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समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर मिले: कोविंद

नयी दिल्ली . राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संवेदनशील , समरस और ऐसे समाज के निर्माण पर जोर दिया है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को विकास के समान अवसर मिले और वह अपने आप को सशक्त महसूस करे।
श्री कोविंद ने आज यहां दिव्यांग जनों के सशक्तीकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि देश का भविष्य उसके नागरिकों के सशक्तीकरण पर निर्भर है । ‘ सबका साथ सबका विकास ’ की धारणा पर आगे बढते हुए सभी को इस बात के लिए प्रतिबद्ध होना होगा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उसके विकास के लिए समान अवसर मिलें। इसके लिए ऐसे संवेदनशील तथा समरस समाज का निर्माण जरूरी है जहां हर कोई सशक्त महसूस करे तथा जहां किसी एक का दर्द सबको समान रूप से महसूस हो। उन्होंने कहा कि इस भावना से देश मजबूत होगा।

The President, Shri Ram Nath Kovind paying floral tributes at the portrait of the former President, Late Dr. Rajendra Prasad on the occasion of his 133rd birth anniversary,

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर उसके जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है और इसी दिशा में सरकार दिव्यांग जनों के लिए रोजगार सृजन की योजना चला रही है जिसमें आरक्षण की व्यवस्था की गयी है। दिव्यांग जनों के लिए रिक्त पदों पर तेजी से नियुक्ति की जा रही है यह नये भारत की नयी सोच को दर्शाता है। इसी के चलते दिव्यांग कलेक्टर , इंजीनियर , राजनयिक , डॉक्टर और वैज्ञानिक बनकर देश के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं। सरकार की वर्ष 2022 तक 25 लाख दिव्यांग जनों को रोजगार प्रदान करने की योजना है। श्री कोविंद ने कहा कि दिव्यांग जन भी समाज के महत्वपूर्ण अंग हैं और उनके विकास के बिना समाज का विकास अधूरा है। उन्होंने कहा कि शिशुकाल में ही सावधानी, उचित इलाज, टीकाकरण, सही पोषण, स्वच्छता और मातृत्व देखभाल पर ध्यान दिया जाये तो दिव्यांगता में कमी लाना संभव है। इसके लिए जागरूकता फैलाई जानी चाहिए और ऐसे प्रयास किये जाने चाहिए कि दिव्यांग जन गरिमा के साथ जीवन व्यतीत कर सकें और जीवन के बौद्धिक, सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक हर क्षेत्र में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

The President, Shri Ram Nath Kovind at the presentation of the “National Awards for the Empowerment of Persons with Disabilities (Divyangjan), 2017”, on the occasion of the “International Day of Persons with Disabilities”, organised by the Department of Empowerment of Persons with Disabilities (Divyangjan), Ministry of Social Justice and Empowerment, in New Delhi on December 03, 2017.
The Union Minister for Social Justice and Empowerment, Shri Thaawar Chand Gehlot and the Minister of State for Social Justice & Empowerment, Shri Krishan Pal are also seen.

उन्होंने कहा कि दिव्यांगता मानव जीवन की ‘ऐसी अवस्था’ है, जिसका किसी को भी जीवनकाल में कभी भी सामना करना पड़ सकता है। सरकार दिव्यांग जनों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है और उसने दिव्यांगताओं की श्रेणी में बढोतरी करते हुए इनकी संख्या सात से बढ़ाकर 21 कर दी है। इससे ज्यादा से ज्यादा दिव्यांग जनों का जीवन बेहतर एवं सम्मानजनक बन सकेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार दिव्यांग जनों के जीवन को सशक्त, सक्षम तथा सरल बनाने के लिए समय-समय पर सूचना और प्राैद्योगिकी के माध्यम से भी नयी सुविधाएं प्रदान कर रही हैं। इस कड़ी में सार्वजनिक भवनों, पर्यटक स्थलों और परिवहनों को दिव्यांग जनों के लिए सुगम्य बनाया जा रहा है ।
खेल, विज्ञान और कला के क्षेत्र में नयी ऊंचाइयों को छूने वाले देश के दिव्यांग जनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन्होंने एक आदर्श स्थापित किया है तथा दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है। दिव्यांग जनाें के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 14 श्रेणियों में उन व्यक्तियों, संगठनों और राज्य विशेष को दिये जाते हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में असाधारण कार्य किये हैं।

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