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कुछ कवि एवं साहित्यकारों के सुन्दर रचनाएं ‘मुक्तक दोहे और शेर’

कुछ कवि एवं साहित्यकारों के सुन्दर रचनाएं  ‘मुक्तक दोहे और शेर’

1—
हिन्दी के अपमान को, नहीं सहेंगे और ।
हट जाए अब शीघ्र ही, अंग्रेज़ी का दौर ।।
मुरारि पचलंगिया
2—-
सूर-तुलसी के संग पली हिंदी|
कच्ची-पक्की डगर चली हिंदी||
सोरठा , छंद , पद , सवैया थी,
गीत-ग़ज़लों में भी ढली हिंदी|
विनोद निर्भय
3—-
हमे अपनी मातृभाषा पे अभिमान है
विश्व में अलग इसकी पहचान ,शान है
मन-मंदिर में हिंदी का दीप जलाओगे
यही हिंदी का सम्मान ,मान अभिमान है
कामिनी गोलवलकर
4—-
भाषाओं में में भाषा एक है हमारी हिन्दी
जैसे शोभे भाल हमारे बिंदी सी प्यारी हिन्दी
शाखायें हैं कितनी सारी सारे की डाली एक
लब खुली जब पहली पहल निकली मुँह से हिन्दी
ममता पाण्डेय
5—–
सावन के जैसी,बरसती रहेगी।
फूलों के जैसी, महकती रहेगी।
है शान हिन्दी, मेरे वतन की ये,
निखरती रही है ,सँवरती रहेगी।
बलराम निगम
6—
बहती हुई नदी सी लगती है प्यारी हिंदी
गीत, छंद ,दोहों में सजती है प्यारी हिंदी
हर देश में वो हो गयी आरती अजान सी
विश्व में कोहनूर सी लगती है प्यारी हिंदी।।
प्रमिला पान्डेय
7–
चलो आज हिंदी चलन हम मनाएं
दिलों में बसी जो जलन हम मिटायें
कलम हाथ में ले लिख दो यहाँ कुछ
सभी के गले लग मिलन हम मनाएं

संजय कुमार गिरि
प्रस्तुति “शायर एक शायरी अनेक “संकलनकर्ता :-संजय कुमार गिरि

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