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सुप्रीम कोर्ट सख्त: 5 साल में 5 गुना संपत्ति वाले नेताओं पर कार्रवाई

नेताओं की कमाई 500 फीसद बढ़ी, अज्ञात स्रोतों से BJP की आय 81 तो कांग्रेस की 71%

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट नेताओं की तेजी से बढ़ती आय को लेकर हैरान है और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। वहीं एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) के अनुसार अज्ञात स्रोतों से चंदा मिलने के मामले में भाजपा सबसे आगे है। उसे वर्ष 2015-16 में 461 करोड़ रुपए अज्ञात स्रोत से मिले जो उसकी कुल आय का 81 प्रतिशत है। जबकि कांग्रेस को 186 करोड़ रुपए मिले जो उसकी कुल आय का 71 प्रतिशत है। कुल मिलाकर दोनों पार्टियों को 646.82 करोड़ रुपए अज्ञात स्रोत से मिले और यह उनकी कुल आय का 77 प्रतिशत से अधिक है। ये निष्कर्ष चुनाव आयोग को दोनों पार्टियों की ओर से पेश आय और खर्च के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है। चुनाव सुधारों पर काम करने वाले गैर सरकारी संगठन एडीआर के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस को आय मुख्य रूप से स्वैच्छिक योगदान और कूपन बिक्री से होती है। वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान दोनों पार्टियों की कुल आय 832.42 करोड़ रुपए रही। इसमें भाजपा की आय 570.96 करोड़ रुपए है। भाजपा को स्वैच्छिक योगदान के रूप में 459.56 करोड़ रुपए मिले। अगर इसमें 20 हजार रुपए से अधिक के चंदे को शामिल करें तो यह आंकड़ा 536.41 करोड़ रुपए है। दूसरी ओर इसी अवधि में कांग्रेस ने कूपनों की बिक्री से 167.96 करोड़ रुपए प्राप्त किए। क्या है अज्ञात स्रोत से आयअज्ञात स्रोत से आय उसे मानी जाती है जहां 20 हजार रुपए से कम के चंदे के लिए स्रोत घोषित नहीं किया जाता है। इस तरह की आय में कूपनों की बिक्री, राहत कोष, विविध आय, बैठकों या मोर्चा के लिए स्वैच्छिक योगदान के लिए मिलने वाली राशि शामिल होती है। इस तरह से चंदा देनेवालों के नाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होते हैं।

नेताओं की आमदनी बढ़ी 500 फीसदी तक

नेताओं की आमदनी जिस रफ्तार से बढ़ रही है उससे सुप्रीम कोर्ट भी हैरान है। वह इस बात से ज्यादा नाराज है कि बार-बार कहने के बावजूद केंद्र सरकार इस तरह के राजनीतिज्ञों का ब्योरा अदालत को क्यों नहीं मुहैया करा रही है। वह यह भी नहीं बता रही है कि उसने ऐसे राजनीतिज्ञों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। अदालत ने केंद्र को आदेश दिया है कि 12 सितंबर तक मामले से जुड़ा सारा ब्योरा मुहैया कराए। केंद्र अगर नहीं चाहता कि ये सूचना सार्वजनिक हो तो वह सीलबंद लिफाफे में इसे अदालत में जमा करा सकता है, लेकिन उसे यह कारण भी बताना होगा कि आखिर आमदनी से जुड़े ब्योरे को वह सबके सामने लाने से क्यों बच रहा है। जस्टिस जे चेलमेश्वर व एस अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जो हलफनामा उन्हें दिया है वह अधूरा है। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार एक तरफ कह रही है कि वह चुनावी सुधारों की समर्थक है, लेकिन इस मसले पर वह चुप्पी साधे है। केंद्र के रवैए पर सवाल खड़े करते हुए पीठ ने कहा कि सरकार बताए कि अभी तक इस मामले में क्या कदम उठाए गए हैं। केंद्र के वकील ने कहा कि सरकार स्वच्छ व निष्पक्ष चुनाव कराने की दिशा में अदालत के किसी भी फैसले का स्वागत करेगी। सरकार खुद ही स्वच्छ भारत अभियान चला रही है। ये केवल कचरे को साफ करने के लिए ही नहीं है। पीठ ने कहा कि उसे इस मामले में विस्तृत जानकारी चाहिए। सीबीडीटी ने ऐसे नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई की है तो उसका ब्योरा भी इसमें शामिल करें। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में इस आशय की याचिका लोक प्रहरी नाम के गैर सरकारी संगठन ने दाखिल की थी। उसकी सुनवाई के दौरान पीठ ने यह तल्ख टिप्पणी की। याचिकाकर्ता का कहना है कि नामांकन भरते समय उम्मीदवार को अपनी संपत्ति की घोषणा करनी होती है। इसमें खुद के साथ पत्नी व बच्चों की आमदनी को शामिल किया जा रहा है, लेकिन इसमें कहीं भी इसका जिक्र नहीं है कि आमदनी का स्रोत क्या था। संगठन की मांग है कि संपत्ति की घोषणा करने वाले प्रपत्र में आमदनी के स्रोत का कॉलम जरूर जोड़ा जाए।

एडीआर ने दिए चार उदाहरण

सुप्रीम कोर्ट में जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में बढ़ोतरी के मामले में एडीआर (एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म) ने चार उदाहरण पेश किए। इनकी संपत्ति में 12 सौ फीसदी का इजाफा हुआ। 22 ऐसे हैं जिनकी संपत्ति पांच सौ फीसदी तक बढ़ी जबकि एक सांसद की संपत्ति 21 सौ फीसदी तक भी बढ़ी। ब्योरे में कहा गया कि असम के नेता की संपत्ति पांच सौ फीसदी तक बढ़ी तो केरल के नेता की संपत्ति में 17 सौ फीसदी तक का इजाफा हुआ।

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