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9 अगस्त देश के विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा शांतिपूर्वक तरीके से भारत बंद किया

नई दिल्ली। आरक्षण विरोधी पार्टी ने इसका आवाहन किया है, इस मौके पर आरक्षण विरोधी पार्टी द्वारा संसद भवन मार्ग और देश भर में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रर्दशन किया गया और जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री और माननीय मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपा जा रहा है। इस बंद के माध्यम से हाल ही में देश की राज्यसभा और लोकसभा में एससी-एसटी एक्ट जैसा दोहरा कानून पास किया गया है, जिसको बिलकुल खत्म करके एक नागरिक एक कानून बनाए जाने की मांग की जा रहीं है। गौरतलब है कि एसीसी एक्ट में निर्देश लोगों को फसाया जा रहा है, पिछले दिनों जो सुप्रीम कोर्ट काएससी एक्ट में संसोधन का निर्णय आया है हम उसका स्वागत करते हैं और इस तरह के जातिगत फैलाने वाले कानून को बिलकुल समाप्त करने की मांग करते हैं। उल्लेखनीय है कि अपने राजनैतिक हित साधने के लिए 1989 में राजीव गांधी की सरकार में इस हरिजन एक्ट को पास कराया था, लेकिन इसके बाद वे और उनकी पार्टी सत्ता से बेदखल हो गए थे। पिछली कांग्रेस सरकार ने 2012 में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताकर प्रमोशन में आरक्षण का बिल इसी संसद में पास कराया जिसके कारण देश के जनमानसस ने उन्हें भी सत्ता से बेदखल कर दिया था, आज फिर मोदी साहब आपकी सरकार ने वही भूल की है, आपने भी सुप्रीम कोर्ट के देश को रद्द करने का काम करके देश की 82 परिषद जनता के साथ विश्वासघात किया है। अगर आपने अपने इस निर्णय को नहीं पलटा तो भयंकर परिणाम आने वाले 2019 के चुनावों में आपको भुगतने पड़ सकते हैं। दूसरी बात क्या सामान्य वर्ग के लोग क्या वोट नहीं डालते अगर उनको वोट डालने का अधिकार है तो उसी सीट पर चुनाव लड़ने का अधिकार क्यूं नहीं है। क्यूं देश की संसद की 131 सीटें और विधानसभा की 1325 सीटें सिर्फ एससी-एसटी के लिए रिर्जव की हुई हैं। इनको तुरंत प्रभाव से सामान्य घोषित करके सामान्य वर्ग के साथ न्याय किया जाए। इस सरकारी भेदभाव के चलते देश में वर्ग संर्घष पनप रहा है, जो एक दिन गृहयुद्ध का कारण बनेगा। आरक्षण नीति भारत के नागरिकों के समानता के संबैधानिक अधिकार के विपरीत है, बार-बार संबिंधान संसोधन करके देश के राजनेता संविधान की मूल भावना से भटक गए हैं और इस नीति को वोट बैंक बनाए रखने के लिए बेतुके तरीके से देश में लागू रखना चाहते हैं। इस नीति से देश का बेेड़ा गर्क किया जा रहा है, अयोग्य लोगो को डाक्टर, इंजिनीयर और वैज्ञानिक बनाकर राष्ट्र की तरक्की में बडी रुकावट पैदा की जा रही है। दूसरी तरफ हरिजन एक्ट के कारण आरक्षित और अनारक्षित समाज के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो रही है, समाज को बांटने वाले इस कानून से देश वर्ग संघर्ष की ओर बढ़ रहा है। किसी जाति या वर्ग को विशेष अधिकार व सुविधाएं देना सामाजिक न्याय के खिलाफ है। संसद के शीतकालीन सत्र में हरिजन एक्ट और आरक्षण नीति को समाप्त किया जाए नही तो पब्लिक में असंतोष इतना बढ गया है कि इस मुद्दे पर एक बड़ा आंदोलन होने जा रहा है, अगर इस अगले संसद स़त्र में एससी एसटी एक्ट और आरक्षण विरोधी बिल नहीं जाया जाएगा तो एवीपी पार्टी कार्यकर्ता अनिष्चित कालीन अनशन करेंगे।
हम आपका ध्यान इस ओर लाना चाहते हैं कि जो व्यक्ति एक बार सरकारी नौकरी पा चुका है फिर वो किस आधार पर गरीब, पिछड़ा या दलित हो सकता है, माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर उसे प्रमोशन में आरक्षण क्यूं, जबकि 2012 में राज्यसभा में एक ऐसा ही विधेयक पारित किया गया, जो देश में कामचोरों और अयोग्य अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोमोट करके उच्च पदों पर भेजा जाऐगा। देश में लाखों गरीब भूख से मर जाते हैं, तब कोई भी सांसद या मंत्री सरकारी कुश का मुंह खोलने के लिए कभी बकालत नहीं करता। लेकिन वोट बैंक के गंदे लालच के लिए देश व समाज को जातियों में बांटने के लिए, हरिजन एक्ट और जातिगत आरक्षण की वकालत सब करते है। ज्ञात रहेे कि देष में वंचित और षेषितों के नाम पर आरक्षण नीति लागू करतेे समय इसे सिर्फ 10 साल के लिए किया गया था, लेकिन इसके बाद राजनैतिक पार्टियों ने अपने वोट बैंक को बनाए रखने के लिए इस नीति को सिर्फ इस्तेमाल किया है, और सरकारें इसके मूल उददेश्य से भटक गई, विभिन्न रातनैतिक पार्टियों के सांसदो द्वारा अपने राजनैतिक हितों को साधने और अपने वोट बैंक को बनाए रखने के लिए लिए बार-बार संबिधान संसोधन करके आरक्षण को बढाते रहना एक अनेतिक व् अमानवीय कदम है, आरक्षण विधेयक को लेकर समय-समय पर न सिर्फ संविधान संसोधन होता है,बल्कि नित नई जातियों को पिछड़ा घोषित करने की होड़ सी लगी हुई है, जो जनहित में नहीं है, अतः ऐसे बिलों को संसद में लाकर जन-भावनाओं को भड़काने का काम न किया जाए, जिसमे देश के सभी नागरिकों को समानता की दृष्टि से न देखा जा रहा हो। इससे देश में वर्ग संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाएगी। देश की जनता इस ज्यादिती को बर्दास्त नहीं करेगी। सडक़ से लेकर संसद तक इसका विरोध होगा। अतः आपसे निवेदन है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ऐसे जाति और वर्ग विशेष के हितों के लिए विधेयकों को संसद में न लाए जाने के लिए कोई ठोस नियम बनाऐं तथा सभी तरह के आरक्षणों को तुरंत समाप्त कराने की पहल करें व संविधान में प्रदत्त संमानता के अवसर उपलब्ध कराने की गारंटी को सख्ती से लागू किया जाए और संसद में समान अधिकारों के कानून बनें। अगर आरक्षण बाकई गरीबों और पिछडों के लिए था, तो जब गरीबी जाति देखकर नहीं आती तो आरक्षण जाति और धर्म के आधार पर क्यों दिया जा रहा हैं, इसे तुरंत बंद होना चाहिए। मौजूदा जातिगत आरक्षण का लाभ अमीर लोग, नेता, मंत्री और बरिष्ठ अधिकारी ही पीढ़ी दर पीढ़ी उठा रहे हैं। पिछलेे 65 साल से जो समाज शोषित और वंचित है, उसे इसका कोई लाभ नहीं होने दिया, इसलिए शोषित, वंचित और गरीब लोगों को आर्थिक मदद की जरूरत है, न कि आरक्षण की।

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