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ब्रेकिंग न्यूज़

Date: January 12, 2021

Total 55 Posts

UNSC में जयशंकर का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, कहा- 1993 मुंबई धमाके में शामिल लोगों को दी गई फाइव स्टार सुविधाएं

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद को लेकर बिना नाम लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने मुंबई धमाकों से लेकर

व्हाट्सएप और प्राइवेसी का उल्लंघन

नई नीति के तहत, व्हाट्सएप पर चैट को प्रबंधित करने के साथ-साथ व्यवसायों को स्टोर करने के लिए फेसबुक द्वारा होस्ट की गई सेवाओं का उपयोग करने का तरीका बदल

पक्षियों के जादूई संसार पर बर्ड फ्लू का कहर

देश के अनेक राज्यों में एक बड़ा संकट बर्ड फ्लू के रूप में कहर बरपा रहा है। जिसके कारण सैकड़ों पक्षियों का मरना या मारा जाना दुखद तो है ही,

स्वामी विवेकानंद औऱ वामपंथी बौद्धिक जगत की खोखली दलीलें 

स्वामी विवेकानंद को लेकर वामपंथी बुद्धिजीवी एक नकली विमर्श खड़ा करने की कोशिशों में जुटे हुए है।हिन्दुत्व को लेकर अपनी ओछी मानसिकता औऱ सतही समझ उनके बुनियादी चिंतन के मूल

क्यों भारत में धनी होना हो गया है अपराध

कौन चलाता है सफल उद्यमियों के खिलाफ कैंपेन मुंबई में आप पिरोजशा गोदरेज मार्ग देख सकते हैं। वे कोई राजनेता, लेखक, स्वाधीनता सेनानी या कवि नहीं थे। हमारे यहां पर आमतौर इन्हीं

चौक-चौराहों से,गाॅव-चौपालों की ओर बढ़ती भाजपा

अजय कुमार/ विजय न्यूज़ नेटवर्क. लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। 1980 में गठन के बाद 1984 लोकसभा चुनाव में दो सीटें जीतने वाली बीजेपी

कॉर्नियल अपारदर्शिता 50 से अधिक उम्र के लोगों में दृष्टिहीनता का दूसरा सबसे बड़ा कारण: डॉ.महिपाल सिंह सचदेव

नई दिल्ली: कोविड के दौरान आँखों की समस्याओं और अंधेपन के मामलों में बड़ी वृद्धि हुई है। ऐसे में ऑल इंडिया ऑप्थेल्मोलॉजी सोसाइटी (एआईओएस) और आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया

दीन-दुखियों एवं आदिवासियों की महान लेखिका-महाश्वेता देवी जयंती  पर विशेष

पानी की तरह श्वेत जो हर रंगो में समाहित हो जाता है उसी के अनुरुप ता-उम्र दीन दुखियों के लिए तत्पर खासकर आदिवासी एंव पिछड़ों के लिए देवी के रुप

राष्ट्रीय युवा दिवस: युवाओं के जीवन को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है एम3एम फाउंडेशन

गुरुग्राम: युवा राष्ट्र के लिए एक बड़ी संपत्ति है। भारत के दृष्टिकोण से देखें तो युवाओं की इस शक्ति से भारत समृद्ध है। यदि कुशलता से चैनलाइज़ किया जाए, तो युवा अपनी

आपातकाल में मकरसंक्रांति कैसे मनाएं ?

‘कोरोना की पृष्ठभूमि पर गत कुछ महीनों से त्योहार-उत्सव मनाने अथवा व्रतों का पालन करने हेतु कुछ प्रतिबंध थे । यद्यपि कोरोना की परिस्थिति अभी तक पूर्णतः समाप्त नहीं हुई है, तथापि वह धीरे-धीरे पूर्ववत हो रही है । ऐसे समय त्योहार मनाते समय आगामी सूत्र ध्यान में रखें । त्योहारमनाने के सर्व आचार, (उदा. हलदी-कुमकुम समारोह, तिलगुड देना आदि) अपने स्थान की स्थानीय परिस्थिति देखकर शासन-प्रशासन द्वारा कोरोना से संबंधित नियमों का पालन कर मनाएं । हलदी-कुमकुमका कार्यक्रम आयोजित करते समय एक ही समय पर सर्व महिलाआें को आमंत्रित न करें, अपितु ४-४ के गुट में 15-20 मिनट के अंतर से आमंत्रित करें । तिलगुडका लेन-देन सीधे न करते हुए छोटे लिफाफे में डालकर उसका लेन-देन करें । 4. आपस में मिलते अथवा बोलते समय मास्क का उपयोग करें । किसीभी त्योहार को मनाने का उद्देश्य स्वयं में सत्त्वगुण की वृद्धि करना होता है । इसलिए आपातकालीन परिस्थिति के कारण प्रथा के अनुसार त्योहार-उत्सव मनाने में मर्यादाएं हैं, तथापि इस काल में अधिकाधिक समय ईश्‍वर का स्मरण, नामजप, उपासना आदि करने तथा सत्त्वगुण बढाने का प्रयास करने पर ही वास्तविक रूप से त्योहार मनाना होगा । मकरसंक्रांति से संबंधित आध्यात्मिक विवेचन त्योहार, उत्सव और व्रतों को अध्यात्मशास्त्रीय आधार होता है । इसलिए उन्हें मनाते समय उनमें से चैतन्य की निर्मिति होती है तथा उसके द्वारा साधारण मनुष्य को भी ईश्‍वर की ओर जाने में सहायता मिलती है । ऐसे महत्त्वपूर्ण त्योहार मनाने के पीछे का अध्यात्मशास्त्र जानकर उन्हें मनाने से उसकी फलोत्पत्ति अधिक होती है । इसलिए यहां संक्रांत और उसे मनाने के विविध कृत्य और उनका अध्यात्मशास्त्र यहां दे रहे हैं । उत्तरायणऔर दक्षिणायन : इस दिन सूर्य का मकर राशि में संक्रमण होता है । सूर्यभ्रमण के कारण होनेवाले अंतर की पूर्ति करने हेतु प्रत्येक अस्सी वर्ष में संक्रांति का दिन एक दिन आगे बढ जाता है । इस दिन सूर्य का उत्तरायण आरंभ होता है । कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक के काल को ‘दक्षिणायन’ कहते हैं । जिस व्यक्ति की उत्तरायण में मृत्यु होती है, उसकी अपेक्षा दक्षिणायन में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति के लिए, दक्षिण (यम) लोक में जाने की संभावना अधिक होती है । संक्रांतिका महत्त्व : इस काल में रज-सत्त्वात्मक तरंगों की मात्रा अधिक होने के कारण यह साधना करनेवालों के लिए पोषक होता है । तिलका उपयोग : संक्रांति पर तिल का अनेक ढंग से उपयोग करते हैं, उदाहरणार्थ तिलयुक्त जल से स्नान कर तिल के लड्डू खाना एवं दूसरों को देना, ब्राह्मणों को तिलदान, शिवमंदिर में तिल के तेल से दीप जलाना, पितृश्राद्ध करना (इसमें तिलांजलि देते हैं) श्राद्ध में तिलका उपयोग करने से असुर इत्यादि श्राद्ध में विघ्न नहीं डालते । आयुर्वेदानुसार सर्दी के दिनों में आनेवाली संक्रांति पर तिल खाना लाभदायक होता है । अध्यात्मानुसार तिल में किसी भी अन्य तेल की अपेक्षा सत्त्वतरंगे ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है तथा सूर्य के इस संक्रमण काल में साधना अच्छी होने के लिए तिल पोषक सिद्ध होते हैं । 3 अ. तिलगुड का महत्त्व : तिल में सत्त्वतरंगें ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है । इसलिए तिलगुड का सेवन करने से अंतःशुद्धि होती है और साधना अच्छी होने हेतु सहायक होते हैं । तिलगुड के दानों में घर्षण होने से सात्त्विकता का आदान-प्रदान होता है । हलदी–कुमकुमके पंचोपचार 4 अ. हलदी–कुमकुम लगाना : हलदी-कुमकुम लगाने से सुहागिन स्त्रियों में स्थित श्री दुर्गादेवी का सुप्त तत्त्व जागृत होकर वह हलदी-कुमकुम लगानेवाली सुहागिन का कल्याण करती है । 4 आ. इत्र लगाना : इत्र से प्रक्षेपित होनेवाले गंध कणों के कारण देवता का तत्त्व प्रसन्न होकर उस सुहागिन स्त्री के लिए न्यून अवधि में कार्य करता है । (उस सुहागिन का कल्याण करता है ।) 4 इ. गुलाबजल छिडकना : गुलाबजल से प्रक्षेपित होनेवाली सुगंधित तरंगों के कारण देवता की तरंगे कार्यरत होकर वातावरण की शुद्धि होती है और उपचार करनेवाली सुहागिन स्त्री को कार्यरत देवता के सगुण तत्त्व का अधिक लाभ मिलता है । 4 ई. गोद भरना : गोद भरना अर्थात ब्रह्मांड में कार्यरत श्री दुर्गादेवी की इच्छाशक्ति को आवाहन करना । गोद भरने की प्रक्रिया से ब्रह्मांड में स्थित श्री दुर्गादेवीची इच्छाशक्ति कार्यरत होने से गोद भरनेवाले जीव की अपेक्षित इच्छा पूर्ण होती है । 4 उ. उपायन देना : उपायन देते समय सदैव आंचल के छोर से उपायन को आधार दिया जाता है । तत्पश्‍चात वह दिया जाता है । ‘उपायन देना’ अर्थात तन, मन एवं धन से दूसरे जीव में विद्यमान देवत्व की शरण में जाना । आंचल के छोर का आधार देने का अर्थ है, शरीर पर धारण किए हुए वस्त्र की आसक्ति का त्याग कर देहबुद्धि का त्याग करना सिखाना । संक्रांति-काल साधना के लिए पोषक होता है । अतएव इस काल में दिए जानेवाले उपायन सेे देवता की कृपा होती है और जीव को इच्छित फलप्राप्ति होती है । 4 उ 1. उपायन में क्या दें ? : आजकल साबुन, प्लास्टिक की वस्तुएं जैसी अधार्मिक सामग्री उपायन देने की अनुचित प्रथा है ।

महामारी के खिलाफ, महाअभियान का शंखनाद

महामारी कोरोना वायरस पर जीत की तैयारियों में लगे भारत के लिए के लिए खुशखबरी है। 16 जनवरी से प्रस्तावित वैक्सीनेशन के लिए कोविशील्ड वैक्सीन की पहली खेप पुणे स्थित

स्वामी विवेकानंद की 158वीं जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में मनाई, बच्चों का सर्वांगीण विकास करने वाली शिक्षा नीति चाहते थे स्वामी विवेकानंद: दयानंद वत्स

नई दिल्ली। नेशनल एजुकेशनल मीडिया नेटवर्क और अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के संयुक्त तत्वावधान में आज उत्तर पश्चिम दिल्ली के रोहिणी स्थित संघ के मुख्यालय बरवाला में

मिनिमली इनवेसिव पार्शियल नी रिप्लेसमेंट गठिया के दर्द में वरदान

उमेश कुमार सिंह/ विजय न्यूज़ नेटवर्क। खराब और गतिहीन जीवनशैली के साथ आज का युवा विभिन्न प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ रहा है। आमतौर पर 3 में से

किसी भी राष्ट्र का युवा खत्म तो राष्ट्र खत्म !

आज हमारे भारत की युवा ऊर्जा अंगड़ाई ले रही है और भारत विश्व में सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाला देश आज बन गया है, इसी युवा शक्ति में भारत की ऊर्जा

भारतीयता के प्रेरणापुंज स्वामी विवेकानंद

भारतीय समाज और राष्ट्र के जीवन में नवीन प्राणों का संचार करने वाले स्वामी विवेकानंद का जीवन जितना रोमांचकारी रहा है उतना ही प्रेरणादायक भी। उन्होंने अपने विचारों से अतीत

 युवा दिवस विशेष: विवेकानंद बनने के सूत्र

सफलता प्राप्त करने के लिए स्वामी विवेकानंद के जीवन पहलुओं को जाने  युवा दिवस विशेष: क्रांतिकारी युवा स्वामी विवेकानंद बनने के सूत्र इस बार हम आपके लिए भारत के क्रांतिकारी

IND vs AUS: चोट के चक्रव्यूह में फंसी Team India, आधी टीम हुई चोटिल, कौन है जिम्मेदार?

सिडनी। ब्रिसबेन टेस्ट से पहले टीम इंडिया (Team India) मुश्किल में नजर आ रही है. टीम के आधे से ज्यादा खिलाड़ी चोटिल हो गए हैं. ऐसा शायद ही कभी देखा

Research: Processed Food का गलती से भी न करें सेवन, हो सकती है मौत

नई दिल्ली। आज-कल हर किसी का शेड्यूल काफी बिजी हो गया है. इसकी वजह से शरीर को स्वस्थ (Healthy) रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है. शरीर को स्वस्थ (Healthy)

आपको सर्दी में कम नमक का इस्तेमाल क्यों करना चाहिए?

सर्दी का मौसम पसंदीदा पकवान से आनंदित होने का बिना किसी विचार के सही समय है. अक्सर हम सर्दी के दौरान थोड़ा ज्यादा खा लेते हैं. लेकिन ये उस वक्त

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