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संत निरंकारी मिशन द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि

दिल्ली। संत निरंकारी मिशन द्वारा भारत के पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा गया है कि वह धार्मिक विचारों वाले तो थे परंतु कट्टरवाद् की कड़वाहट से कहीं दूर रहे। उनका कथन था कि धर्म का काम हमें एक दूसरे के निकट लाना है ना कि दूर करना। उनका यह भी मानना था कि धर्म और शांति एक साथ चलते हैं, जहाँ धर्म है वहाँ शांति का होना भी स्वाभाविक हो।
मिशन की ओर से ये उद्गार एक पत्र द्वारा व्यक्त किये गए हैं जो आज श्री सी.एल. गुलाटी जी, सचिव संत निरंकारी मण्डल की अध्यक्षता में एक प्रतिनिधि मण्डल द्वारा इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित समारोह में अर्पित किया गया जहां देशभर की ओर से उन्हें श्रद्धाँजलि दी गई, उनके जीवन से प्रेरणाएं ली गई।
पत्र में कहा गया है कि मिशन के सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं संसार भर में रहने वाले श्रद्धालु भक्त सभी अपनी ओर से शोक व्यक्त करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि निरंकार प्रभु परमात्मा हम सबको बल-बुद्धि दे ताकि हम भी अटल जी की भांति प्रीत-प्यार, एकता, शांति तथा धार्मिक सद्भाव के सिद्धांतों पर चल पाएं।
प्रतिनिधि मण्डल ने याद कराया कि अटल जी एक बार संत निरंकारी कॉलोनी आए और बाबा गुरबचन सिंह जी से वार्तालाप करते हुए उन्होंने कहा कि मैं जो प्रीत-प्यार तथा आदर भाव यहां इस मिशन में देख रहा हूं, मैं इसे देश भर में देखना चाहता हूं।
पत्र में कहा गया है कि अटल जी धार्मिक विचारों के तो थे ही परंतु उनमें कट्टरवाद की कड़वाहट कहीं भी देखने को नहीं मिलती थी। वह कहा करते थे कि धर्म हमें ऐसी शिक्षा दे कि दूसरों की सहायता करना हम सबका स्वभाव बन जाए। धर्म हमें बांटने का नहीं, जोड़ने का काम करे। वह मानते थे कि जहां धर्म है वहां शांति भी होनी चाहिए। हमने विज्ञान तथा टेक्नोलॉजी में तो बहुत उन्नति कर ली है परंतु मानव की मानसिक आवश्यकताओं की ओर ध्यान नहीं दिया। आज जरूरत है हर नागरिक अपने आपको मानव परिवार का अंग समझे और धार्मिक तथा सांस्कृतिक भिन्नताओं को किसी प्रकार भी लड़ाई-झगड़ों अथवा हिंसा का कारण बनने ना दे।
पत्र में यह भी कहा गया है कि मिशन का विश्वास है कि अटल जी ने अपने महान विचारों तथा सार्थक योगदान द्वारा अपने आपको अमर कर लिया है। उनके शरीर त्यागने के बाद भी उनका युग जारी रहेगा। वह सचमुच भारत के रतन थे, दूरदर्शिता तथा साहस के लिए प्रशंसा के पात्र थे। वह नम्रता तथा मानवता की जीवन्त मूरत थे।

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