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स्वयं के खर्चे पर मूर्ति बनाने की अनूठी पहल

 झुंझुनू । झुंझुनू जिले की चिड़ावा पंचायत समिति के खुडानियां गांव के 44 वर्षीय मूर्तिकार वीरेन्द्र सिंह शेखावत एक ऐसे कलाकार है, जो एक साथ एक सौ शहीदों की मूर्तियां बना रहे हैं। शेखावत का कहना हैं कि शहीद जिस बटालियन का जवान था। उसी बटालियन के अनुरूप उनके बेल्ट का बैज,उनके सर की टोपी और बन्दूक या राईफल को मूर्ति के साथ बनाया जा रहा हैं। उनका कहना है कि एक शहीद की मूर्ति बनाने में 10 मिस्त्रियों को संयुक्त रूप से 10 दिन का समय लगता है, जिसकी लागत एक लाख रूपये के लगभग आती है।
खुडानिया गांव में बन रही शहीदों की मूर्तियों को बनाने का पूरा खर्च राजस्थान सैनिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर जिन्हे राजस्थान सरकार द्वारा राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है द्वारा किया जा रहा है। बाजौर का कहना है कि वे आगामी दो माह में राज्य के शेष जिलों में शहीदों के घर एवं उनके मूर्ति स्थलों पर जाकर अपनी श्रद्वांजलि अर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य में 1592 शहीद हुये हैं,जिनमें से अधिकतर शहीद कारगिल युद्व से पहले के हैं। इन शहीदों के परिजनों को ना तो अभी तक कोई विशेष पैकेज मिला था और ना ही उनके आश्रितों मे से किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी गई थी। लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने यह निर्णय लिया कि कारगिल युद्व से पहले के जितने भी शहीद हुयें हैं, उनके ब्लड रिलेशन वाले एक व्यक्ति को राज्य सरकार उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी लगाएगी। यह धोषणा उन्होंने झुंझुनू जिले में शहीद सैनिकों के आश्रितों के सम्मान समारोह में भी की थी।
अब तक सीकर एवं झुंझुनू के करीब 15 शहीदों के आश्रितों को राजकीय सेवा मे नौकरी पर लगाया जा चुका है,शेष की प्रकिया राज्य स्तर पर चल रही है। बाजौर से जब यह पूछा गया कि आप इतनी बड़ी राशि खर्च कर रहे है तो आप को कैसा लग रहा है, तो उनका जवाब था कि यह सब शहीदों के नाम इसलिए किया जा रहा है कि शहीद देवताओं से कम नहीं है। आजादी के बाद प्रेम सिंह बाजौर पहले व्यक्ति है जिन्होंने पहली बार शहीदों के घर एवं उनकी मूर्ति स्थलों पर जाकर शहीद के आश्रितों का दु:ख-दर्द जाना है। यही नही बाजौर ने स्वयं एवं अन्य सहयोगियों के सहयोग से 25 करोड़ रूपये की लागत से राजस्थान के 1150 शहीदों की मूर्तियां बनवाकर दे रहे हैं और उनके लोर्कापण की शुरूआत भी उन्होंने काफी समय पहले से कर दी हैं। इस राशि में शहीदों की मूर्तियों को मूर्ति स्थल तक पहुंचाने का खर्चा भी शामिल हैं।
राज्य सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर ने बताया कि 100 मूर्तियां खुडानियां गांव में बनवाई जा रही है। जिनमें से 20 शहीदों की मूर्तियां लगाई जा चुकी हैं और 40 के लगभग मूर्तियां बनकर तैयार हैं तथा 40 मूर्तियां अगले 2 माह में बनकर तैयार हो जाएंगी। जिनको उनके गांव में लगाने की शुरूआत उनके परिजनों द्वारा मूर्ति स्थल का प्लेटफार्म बनवाने के बाद की जाएगी। मूर्ति स्थल का स्टेच्यू विधायक एवं सांसद के कोटे से या स्वयं परिजनों द्वारा बनवाया जाएगा,जबकि आदमकद मूर्ति के निर्माण पर खर्च होने वाली राशि बाजौर स्वयं खर्च कर रहे है। उन्होंने बताया कि लिम्बका एवं गिनीज बुक में इस अभियान के दर्ज होने की कार्यवाही भी चल रही है। उनका कहना है कि शहीद की कोई जाति एवं धर्म नहीं होता है। शहीद देश की धरोहर हैं और हमें इन्हें देवता की तरह पूजना चाहिए तथा इनके परिजनों के मान सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं रखनी चाहिए। शहीदों ने जब अपनी शहादत देकर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया हैं तो, हम सबका भी फर्ज बनता हैं कि उनकी याद को चिर स्थाई बनाए रखने के लिए हर वर्ष उनकी पुण्य तिथि पर हम उन्हें याद करें।

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