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एक नई सोच…..भारत को बनाए सत्य सनातन राष्ट्र

हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, जैन, बौद्ध सब ही है भाई-भाई के उद्घोष को साकार करने के लिए आवश्यक है ऐसे राष्ट्र की परिकल्पना

वर्तमान समय में भारत वर्ष में जो वैचारिक क्रांति का दौर प्रारंभ हुआ है। इसे हमें एक नए युग की शुरुआत व भारत के विश्व गुरू बनने की दिशा की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि सभी बुद्धिजीवी जो अपने देश से प्यार करते है। उसका सम्मान बढ़ाना चाहते है, वे निम्न सोच को त्यागकर भारत को कैसे सत्य सनातन राष्ट्र बनाया जाए इस पर विचार करें। बदलाव प्रकृति का नियम है। भारत वर्ष विश्व का ऐसा देश है जिसने संसार को सत्य, अहिंसा का मार्ग बताते हुए सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया: की मानव परक अवधारणा का उद्घोष किया है। आज जो परिस्थिति विश्व में बनती जा रही है तथा भारत में जिस प्रकार अपने पुरातन के वैभव प्राप्त करने की ललक जगी है। वह प्रकृति का शुभ संदेश है। भारत को अगले बीस वर्षों में विश्व गुरू बनना है यह सुनिश्चित है। इसे कोई नहीं रोक सकता है। लेकिन इसके लिए यह भी आवश्यक है कि हम समाज व राजनैतिक दलों में व्याप्त छिछलेपन को दूर कर अपनी सत्य सनातन संस्कृति से नई पीढ़ी, जिसे विश्व का गुरुत्तर भार उठाना है, परिचित कराकर भटकने से रोके। सबसे पहले हमें यह जानना चाहिए कि हमारा धर्म सत्य सनातन धर्म है। जो एक मात्र विश्व में मान व धर्म है। यह धर्म प्रत्येक प्राणी मात्र के सुख की कामना का मूल मंत्र देता है। इस सृष्टी में 84 लाख तरह के प्राणी है। उनमें एक मनुष्य भी प्राणी है। मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसके पास विवेक है। बाकियों के पास नहीं है। इसलिए मनुष्य का दायित्व है कि व सर्वोपरी होने के कारण सबका हित चिंतन करें। सनातन धर्म का संविधान वेद को कहा गया है, जिसमें एक परम तत्व को इस सृष्टी का आदि नियंता यानि बनाने वाला बताया गया है। सनातन धर्म एक ही ईश्वर की व्याख्या करता है। आज विचारणीय प्रश्न यह है कि जिसे सनातन धर्म एक मात्र ईश्वर मानता है वहीं परमात्मा है। हिंदू उसे परमात्मा मानता है। मुसलमान उसे खुदा के रूप में जानता है। ईसाई गौड के रूप में उसकी आराधना करता है। सिक्ख गुरु ग्रंथ साहिब के रूप में पूजा करता है। अन्य भी उसे उसी रूप में देखते हैं। आज जो राजनैतिक दल केवल अपने स्वार्थ के कारण भारत को विघटन का केंद्र बना रहे हैं। उन्हों इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा। केंद्र में बैठी भाजपा सरकार को भी सभी सम्प्रदायों के विद्वानों को बुलाकर सुनिश्चित करना चाहिए कि आपकी उपासना पद्धति जैसे भी है, उसमें सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। इस देश में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति समान रूप से एक दृष्टि से देखा जाएगा। सब पर समान कानून लागू हो,यह भी इस देश के लिए आवश्यक है। भारत एक सत्य सनातन राष्ट्र बनें हमें इस पर विचार प्रारंभ करने की आवश्यकता है। क्योंकि जिस रामराज्य की परिकल्पना हमारे संविधान निर्माता चाहते थे वह असल में सत्य सनातन राष्ट्र बनने पर ही संभव है। संविधान में भी आवश्यक हो तो वेदानुसार बदलाव किया जा सकता है। इससे सभी विभेद खत्म हो जाएंगे और प्रत्येक नागरिक को सुख,समृद्धि, समान अधिकार प्राप्त होंगे। भारत एक सत्य सनातन राष्ट्र बने, इस पर सबको मिलकर कार्य आरम्भ करना चाहिए।

वाणीभूषण पं. प्रभुशरण तिवाड़ी,
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार, भागवत, रामकथा प्रवक्ता हैं)
केंद्रीय संयोजक, विश्व सनातन धर्म संघ

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