National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

7 हिन्दू कार्यकर्ताआें की हत्या करनेवाले ‘पॉप्युलर फ्रंट’की आबिद पाशा गैंग पर कर्नाटक सरकार मेहरबान ?

कर्नाटक l भारत की न्यायदेवी की आंखों पर बंधी पट्टी निष्पक्षता दर्शाती है; परंतु प्रत्यक्ष में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार तथा जनता दल सेक्यूलर की गठबंधन सरकार हिन्दुत्ववादियों की हत्या के प्रकरणों की अनदेखी कर, हिन्दुत्ववादी संगठनों को समाप्त करने हेतु कानून तथा पुलिस का उपयोग कर रही है । एक ओर कर्नाटक के 23 हिन्दुत्ववादियों के हत्याकांड के सूत्रधार को खोजने का प्रयास नहीं किया जा रहा । भटकल के भाजपा विधायक डॉ. चित्तरंजन तथा भाजपा के स्थानीय नेता तिमप्पा नाईक के हत्यारों को आज 14 वर्ष उपरांत भी कर्नाटक पुलिस खोज नहीं पाई । इसके विपरीत दूसरी ओर वामपंथी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या प्रकरण में तत्काल ‘एसआईटी’ गठित कर 16 हिन्दू कार्यकर्ताआें को बंदी बनाया गया । इन हिन्दू आरोपियों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि न होते हुए भी उनपर कठोर ‘कोक्का’ की धाराएं लगाईं गईं; परंतु पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के मैसूर स्थित ‘आबिद पाशा और गैंग’ ने रा.स्व.संघ-बजरंग दल-भाजपा आदि हिन्दू संगठनों के 7 हिन्दुत्ववादी कार्यकर्ताआें की क्रूर हत्या की, यह जांच में उजागर हुआ; तब भी उनपर अभी तक ‘कोक्का’ क्यों नहीं लगाया गया ? उन्हें प्रत्येक बार न्यायालय में जमानत मिले, इसके लिए जांच में त्रुटियां रखनेवाले अधिकारियों पर आज तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? इस प्रकरण के आरोपियों की ओर से जमानत की शर्तों का उल्लंघन होते हुए भी, उनके संदर्भ में न्यायालय में शिकायत करने पर भी पुलिस उनकी जमानत रद्द नहीं करती, इसके विपरीत उनमें से ३ आरोपी नगरपालिका के चुनाव में एस.डी.पी.आई. के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडते हैं और आबिद पाशा ‘स्टार प्रचारक’ के रूप में चुनाव में घूम रहा था । ये सब देखते हुए यह संदेह उत्पन्न होता है कि ये जांच की त्रुटियां हैं कि कर्नाटक सरकार ही आबिद पाशा गैंग पर मेहरबान है । कर्नाटक सरकार के इस पक्षपात के कारण हिन्दुत्ववादियों की हत्या करनेवाले धर्मांध अपराधी आज मैसूरु शहर में खुलेआम घूम रहे हैं, इस प्रकरण में परिजनों को तथा साक्षिदारों को धमकाने का प्रयास किया जाता है । इस कारण इस आक्रमण से पीडित निर्दोष हिन्दुत्ववादियों के परिजन प्राण हथेली पर रखकर आतंक की छाया में जी रहे हैं । इन हिन्दू परिवारों को कर्नाटक सरकार से न्याय मिलेगा क्या, ऐसा प्रश्‍न हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने इस समय किया । वे मैसूरु के प्रेस क्लब की पत्रकार परिषद में बोल रहे थे । इस समय पत्रकार परिषद में हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अधिवक्ता अमृतेश एन.पी., हिन्दू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य समन्वयक श्री. गुरुप्रसाद गौडा तथा आबिद पाशा के आक्रमण से बाल बाल बचे श्री. वी. गिरीधर, आनंदा पै तथा मृत त्यागराज पिल्लई के भाई वरदराज पिल्लई उपस्थित थे ।

रमेश शिंदे ने आगे कहा कि कर्नाटक की कांग्रेस-जेडी (एस.) सरकार हिन्दुआें पर पक्षपाती कार्रवाई कर रही है । मैसुरु जिले में ही आबिद पाशा गैंग ने अनेक हत्याएं धार्मिक विद्वेष से की हैं । इसे कोई वैचारिक मतभेद नहीं कह सकता । त्यागराज पिल्लई केवल ‘मुसलमान लडकी से निकटता बढाने के संदेह’ में उसे मार डाला गया । भाजपा के नेता श्री.आनंदा पै पर आक्रमण हुआ, उससे वे अपने प्राण बचाने में सफल रहे; परंतु उनके साथ दोपहिया वाहन पर बैठे उनके सहयोगी श्री. रमेश की हत्या की गई । भाजपा के युवा मोर्चा के नेता वी. गिरीधर पर आक्रमण हुआ, वे 41 दिवस चिकित्सालय में रहकर मृत्यु के मुख से लौटे । बजरंग दल की आर्थिक सहायता करने के कारण श्री. हरिश एवं श्री. सतीश इन बंधुआें पर किए प्राणघातक आक्रमण में श्री. सतीश की मृत्यु हो गई । इन प्रकरणों में आबिद पाशा और टोली का हाथ था, तब भी पुलिस ने पर्याप्त जांच किए बिना ही केस बंद कर दिया । इसी आबिद पाशा ने दक्षिण कन्नड जिले के अधिवक्ता शांति प्रसाद हेगडे तथा जगदिश शेणावा की हत्या करने का भी असफल प्रयास किया था । आबिद पाशा ने विघ्नेश और सुधींद्र इन विद्यार्थियों की क्रूर हत्या की, जिसके उपरांत इसी प्रकरण के साक्षी बजरंग दल के के. राजू की मार्च 2016 में हत्या की गई । इस हत्या के प्रकरण में आबिद पाशा और टोली को बंदी बनाने पर यह सामने आया कि पहले की 7 हत्याआें में भी उसका ही हाथ था । इस टोली ने नैतिकता के ठेकेदार बनकर 2014 में परवीन ताज उर्फ मुन्नी नामक मुस्लिम महिला को मुस्लिम विरोधी घोषित कर, उसकी भी हत्या की थी ।

हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अधिवक्ता अमृतेश एन.पी. ने जांच की त्रुटियों के विषय में कहा कि आबिद पाशा और गैंग ये सभी हत्याएं ठंडे दिमाग से योजनाबद्ध ढंग से कर रहा था और मैसुरु पुलिस तथा कर्नाटक सरकार जांच में जानबूझकर त्रुटियां रखकर उसकी सहायता कर रही थी । इस कारण आबिद पाशा और उसकी टोली के आरोपी या तो मुक्त हो गए अथवा उन्हें तत्काल जमानत मिल गई । कुछ प्रकरणों में इन आरोपियों पर ‘युएपीए’ जैसे कठोर कानून के अंतर्गत अपराध प्रविष्ट किए गए थे । तब भी पुलिस ने उनकी जमानत का विरोध नहीं किया और आश्‍चर्यजनक रूप से आरोपपत्र प्रविष्ट करते समय ‘युएपीए’ कानून की धाराएं हटा दी गईं । ‘युएपीए’ कानून के अनुसार 30 दिन की पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी) मिल सकती है, तब भी मुजम्मिल नामक आरोपी को केवल 7 दिन की पुलिस अभिरक्षा मांगकर छोड दिया गया । मा. न्यायालय ने पुलिस पर कठोर टिप्पणी करते हुए टोली के आरोपियों को जमानत पर छोडा । कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में, अर्थात वर्ष 2016 में ही अबिद पाशा ने यह स्वीकार किया था कि उसने 25 लोगों की सहायता से 7 हिन्दुआें की हत्या की; परंतु मुसलमानों के एकगठ्ठा मतों के लिए कांग्रेस शासन निष्क्रीय रहा और पुलिस ने जानबूझकर की ढीली जांच के कारण आरोपियों को लाभ मिलता गया । इससे कर्नाटक की धर्मनिरपेक्ष सरकार और पुलिस आबिद पाशा गैंग पर मेहरबान है, यह दिखाई देता है ।
इस पूरे प्रकरण से यही दिखाई देता है कि कर्नाटक सरकार हिन्दुत्ववादियों की हत्याआें के विषय में गंभीर नहीं है । इतनी हत्याएं करके भी आबिद पाशा सहित उसकी गैंग के सभी अपराधी आज मैसुरू नगर में खुलेआम घूम रहे हैं, जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं । उन्होंने विघ्नेश और सुधींद्र इन विद्यार्थियों की हत्या प्रकरण के साक्षी के. राजू की हत्या की, इसका उदाहरण सामने होते हुए भी किसी भी साक्षी को सुरक्षा नहीं दी गई है । इस कारण हिन्दुत्ववादियों के परिजन आतंक की छाया में जी रहे हैं । इन हिन्दुत्ववादियों के परिजनों को न्याय दिलाने हेतु हमारी शासन से मांगें हैं –
1. आबिद पाशा और गैंग के सदस्यों ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए उनकी जमानत रद्द कर, उन्हें तत्काल बंदी बनाया जाए ।
2. हिन्दुत्ववादियोंके परिजनोंको तथा साक्षी (गवाह)को तत्काल सुरक्षा दी जाए तथा शासन उनकी आर्थिक सहायता करे ।
3. इन प्रकरणों की जांच सी.बी.आई. अथवा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को सौंपकर गहन जांच की जाए । इसमें मैसुरु की हत्याआें के फरार सूत्रधार ‘टिंबर आतिक’ को खोजा जाए तथा कर्नाटक के अन्य स्थानों के हिन्दुत्ववादियों की हत्याआें से भी इन आरोपियों का कोई संबंध है क्या, इसकी जांच की जाए ।
4. प्रकरणों की जांचमें तथा न्यायालयीन कामकाज में त्रुटि रखनेवाले अधिकारियों को निलंबित कर उनकी जांच की जाए ।
5. ‘कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी’ नामक प्रतिबंधित सिमी से संलग्न संगठन के आबिद पाशा और गैंग के ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ इस संस्था से संबंध ध्यान में रखते हुए उसे प्रतिबंधित किया जाए ।

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar