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18 घंटे की सर्जरी के बाद सिर से जुड़े जुड़वा बच्चे हुए अलग

नई दिल्ली। एम्स के 30 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने गुरुवार को 18 घंटे की मैराथन सर्जरी के बाद सिर से जुड़े जुड़वा बच्चों को अलग किया। बच्चों की हालत अभी नाजुक है। उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। ओडिशा के कंधमाल जिले के सिर से जुड़े 28 महीने के जुड़वा बच्चे जग्गा और बलिया को 13 जुलाई को एम्स में भर्ती कराया गया था।
बच्चों के सिरों को अलग करने के लिए एम्स के डॉक्टरों की टीम ने 28 अगस्त को पहले चरण की सर्जरी की थी। डॉक्टरों ने बच्चों के मस्तिष्क से दिल को रक्त वापस पहुंचाने वाली जुड़ी हुई रक्तनलिकाओं को अलग करने के लिए वेनस बाईपास बनाया था।
बुधवार को दूसरे चरण की सर्जरी में एम्स के न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-एनेस्थीसिया और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के करीब 30 विशेषज्ञों ने की। इस पूरी सर्जरी में एम्स के 80 चिकित्सा कर्मी शामिल रहे। अभी खत्म नहीं हुई हैं मुश्किलें सर्जरी में शामिल डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। आने वाले 20 दिन उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. एसएस काले ने बताया कि जितना वक्त ऑपरेशन में लगा है, करीब उतना ही वक्त बच्चों को ठीक होने में लगेगा। अभी दोनों बच्चे बेहोशी की हालत में आइसीयू में हैं। उधर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायाक ने दोनों बच्चों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

चुनौती से भरी थी सर्जरी-
एम्स न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एके महापात्रा ने बताया कि जग्गा को हार्ट और बलिया को किडनी संबंधी परेशानी है। इस वजह से पूरी सर्जरी बहुत ही चुनौतीपूर्ण थी। दोनों के खून की एक ही नस होने के कारण भी काफी परेशानी हुई। एक नस होने के वजह से जो भी दवाई उन्हें दी जा रही थी, वह बलिया के शरीर में न पहुंचकर जग्गा को पहुंच रही थी। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें एक नई नस लगाने फैसला लिया।

ऐसे हुई मैराथन सर्जरी-
जग्गा और बलिया का अलग करने के लिए बुधवार सुबह नौ बजे सर्जरी शुरू हुई। इसके 11 घंटे बाद यानी रात 8 बजकर 45 मिनट पर डॉक्टरों को दोनों को सिर से अलग करने में सफलता मिली। अगले पांच घंटे दोनों की प्लास्टिक सर्जरी हुई, जिसमें उनकी पीठ और जांघों से त्वचा लेकर उनकी सर्जरी की गई। रात करीब 12 बजे एक बच्चे को आइसीयू में शिफ्ट किया गया, जबकि हालत नाजुक होने के चलते दूसरे बच्चे को भी तड़के करीब तीन बजे आइसीयू वार्ड में लाया गया।

यह था मामला-
जग्गा और बलिया जन्म से ही जुड़े हुए थे। उनके दिमाग का 30 फीसद हिस्सा जुड़ा हुआ था। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि यह एक दुर्लभ बीमारी होती है, जो 30 लाख में से एक बच्चे में होती है। इनमें से भी 50 फीसद बच्चों की या तो जन्म के समय या जन्म के 24 घंटे के अंदर मृत्यु हो जाती है।

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