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स्वाइन फ्लू की महामारी से जूझ रहा है देश

देश में इन दिनों हर तरफ स्वाइन फ्लू की ही चर्चा है। हर व्यक्ति चिंतित है कि कहीं उसे भी स्वाइन फ्लू न हो जाये। देश के कई प्रदेशों में इन दिनों स्वाइन फ्लू का कहर बरपा हुआ है। ऐसा लगता है जैसे स्वाइन फ्लू के मरीजों की बाढ़ आगई है। सरकार समझ नहीं पा रही है कि आम तौर पर सर्दियों में होने वाला स्वाइन फ्लू इस बार मानसून के सीजन में कैसे फैल रहा है। नमी की यह जानलेवा बीमारी हल्की सर्दी और हल्की गर्मी में पैदा होती है। मगर लगता है अब इस बीमारी ने तेज गर्मी में भी दस्तक दे दी है। गरीब से अमीर तक इसकी चपेट में आरहे है। डॉक्टरों के समझ में नहीं आरहा है कि आखिर इस बीमारी से कैसे निपटे। देश के बड़े अस्पतालों में जाँच और उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध है मगर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यह सुविधा सुलभ नहीं होने से मरीजों की अकाल मौत की खबरें आरही है। राजस्थान में एक विधायिका कीर्ति कुमारी की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में इस साल 20 अगस्त तक 1,094 लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है जो पिछले साल के आंकड़े के करीब चार गुना है। अब तक इस बीमारी के कुल 22,186 मामले सामने आए हैं। महाराष्ट्र में एच1एन1 संक्रमण से सबसे ज्यादा 437 लोग मारे गए हैं. गुजरात में 269, केरल में 73 और राजस्थान में 69 लोगों ने इस बीमारी के कारण दम तोड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2016 में यह संख्या क्रमशरू 265 और 1,786 थी। महाराष्ट्र में 20 अगस्त तक एच1एन1 संक्रमण के सबसे ज्यादा 4,245 मामले सामने आए थे। गुजरात में 3,029, तमिलनाडु में 2,994 और कर्नाटक में 2,956 मामले देखे गए। दिल्ली में इस बीमारी के 1,719 मामले सामने आए हैं. यहां पांच लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है. आंकड़े के अनुसार केवल अगस्त महीने में 342 लोग मारे गए जबकि पिछले साल इसी अवधि में छह लोग मारे गए थे। देश में 2009-10 में एच1एन1 इंफ्लूएंजा का सबसे बुरा प्रकोप आया था जब बीमारी से 2,700 से ज्यादा लोग मारे गए थे और करीब 50000 प्रभावित हुए थे।
स्वाइन फ्लू- वायरल बुखार है जो वायरस से फैलता है। बारिश की वजह से स्वाइन फ्लू का वायरस और घातक हो जाता है। वातावरण में नमी बढ़ने के साथ ही ये ज्यादा तेजी से फैलने लगता है। यही वजह है कि मौसम के बदलने के साथ एकाएक इसके मामलों की बाढ़ सी आ गई लग रही है। यदि बारिश के मौसम में आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो तुरंत एच1एन1 की जांच कराएं। जब लोग स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित होते हैं, तो उनके लक्षण आमतौर पर मौसमी इन्फ्लूएंजा के समान ही होते हैं। इसमें बुखार, थकान, और भूख की कमी, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू उन्हीं व्यक्तियों में होता है, जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। साथ ही प्रभावित व्यक्ति पहले से बीमार चल रहे हो। अगर घर में कोई सदस्य स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया हो तो, घर के बाकी लोगों को भी इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लेकर दवा खा लेनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू के लक्षण साधारण फ्लू की तरह ही होते हैं। इसका असर 15 दिनों तक या उससे अधिक भी रह सकता है। स्वाइन फ्लू से निमोनिया का खतरा होता है, जिसका समय पर इलाज मुमकिन है। हालांकि ज्यादातर लोग दवा दुकान से सर्दी-जुकाम के लक्षण के अनुसार दवा खा लेते हैं ऐसे में जब स्वाइन फ्लू के वायरस पूरी तरह जकड़ने लगते हैं, तब लोग उसका इलाज कराने अस्पताल में पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से मस्तिष्क, नाक, गला, फेफड़ा, किडनी, लिवर आदि को नुकसान पहुंचाता है। जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक डिजीज जैसे- डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, हाइ या लो ब्लड प्रेशर या अस्थमा आदि हो उन पर इस वायरस का असर ज्यादा खतरनाक होता है. उनका इम्यून सिस्टम पहले से कमजोर होता है और इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण उनकी तबीयत और खराब होने लगती है।
स्वाइन फ्लू से बचाव ही इसे रोकना का सबसे बड़ा उपाय है। आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर उपाय है।

– बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
9414441218

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