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आदिवासी युवाओं के मददगार बने आदान प्रदान कार्यक्रम

भारत में आदिवासी संस्कृति की अपनी विशिष्ट पहचान है। यह जनजाति लोगों का एक ऐसा समूह है, जिनकी भाषा, संस्कृति, जीवनशैली और सामाजिक-आर्थिक स्थिति भिन्न है। मगर देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण की भावना उनमें कूट कूट कर भरी है। वर्षो पूर्व जब अंग्रेज इस देश को गुलाम बनाकर शासन करने आये तो यहाँ के आदिवसियों ने ही सबसे पहले सशत्र विरोध कर स्वतन्त्रता संग्राम का बिगुल फूंका था। कालांतर में यह वर्ग देश की प्रगति और विकास से समान रूप से नहीं जुड़ पाया। गरीबी, अशिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ बेरोजगारी तथा बंधुआ मजदूरी ने आदिवासी समाज को देश की मुख्य धारा से विमुख कर दिया। इसका फायदा माओवादी नक्सलियों ने उठाया और आदिवासी युवाओं को गुमराह कर देश विरोधी गतिविधियों में झोंकने का प्रयास किया। भारत सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुधबुध लेकर यहाँ विकास की योजनाओं को प्राथमिकता से अपने हाथ में लिया और नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र की मुख्य मुख्य धारा से जोड़ने का बीड़ा उठाया।
गृह मंत्रालय, भारत सरकार के प्रोत्साहन के साथ नेहरू युवा केंद्र संगठन आदिवासी युवाओं के विकास के लिए आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रम का आयोजन 2006 से करता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित देश के विभिन्न स्थानों पर अब तक 12 आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया है। नेहरू युवा केंद्र संगठन राजस्थान के राज्य निदेशक डॉ भुवनेश जैन के मुताबिक इसका उद्देश्य आदिवासी युवकों को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ना है, जो कि दूर दराज के क्षेत्रों में रहनेवाले हैं। जिन्हें देश दुनिया में होनेवाली घटनाओं एवं बहुआयामी विकास की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती है। देश के दूरस्थ प्रांतों में रहने वाली जनजातियों को देश के किसी दूसरे स्थान पर क्या हो रहा है, इसके बारे में में जानकारी उपलब्ध करना इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी छात्र और युवा समुदायों को देश के दूसरे भागों में रहने वाले अपने सहकर्मी समूहों के साथ बातचीत करने के लिए पर्याप्त जानकारी और अवसर प्रदान किया जाता हैं जिससे अतिवादी गतिविधियों को समाप्त किया जा सके। डॉ जैन ने बताया इस दृष्टि से आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रम बहुत ही मददगार साबित हो रहे है।
शिविर के समन्वयक मंगल जाखड़ ने बताया जयपुर में 20 से 26 दिसम्बर तक आयोजित आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रम शिविर अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में सफल रहा है। शिविर में महाराष्ट्र, आंध्रा, तेलंगाना और उड़ीसा के नक्सल प्रभावित जिलों के 210 युवाओं ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों का चयन सीआरपीएफ, बीएसएफ और नेहरू युवा केंद्र द्वारा किया गया। एस्कॉर्ट के रूप में सुरक्षा बलों के लोग भी शिविर में शामिल हुए। शिविर के दौरान देश भक्ति और राष्ट्र निर्माण ,गाँधी दर्शन,राष्ट्रीय फ्लैगशिप योजनाओं,महिला सुरक्षा,मानवाधिकार उग्रवाद से उत्पन्न खतरे,कौशल विकास, वन उत्पादक, उधमिता विकास रोजगार,आतंकवाद और विकास, खेलकूद, आदि कार्यक्रमों पर विषय विशेषज्ञों की वार्ताओं , प्रतियोगिताओ और विचार मंथन आयोजित किये गए। आदिवासी संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी मंत्रमुग्ध करने वाली थी। इस दौरान राज्यपाल और फिक्की फ्लो चेयर पर्सन श्वेता चैपड़ा से मुलाकात सहित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व के स्थलों और गारमेंट फॅक्टरी का भ्रमण कराया गया। जयपुर के युवा समन्वयक महेश शर्मा के अनुसार भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निदेशक, योगेश मोहन दीक्षित, त्रिपुरा के पूर्व मुख्य सचिव एल के गुप्ता, नेहरू युवा केंद्र संगठन की गवर्निंग कौंसिल के सदस्य राजेंद्र प्रसाद सेन, जयपुर के जिला कलेक्टर डॉ जोगाराम, दूरदर्शन के वीरेंद्र परिहार, वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा और बाल मुकुंद ओझा पूर्व निदेशक सदाशिव शर्मा चित्तौरगढ़ की युवा समन्वयक संतोष चैहान आदि ने युवाओं को सम्बोधित और रूबरू वार्तालाप किया। वक्ताओं ने कहा शिविर से जो सीखकर जा रहे है उनका अपने क्षेत्र में जाकर व्यापक प्रचार प्रसार करें तभी इसकी सार्थकता सिद्ध होगी।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 8949519406

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