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10 साल के बच्चे ने किया सुसाइड, लिखा- भावना मैम बहुत टार्चर करती हैं

‘पापा, आज मेरी पहली एक्जाम है और क्लास टीचर ने मुझे सुबह 9.15 बजे तक रूलाया। मुझे लगातार तीन पीरियड तक खड़ा रखा गया। मेडम में मेरी कोई बात नहीं सुनी, उनके चमचे ही बोलते रहे। मैं अपनी जिंदगी खत्म करने जा रहा हूं। आप प्लीज मेरी मेडम से कहना कि किसी बच्चे को ऐसी सख्त सजा न दे। गुडबाय, मम्मी, पापा, दीदी।’

यह पांचवीं कक्षा के बच्चे का लिखा सुसाइड नोट है। मामला गोरखपुर का है। 12 वर्षीय मासूम का नाम नवनीत प्रकाश था। वह सेंट एंटोनी कॉन्वेंट स्कूल का छात्र था।  जानकारी के मुताबिक, पढ़ने में होशियार नवनीत 15 सितंबर से दुखी था। आरोप है कि उस दिन स्कूल में उसे परेशान किया गया था और परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था। उस दिन उसकी परीक्षा का पहला दिन था। हालांकि स्कूल प्रबंधन और खुदकुशी के लिए उसको उत्प्रेरित करने के आरोप में गिरफ्तार क्लास टीचर ने इससे इन्कार किया है। उनका कहना है कि पहले दिन कंप्यूटर की परीक्षा थी और नवनीत न केवल परीक्षा में शामिल हुआ था बल्कि उस पेपर में उसे 59 नंबर भी मिले हैं। स्कूल प्रबंधन यह बात जरूर स्वीकार कर रहा है कि कुछ बच्चों के विलंब से आने की वजह से असेंबली के समय अलग खड़ाकर दिया गया था लेकिन परीक्षा देने से किसी को नहीं रोका गया।

(नवनीत के पिता रवि प्रकाश और मां सुनीता)

डायरी में लिखी थी यह कविता
‘कभी-कभी एक सपना देखा, खुली-खुली इन आंखों से’ यह पंक्ति नवनीत की डायरी में लिखी उसकी कविता की है। उमंग, उत्साह और देश प्रेम की कविताएं लिखना उसे अच्छा लगता था। कविताओं में ही वह जिंदगी के सपने बुनता था और उसे अभिव्यक्ति देता था।
नवनीत को पेंटिंग बनाना भी अच्छा लगाता था। पेंटिंग के जरिए कैनवास पर वह अपने सपनों की हसीन दुनिया में अक्सर रंग भरता रहता था।
नवनीत की उम्र भले ही महज 12 वर्ष थी लेकिन दुनिया को देखने का उसका अपना नजरिया था। उसकी सपनों की दुनिया बेहद हसीन और खुशनुमा थी। उसी खुशनुमा दुनिया की तस्वीर वह अपनी कविताओं में और मौका मिलने पर पेंटिंग के जरिये कैनवास पर उकेरता था।
निजी तौर पर बेहद संवेदनशील नवनीत न जाने कैसे इस स्थिति में पहुंच गया कि उसे मौत आसान और जिंदगी कठिन लगने लगी। जिसके चलते जहर खाकर उसने जान दे दिया।

जीत चुका था कई भाषण प्रतियोगिताएं
नवनीत के दादा हरिराम प्रसाद पोते की मौत के सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। उसके बारे में याद कर वह बार-बार रो पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि नवनीत काफी मुखर था। भाषण देने का भी उसे काफी शौक था। स्कूल और अन्य संस्थानों द्वारा कराई जाने वाली भाषण प्रतियोगिताओं में भाग लेता था। कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत भी हुआ था। बातचीत में बड़ा होकर प्रधानमंत्री बनने की बात करता था और कहता था प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले वह देश से गरीबी खत्म करेगा।

कुछ दिनों से दीदी से कर रहा था मौत की बातें
नवनीत, 12वीं में पढ़ने वाली बड़ी बहन सोनम के बेहद करीब था। अक्सर उससे तरह-तरह की बातें करता रहता था। भाई की मौत के बाद सोनम ने बताया कि इधर कुछ दिनों से वह मौत के बारे में अधिक बातें करता था। मसलन मरने के बाद लोग कहां जाते हैं? यदि कोई मरना चाहे तो किस तरीके से आसान मौत हो सकती है? एक बार तो उसने यह भी पूछा था कि जहर खाकर मरने से बहुत तकलीफ तो नहीं होती? सोनम की माने तो मौत की बातें करने पर हर बार उसे वह समझाती थी और फालतू बातें न करने के लिए कहती थी लेकिन उसे इस बात का जरा भी अहसास नहीं हो पाया कि भाई के दिमाग में आखिर चल क्या रहा है?

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