National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

कोरोना के खिलाफ सर्व धर्म समभाव का नजारा

3 साल की शबाना व कार्तिक के हाथ में थाली थी तो वहीं 4 साल का गुरकीरत भी हाथ में चम्मच लेकर छोटी सी कटोरी को बजाने की कोशिश कर रहा था। वहीं ये भी देखा की पं. मुकेश पुजारी शंख से शंखनाद कर रहे थे। ये था सर्वधर्म समभाव यानि सभी धर्मों का एक ही भाव। समान भाव की ये भावना अचानक से जागृत हुई और नजारा ऐसा था कि लोगों ने पांच बजने का भी इंतजार नहीं किया। यहां पर आह्वान तो था एक गंभीर बीमारी को दूर भगाने में जुटे हमारे उन वॉरियर्स के सम्मान के लिए, जो कि दिनरात कोरोना नामक गंभीर बिमारी के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। लेकिन इस दौरान भारत की संस्कृति की अद्भुत छवि भी घरों की चौखट और छतों पर देखने को मिली। पूरा परिवार एक साथ नजर आया। यहां तक की सभी कुछ ना कुछ बजाकर हमारे उन वॉरियर्स की हौंसला अफजाई कर रहे थे जो अपने घर-परिवार की चिंता किए बगैर एक बड़ी जंग लड़ रहे हैं। शंख की ध्वनि के साथ थालियों, कटोरियों की खनक, घंटियों की टन-टन, मजीरों की झंकार और ढोलक की थाप के मध्य पूरे देश में गूंजा एक महासंगीत। यह संगीत अद्भुत था। जरा विचार करें। इस संगीत में हिंदू की आरती, मुस्लिम की अजान, ईसाई की प्रार्थना और सिखों का कीर्तन भी शामिल था। ये सब मिला तो अहसास ये भी हुआ कि आज भी मेरा भारत एक है। जिस भारत में अनेकता में एकता आज भी झलकती है। सांस्कृतिक इतिहास पर नजर डाली जाए तो ये एकता ही इस महान भारत देश की असीम थाती रही है। जिसने इस देश की ख्याति पूरे विश्व में की है। ये ही एकता अब गंभीर बीमारी के खिलाफ एकजुट नजर आ रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने एक दिन के जनता कर्फ्यू का आह्वान भारत की आवाम से किया था। इसमें इतना बड़ा योगदान देकर लोगों ने भारतीय गणतंत्र को और भी मजबूत बना दिया है। ऐसे ही हमारे देश का लोकतंत्र सबसे महान नहीं है। ये दर्शाया आज के इस संदेश ने। हमारे प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच को भी सलाम है। उन्होंने तो सरकार बनने के बाद ही स्वच्छता को अपनाने और स्वच्छ भारत बनाने का संकल्प दोहराया और खुद इसकी अगुवाई कर स्वच्छता अभियान में उतरे। उनके साथ धीरे-धीरे लोग जुटे और यह अभियान एक बड़ा विशाल अभियान बना। आज चीन और अमेरिका व इटली जैसे विकसित देश इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्वच्छता अभियान का भारत में काफी पहले से चलते रहना हमारे देश के लिए काफी कारगर सिद्ध हुआ। वरना तो यहां भी यह महामारी विशाल रूप में अभी से नजर आने लग जाती। अभी भी मोदीजी की स्वच्छता वाली अपील पर गौर फरमाना होगा देश के उन लोगों को भी जिन्होंन स्वच्छता से दूरी बनाई हुई है। कोरोना को हराने के लिए बड़ी लड़ाई लड़नी है। ऐसे में स्वच्छता का हथियार आपके पास होना अत्यंत आवश्यक है। अपने आस-पास साफ-सफाई रखें और बार-बार हाथों को धोना जरूरी है। इस बात को समझना होगा। देशभर में एक औऱ चीज नजर आ रही है। बाजार बंद हैं और लोग घरों में हैं। लेकिन घरों में नजारा ये है कि पूरा परिवार एक साथ है। ऐसे में परिवार के लोग एक साथ बैठेंगे तो आपस में एक-दूसरे के विचारों का आदान-प्रदान होगा। एक पिता जिसे अपने व्यवसाय, नौकरी, पेशा आदि में व्यस्त रहने के चलते परिवार के लिए समय कम मिल पाता था। वो समय इस कोरोना के चलते अब मिल रहा है। इस समय का सदुपयोग करें और बच्चों के मन की बात जाने और उनको अच्छे प्रेरक प्रसंग और जीवन से जुड़ी बातें बताकर उनका ज्ञान वर्धन करें ताकि वे भी समाज में अच्छे नागरिक की भूमिका भविष्य में निभा सकें। कुछ ऐसी ही भूमिका मां को भी निभानी होगी। वहीं बच्चों को भी घर पर अपने माता-पिता के अलावा दादा-दादी से अच्छी प्रेरणात्मक चीजें सीखने का अवसर रहेगा। स्कूलों व कॉलेजों की छुट्टियों के चलते अब वे परिवार के मध्य रहकर बड़े-बुजुर्गों की सेवा का जिम्मा भी संभाले और संस्कार की शिक्षा ग्रहण करें। अब बात फिर मुद्दे की करते हैं। संस्कृति को जागृत करने में कोरोना एक अहम भूमिका निभाती नजर आ रही है। आप चौंक गए होंगे। लेकिन ये सही है। इसके सकारात्मक पहलू पर नजर डाले तो कोरोना के भय के कारण ही सब एकजुट हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील का असर तो आप सभी ने देखा है। हमारी संस्कृति की महानता को सभी को अब इसी तरह महान बनाए रखने में योगदान देना होगा। मेरा आह्वान है कि अब सभी मिलकर इस महामारी के खिलाफ जंग में जुटे वॉरियर्स का हौंसला बढ़ाने के लिए 31 मार्च तक प्रतिदिन शाम को 5 बजे एक साथ जंग के खिलाफ शंखनाद करें और सम्मान बढ़ाएं हमारे वीर योद्धाओं का जो हमारे लिए मैदान में हैं। आज हरेक भारतवासी ने दिल जीत लिया। सच में मेरा भारत महान है।

चन्द्रमौलि पचरंगिया
लेखक रसमुग्धा पत्रिका के सम्पादक हैं।

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar