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सर्वोच्च न्यायालय का काम काज राजभाषा हिन्दी में करने वाले जजों की ही नियुक्ति करने का अनुरोध – हिन्दू संगठन

नई दिल्ली। हम हिन्दू संगठन आपकी जानकारी में ला रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के असंवैधानिक कोलेजियम की सिफारिश पर सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एक और ईसाई जज के एम जोसफ की जा रही नियुक्ति पर हम हिन्दू संगठन गुस्से में है। इस मामले में दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनो की बैठक में न केवल गुस्सा प्रकट किया गया बल्कि असंवैधानिक कालेजियम को भी आड़े हाथों लिया गया।
मान्यवर, हम हिन्दू संगठन आपकी जानकारी में ला रहे हैं कि एक सोची समझी साजिश के तहत सर्वोच्च न्यायालय में नक्सली ईसाई आतंकवादियों के पैरोकार आतंकवादी ईसाई मिश्निरियों के कान्वेन्ट में पढ़े जजों की भरती की जा रही है। इसके पीछे सी आई ए और उसकी पाली नक्सली आतंकवादी ईसाई मिश्निरियों का मकसद 2050 तक भारत को काटकर एक अलग ईसाई देश बनाना है। इस देशद्रोही साजिश को अंजाम देने में सर्वोच्च न्यायालय के ईसाई जजों की भी खास भूमिका है। कितना भी खूंखार नक्सली ईसाई आतंकवादी हो, उसको पता है कि सर्वोच्च न्यायालय में उसके अपने ही लोग न्यायाधीश की कुर्सी पर विराजमान है। जो उनके द्वारा एक-एक दिन में 76-76 सैनिकों का कत्लेआम करने पर भी जमानत दे देंगे। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण सर्वोच्च न्यायालय के जजों द्वारा खूंखार नक्सली ईसाई आतंकवादी बिनायक सेन और जी एन साईं बाबा को जमानत देना हैं और नक्सली ईसाई आतंकवादियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ की कारगर युद्ध प्रणाली सलवा जुड़ूम को प्रतिबन्धित करना है। इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय के जजों ने आज तक किसी भी नक्सली ईसाई आतंकवादी को सजा नहीं दी। ईसाई जजों का यह गैंग हिन्दुओं के धार्मिक मामलों में भी लगातार हस्तक्षेप करके मूलाध्रिकार 25 और 26.ख का भी हनन् कर रहा हैं।
इसी के साथ सर्वोच्च न्यायालय में जिस प्रकार से आपके 24-11-98 के राजभाषा हिन्दी सम्बन्धी आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है जिनमें सर्वोच्च न्यायालय को हिन्दी में दायर याचिका स्वीकार करने ओर हिन्दी में आदेश देने का आदेश दिया गया है। उससें भारत का लोकतन्त्र खतरे में पड़ गया है क्योंकि लोकतन्त्र के तीसरे स्तम्भ जिस संवैधानिक संस्था सर्वोच्च न्यायालय पर संविधान का पालन कराने की जिम्मेदारी दी गयी है वह सर्वोचच न्यायालय संविधान के विरूद्ध काम कर रहा है। यहां संविधान मे रक्षक ही संविधान के भक्षक बने हुए है फिर लोगों को न्याय कौन देगा?

मान्यवर,असंवैधानिक कोलेजियम न्यायधीशों की नियुक्ति में सर्वेसर्वा बना हुआ है उसका संविधान में कहीं पर भी उल्लेख नहीं है। संविधान में केवल और केवल राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की सिफारिश पर ही न्यायाधीशों की नियुक्ति करने को कहा गया है। ऐसे में संवैधानिक पदों पर बैठे जो लोग भी असंवैधानिक कालेजियम का साथ दे रहे हैं वे सब ही संविधान के प्रति ली गयी सत्य और निष्ठा की शपथ को तोड़ रहे हैं और इस शपथ को तोड़ने के बाद उनका इस पद पर बने रहने का कोई भी औचित्य नहीं है।
इस ज्ञापन द्वारा महामहिम जी से अनुरोध है कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ओर उच्च न्यायालयों के जजों की सरकार द्वारा दिनांक 3-8-17 को जारी की गयी अधिसूचना को रद्द किया जाये क्योंकि न तो इसके लिये संविधान के अनुच्छेद 124क और अनुच्छेद 217 के तहत राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की और से कोई सिफाारिश महामहिम से नहीं की गयी है और राज्यों के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में केवल ओर केवल सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और राज्यों के राज्यपाल से ही परामष्र करने का संविधान में उल्लेख है। कोलेजियम के 4 न्यायाधीश ने राज्यों के मुक्ष्य न्यायाधीश की नियुक्तिकी सिफारिश प्रक्रिया में शामिल होकर संविधान के अनुच्छेद 217 का उल्लंघन किया है ओर संविधान के प्रति ली सच्ची निष्ठा की शपथ को तोड़ने का गुनाह किया है जिसकी संविधान किसी भी हालत में इजाजत नहीं देता।
मान्यवर,हम हिन्दू संगठन जल्द ही सर्वोच्च न्यायालय के जजों की इस असंवैधानिक गुंडागर्दी के खिलाफ एक प्रेस कान्फ्रेंस हिन्दू महासभा भवन में आयोजित कर रहे हैं। उसके बाद भी हमें न्याय नहीं मिला तो संविधान की रक्षा के लिये सरकार द्वारा दिनांक 3-8-18 को जारी की गयी नियुक्ति सम्बन्धी सूचना को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जायेगी जैसा कि हमने श्री दीपक मिश्रा की मुख्य न्यायधीश के तौर पर की गयी असंवैधानिक नियुक्ति को अपनी याचिका संख्या 728 / 2017 स्वामी ओम जी बनाम् कैबिनेट सचिवालय के जरिये दिनांक 23-8-17 को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

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