित परीक्षा में पूछे गए सवाल को लेकर है। परीक्षा में हिंदी भाषा और बोध अनुभाग के प्रश्नपत्र में सवाल नंबर 61 में एक जाति से संबंधित सवाल पूछा था। इस प्रश्न में जाति को आधार बनाकर पूछा गया था कि शादी के बाद पत्नी को जाति के आधार पर क्या कहा जाएगा। इस सवाल को लेकर अब लोग आपत्ति जताने लगे है। सोशल मीडिया पर भी इस सवाल और डीएसएसएसबी की जमकर आलोचना की जा रही है।
दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि हर जाति को लेकर शब्द-अपशब्द होते हैं। उसके उपयोगकर्ता के शब्दों का चुनाव उसके विचारों को उच्च या नीच बनाते हैं। डीएसएसएसबी के पास हिंदी में कबीर, तुलसीदास, वाल्मीकि समेत अन्य व्यक्तियों के बारे में सवाल पूछे जाने का विकल्प था। डीएसएसएसबी निगम और दिल्ली सरकार के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के ४३६६ पदों के लिए परीक्षा ले रही है। इसके लिए कुल १.२५ लाख आवेदन आए थे। दिल्ली सरकार के स्कूलों के लिए ऑनलाइन परीक्षा हो रही है जबकि निगम के लिए ऑफलाइन परीक्षा ली जा रही है। परीक्षा सात अलग-अलग चरणों में शुरू हुई है। ३० सितंबर से शुरू हुआ चरण नवंबर तक चलेगा। १३ अक्तूबर की परीक्षा निगम के प्राइमरी स्कूल में भर्ती के लिए थी, जिसके पेपर में जातिसूचक शब्द से संबंधित सवाल पूछा गया था। राजेंद्र पाल गौतम (समाज कल्याण मंत्री, दिल्ली सरकार) ने कहा कि डीएसएसएसबी एलजी के अधीन आता है, उन्हें इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। मैं सोमवार को खुद मुख्य सचिव से मिलकर दोषियों पर केस दर्ज कराने की मांग करूंगा।

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