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14 नंवबर पर विशेष लेख : बालश्रम की भट्ठी में झुलसता देश का भविष्य ?

बेशक देश आजाद हो चुका है मगर देश का आधार माने जाने वाले बच्चे आज भी बाल मजदूरी की जजीरों से आजाद नहीं हो पाए हैं, बालश्रम की भट्ठी में बचपन झुलस रहा है मगर जनता के मसीहा बेखबर हैं प्रत्येक वर्ष 14 नंवम्बर को बाल दिवस मनाया जा रहा है।मगर ऐसे आयोजन औपचारिकता भर रह गये है। जिन बच्चों के हाथों में किताब, कापी, पैसिल होनी चाहिए वे हाथ जोखिम उठा रहे हैं मजदूरी कर रहे हैं गैंती-बेलचा चला रहे हैं नन्हे हाथों में छाले आ जाते हैं जब यह मजदूरी करते हैं । समझ नहीं आता कि जिनकेे अभी खेलने कूदने के दिन हैं वे ऐसे काम करते हैं कि रुह कांप उठती हैं। देश में हर रोज बाल मजदूरों के समाचार सुर्खियां बनते है मगर सरकारों की तरफ से कोई कदम नहीं उठाए जातें। आखिर कब तक बालश्रम कानून की धज्ज्यिां उडती रहेगीं। बाल मजदूरी एक कड़वी सच्चाई है इससे सरकारों को अनदेखा नहीं करना चाहिए अपितू सख्त कानून बनाकर इसका खात्मा करना चाहिए। जिनके अभी खेलने कूदने के दिन हैं वे ऐसे काम करते हैं कि रुह कांप उठती हैं। बाल मजदूरी आज एक बहस का विषय बनता जा रहा है,बालश्रम की समस्या हमारे देश में नई नहीें है और बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी है चाय की दुकानों ,ढाबों ,होटलों, उद्योगों और घरों में भी 18.18 घंटे काम लिए जाने की घटनाएं तो आम हैं ही ,इन्हे इसके बदले दिया जाने वाला मेहनतनामा भी कम होता है ,देश का भविष्य कहलाले वाले इन नौनिहालों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है ,यह किसी भी सभ्य समाज और कानून में मान्य नहीं होना चाहिए।देश में बाल मजदूरेां की संख्या निरंतर बढती जा रही है कानूनों का मजाक उडाया जा रहा है सरकारें भी कानून बनाकर इतिश्री कर लेती है यदि शिकजा कसा जाए तो इस पर कुछ हद तक रोक लग सकती है।,श्रम विभाग व्दारा भी कभी कभार छापामारी की जाती है मगर फिर वही सिलसिला चलता रहता है।सरकारें मूकदर्शक बनी हुई हैं,यदि सरकारों को जरा भी सदमा होता तो इस प्रथा पर जरूर रोक लगाती। यह समस्या विश्वव्यापी है। आज पटाखा फैक्टरियों,चूडियों के उद्योगों में ,गलीचा बनाने वाले उद्योगों में बाल मजदूरों की संख्या ज्यादा है।देश में समय-समय पर बाल मजदूरों को सामाजिक संस्थाओं द्वारा छुडाया जाता है ।

भारतीय संविधान की अनुच्छेद 24 के अन्र्तगत बालश्रम अबैध घोषित है। मगर कानून फाईलों की शोभा बढा रहे हैं।उतरप्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडू ,गुजरात, आन्ध्रप्रदेश, में उद्योगों में अधिकतर काम बालश्रमिकों के कधों पर हैं।बालश्रम का यह अवैध धंधा बडे पैमाने पर पनपता जा रहा है समय रहते इस पर रोक न लगाई तो भविष्य में हालात बेकाबू हो सकते है।खैनी, जरदा, तम्बाकू, गुटका,बीडी, व अन्य नश्ीाले पदार्थों के उद्योगों में बालश्रमिक ही इन को बनाते हैं।माचिस ,आतिशबाजी, के उद्योगों में इनका शोषण किया जाता है। इनके मालिक इनको भर पेट खाना तक नहीं खिलाते है जिस कारण कई बाल मजदूर बीमार हो जाते है और असमय काल का ग्रास बन जाते हैं इनके मालिको द्वारा इनके स्वास्थ्य की जांच तो दूर की बात है।बाल मजदूरी गरीबी की वजह से पैदा होती हैं। परिवार पालने के लिए दिन रात काम करते हैं इन बाल मजदूरों को आराम तक का समय भी नहीं मिलता है । बालश्रम के उन्मूलन के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए। यह देश के लिए बहुत ही शर्मनाक है। आज बाल मजदूरों की संख्या में अप्रत्याशित रुप से वृद्वि होती जा रही हैं मगर सरकारें इस पर रोक लगाने में अक्षम नजर आ रही है प्रतिदिन हजारों बाल मजदूरों को सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों से मुक्त करवाया जाता है मगर ऐसे भी मामले हैं जो प्रकाश में नहीं आ रहे हैं और बालमजदूर नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं । बाल श्रमिकों का आंकड़ा कम होने के बजाए बढ़ता जा रहा है।समाचार पत्रों में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार जनगणना 2011 के अनुसार 5 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 11.18प्रतिशत यानि 1,26,26,505, बच्चों को जबरदस्ती बाल मजदूरी की तरफ झोंका जाता है।आंकड़ों में सामने आया है कि प्रत्येक 10 बच्चों में से एक बच्चा बाल श्रमिक हैैैैैैैै। जनगणना 2001 के अनुसार 5 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के 8.14 प्रतिशत बच्चे हिमाचल में बाल श्रमिक हैं । जनगणना 2011 के मुताबिक 6.26 प्रतिशत 5 से 14 वर्ष के बाल श्रमिक सिक्किम में सबसे ज्यादा हैं । जबकि सबसे कम 2 प्रतिशत लक्ष्यदीप में हैं । इस आयु के 3.60 प्रतिशत बच्चे जबरन मजदूरी में झोकें जाते हैं।5से 17 वर्ष की आयु के बाल श्रमिकों की यह प्रतिश्तता 7.01 है। इनमें 57.39 प्रतिशत बाल श्रमिक बालक हैं और 42.61 प्रतिशत बालिकाएं हैं।इस आयु के बाल श्रमिकों में से 82.39 प्रतिशत बच्चे कभी स्कूल तक नहीं गये हैं।बाल मजदूरों की सुरक्षा के लिए काफी कानून बने हैं पर वे नाकाफी साबित हो रहे हैं। यदि इन्हे कारगर ढंग से लागू किया जाए तो इस पर कुछ हद तक रोक लग सकती है। आज यह समस्या विश्व व्यापी बनती जा रही हैं।बाल मजदूरी को रोकने के लिए समाज के लोगों को आगे आना होगा ताकि इस पर नकेल लग सके और देश का भविष्य बर्बाद होने से बच सके। समाज को एक व्रत लेना होगा तभी इस पर लगाम लग सकती है अन्यथा बाल मजदूर बालश्रम की भठठी में झुलसते रहेंगें।

नरेन्द्र भारती, स्तंभकार, पत्रकार – 09459047744

 

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