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स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए आगे आ रही हैं सामाजिक संस्थाएं

कोटा। स्वाइन फ्लू की रोकथाम के नाकाम हो रहे प्रयासों के बाद अब आमजन और सामाजिक संस्थाएं आगे आ रही हैं। कोटा से सटे किशनपरु तकिया में स्वाइन फ्लू के दो मरीजों की मौत के बाद अब ग्रामीण लोगों को आयुर्वेदिक काढ़ा पिलाकर जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। स्वाइन फ्लू के इस घातक वायरस ने कोटा में करीब तीस से अधिक मरीजों की जान ले ली है जिसमें से करीब दो दर्जन मरीज कोटा के निवासी हैं। स्वाइन फ्लू का यह वायरस कितना घातक है इसका अन्दाजा से इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो सप्ताह में डेढ दर्जन से अधिक मरीजो की मौत हो गई है।
नाममात्र के इंतजामों के बीच रोकथाम के सारे प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि गर्भवती महिलाएं ,बच्चे और बुजुर्गो को स्वाइन फ्लू का खतरा ज्यादा रहता है, जबकि श्वास, अस्थमा व डायबिटीज के मरीजों को वैक्सिन लगाने चाहिए ताकि स्वाइन फ्लू के खतरे से बचा जा सके। भय और डर के चलते करीब डेढ़ हजार मरीजों ने स्वाइन फ्लू की जॉच करवाई थी जिनमें करीब तीन सौ मरीजो की जांच रिर्पोट पॉजिटीव पाई गई और एक-एक करके तीस से अधिक मरीजों की जान चली गई। मासूम ओर गर्भवती महिलाएं ही नहीं बल्कि करीब आधा दर्जन डॉक्टरों की रिपोर्ट भी स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आई।

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