National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे युवा और उजड़ रहे परिवार

देश में दिल दहलाने वाले सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े सरकार ने जारी किये है। इन आंकड़ों को देखकर लगता है हम अपने जीवन के प्रति कतई सावचेत और जागरूक नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में तेजी से वृद्धि हो रही है। सावधानी हटी और दुर्घटना घटी के देश में स्थान स्थान पर लगे बोर्डों और बैनर से हमने कोई सबक नहीं लिया है। हमें अपने साथ अपने परिवार की भी कोई चिंता नहीं है। ऐसा लगता है हम जान हथेली पर रखकर चलते है। जान जाती है तो जाये परवाह नहीं मगर हम सुधरने वाले नहीं है। विशेषकर युवा इतने अधिक लापरवाह हो गए हैं कि तेज रफ्तार से बाइक चलाने और जान जोखिम में डाल कर मोबाइल पर बात करना अपनी शान समझते है। तभी सड़क दुर्घटना में मारे जाने वाले लोगों में आधे से अधिक युवा है। सरकारी रिपोर्ट में वर्ष 2016 में दुर्घटना का प्रतिशत कम होने की बात कही गई है मगर मरने वालों की तादाद में बढ़ोतरी होने को स्वीकारा गया है। ये तो वे आंकड़ें है जो रिपोर्टेड है। जिन मामलों की कोई रिपोर्ट नहीं है यदि उनकी गिनती करें तो भयावह स्थिति का सामना करना पड़ेगा। एक गैर सरकारी रिपोर्ट में बताया गया कि अगर दुनिया के सभी देशों ने सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए तो वर्ष 2030 तक ट्रैफिक पूरी दुनिया में लोगों की मौत की 7वीं सबसे बड़ी वजह बन जाएगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में हर रोज 13 सौ से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं,जिनमें चार सौ से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इनमें आधे से ज्यादा लोग 18 से 35 वर्ष की आयु के होते हैं। पिछले साल औसतन एक घंटे में 55 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 17 लोगों की मौत हो गई। सड़क परिवहन मंत्रालय ने देश में 2016 में हुई सड़क दुर्घटनाओं के बारे में जारी रिपोर्ट में कहा है कि देश में हर दिन 1317 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 413 लोगों की मौत हो जाती है। वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2016 में सड़क दुर्घटनाओं में 4.1 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन इनमें मरने वालों लोगों की संख्या 3.2 प्रतिशत बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार 2016 में चार लाख 80 हजार 652 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें एक लाख 50 हजार 785 लोगों की मौत हुई और चार लाख 94 हजार 624 लोग घायल हुए। इन दुर्घटनाओं में मरने वाले 69 हजार 851 लोग 35 साल की उम्र के थे, जो सड़क दुर्घटनाओं में मरे लोगों का 46.3 प्रतिशत है। मृतकों में 18 से 60 साल की उम्र के लोगों की संख्या 83.3 प्रतिशत है। सड़क दुर्घटनाओं में उत्तर प्रदेश 12.8 प्रतिशत घटनाओं के साथ पहले स्थान पर, 11.4 प्रतिशत के साथ तमिलनाडु दूसरे और 8.6 प्रतिशत के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। तेज गति से वाहन चलाने तथा दोपहिया वाहन चालकों के हेलमेट नहीं पहनने जैसे कारणों से सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा लोग मारे जाते हैं। इनमें युवाओं की संख्या सर्वाधिक होती है। पिछले साल दुपहिया वाहनों की दुर्घटनाओं में 34.8 प्रतिशत लोग मारे गए। कई लोग हेलमेट ठीक तरह से नहीं पहनते हैं और वे सिर्फ पुलिस से बचने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करने की वजह से 1.2 प्रतिशत दुर्घटनाएं हुई हैं जबकि शराब पीकर वाहन चलाने की वजह से 3.7 प्रतिशत दुर्घटनाएं हुई। सीट बेल्ट नहीं बांधने के कारण मारे जाने वाले लोगों की संख्या 3.5 प्रतिशत है।
भारत में सबसे अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे हैं। विश्व की लगभग 40 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं भारत में ही होती है, जिसमे से अधिकांश लोगो की मौत तक हो जाती है। यही वजह है कि भारत को दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं की राजधानी कहा जाता है। भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं, जबकि लाखों की संख्या में लोग घायल हो जाते हैं और हजारों जीवन भर के लिए विकलांग भी हो जाते हैं। इन दुर्घटनओं में होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत 18 से 35 साल के आयु वर्ग के युवा हैं।
सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्वीकार किया है कि आमतौर पर हम सड़क दुर्घटनाओं का दोष पूरी तरह से ड्राइवरों के मत्थे मढ़ देते हैं लेकिन मैं इससे पूरी तरह से सहमत नहीं हूं। इसके कारणों में अतीत में सड़क इंजीनियरिंग की गलतियां एवं अन्य कारण भी हैं। कई बार यह देखा गया है कि आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं होने पर डीपीआर बनाते समय पुल, पारपथों को छोड़ दिया गया और यह दुर्घटनाओं के कारणों में एक है।
सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है, आम जनता में खासतौर से नये आयु वर्ग के लोगों में अधिक जागरुकता लाने के लिये इसे शिक्षा, सामाजिक जागरुकता आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ा गया है। सड़क दुर्घटना, चोट और मृत्यु आज बहुत आम हो चला है। सड़क पर ऐसी दुर्घटनाओं की मुख्य वजह लोगों द्वारा सड़क यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी है। दुर्घटना के पीछे के प्रमुख कारणों में बाइकर्स द्वारा हेल्मेट न पहनना, सिग्नल व लेन की अवहेलना करना, शराब पीकर गाड़ी चलाना व गाड़ियों की नियमित मरम्मत न कराना जैसे प्रमुख कारण शामिल हैं। जान लेवा सड़क हादसों को रोकने के लिए जरूरी है कि सड़कों की स्थिति अच्छी हो, जन कल्याणकारी सरकार का यह दायित्व है कि वह उच्च गुणवत्ता युक्त सड़कों का निर्माण करें और क्षत-विक्षत सड़कों को दुरस्त करें ताकि वाहन किसी दुर्घटना का शिकार नहीं होवे। नगर निकायों और एजेन्सियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिये। घटिया निर्माण पर तुरन्त कार्यवाही हो तथा यातायात और टैªफिक की वर्तमान स्थिति में जनभावनाओं के अनुरूप सुधार हो।दुर्घटनाओं से बचने के लिए देश के हर नागरिक को ट्रैफिक नियमों का पालन करना चाहिए और किसी भी कीमत पर सड़क पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी-32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar