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सब मिलकर करें कोरोना से मुकाबला

कोरोना संकट के चलते देश में लॉक डाउन लागू है। देश के सभी लोग अपने-अपने घरों में सिमटे हुये हैं। लाक डाउन के चलते कोई घरों से बाहर नहीं निकल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न माध्यमों से बार-बार देश की जनता से अपील कर रहे हैं कि वह कोरोना से बचाव के लिए अपने अपने घरों में ही रहे व सोशल डिस्टेंस मेंटेन करें। कोरोना के बढ़ते प्रभाव के मध्य नजर महाराष्ट्र, पंजाब व चंडीगढ़ में कर्फ्यू लगा हुआ है। कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। देश के अधिकांश प्रदेशों को कोरोना अपनी चपेट में ले चुका है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन पूर्व में ही कोराना को वैश्विक महामारी घोषित कर चुका है। दुनिया के अधिकांश देश इस महामारी की चपेट में है। सभी देश अपने अपने स्तर पर इस महामारी से मुकाबला कर रहे हैं। चीन के बाद यूरोप के अधिकांश देश अमेरिका, स्पेन इस महामारी की भयंकर चपेट में आए हुए हैं। देश के लोगों को कोरना से बचाने के लिए केंद्र सरकार सभी राज्यों की सरकारों के साथ तालमेल कर इस पर काबू पाने का गंभीरता से प्रयास कर रही है। सरकार के प्रयासों के चलते कोरोना के प्रभाव में कमी देखने को मिल रही थी कि यकायक गत 2 दिनों से कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या में एकाएक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका कारण है दिल्ली के निजामुद्दीन एरिया में तबलीगी जमात में हजारों लोगों का एक साथ एकत्रित होना और फिर उनका देश के विभिन्न प्रदेशों में निकल कर वहां के लोगों से मेल मिलाप करना।

जहां पूरे देशवासी कोरोना महामारी से मिलकर मुकाबला कर रहे हैं वही तबलीगी जमात के लोगों ने इस लड़ाई को कमजोर कर कोरोना को फैलने में सहयोग दिया है। तबलीगी जमात से निकले लोग देश के विभिन्न भागों में कोरोना के वाहक बनकर घूम रहे हैं। केंद्र व दिल्ली सरकार की पाबंदियों के बाद भी तबलीगी जमात के आयोजको ने सरकारी नियमों को तोडक़र हजारों की संख्या में वहां लोगों को एकत्रित किया। जिनमें भारत के सभी प्रदेशों के अलावा विदेशों के भी हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे।

देश में कोरोना वायरस के करीब 400 मामले तबलीगी जमात के कारण सामने आए हैं और यह आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय इन सभी मामलों में संपर्क में आने वाले लोगों की शिनाख्त करने में जुटा हुआ है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने भी अब तक तबलीगी जमात में शामिल हुये 9000 लोगों को चिन्हित किया है जिसमें से 1306 लोग विदेशी हैं। इन विदेशी नागरिकों के वीजा की जांच चल रही है।

तबलीगी जमात में शामिल लोगों को विभिन्न प्रदेशों में आज भी ढूंढा जा रहा है। अकेले दिल्ली में ही जमात में शामिल हुए करीबन 400 लोगों को कोरोना पॉजिटिव होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसी तरह देश के विभिन्न भागों में जमात से निकले हजारों लोग देश के विभिन्न भागों में कोरोना रोग से पीड़ित है तथा वे स्वयं सामने आकर अपनी चिकित्सा जांच नहीं करवा रहे हैं जो एक जघन्य अपराध है। इसके अलावा देश के कई भागों में कोरोना संदिग्धों की जांच करने व उनको घर में रहने के लिये पाबंद करने के लिए उनके यहां जा रही चिकित्सकों की टीम पर भी सामूहिक रूप से हमले किए जा रहे हैं। जिसकी पूरे देश में निंदा हो रही है।

कोरोना महामारी से लडऩे के लिए देश में केंद्र व राज्य सरकारो ने आपसी समन्वय स्थापित कर इसकी रोकथाम के लिए लगी हुई है। वहीं कुछ राजनीतिक दल सरकार पर टीका टिप्पणी भी कर रहे हैं। जिसके लिये अभी समय नहीं हैं। लाक डाउन की घोषणा के बाद देश के विभिन्न प्रदेशों में रह रहे प्रवासी मजदूरों को वहां से भगाने के लिए कुछ लोगों ने अफवाह फैला कर उनको डरा दिया था कि यहां रहे तो भूखे मर जाओगे सरकार उनके खाने की कोई व्यवस्था नहीं करेगी। जिस कारण देश में एकाएक अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया था व लाखों लोग सडक़ों पर निकल पड़े थे। दिल्ली में यूपी बार्डर पर लाखों की भीड़ एकत्रित हो गयी थी। लोग लोकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए सडक़ों पर निकल कर पैदल ही अपने घरो की तरफ चल पड़े थे। इससे देश में अव्यवस्था फैलने लगी।

इस पर केंद्र सरकार ने सभी प्रदेश सरकारों को सख्त निर्देश दिया की अपने-अपने प्रदेश में जिलों की सीमा को पूरी तरह सील कर अपने घरों के लिए निकले हुए लोगों को जहां है उसी स्थान पर रोककर उनके खाने-पीने, रहने व चिकित्सा सुविधा की पूरी व्यवस्था करें। उन्हें किसी तरह की कोई तकलीफ ना होने दें। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद मजदूरों का पलायन रुक पाया। इसी दौरान कुछ लोगों ने लोक डाउन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार के खिलाफ याचिका लगाई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे माहौल में सरकार जो कार्यवाही कर रही है वह संतोषजनक है। कांग्रेस पार्टी भी लोक डाउन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर अचानक लोक डाउन करने के सरकार के निर्णय को गलत बताया है। सोनिया गांधी केंद्र सरकार से कॉमन मिनिमम प्रोग्राम लागू करने की मांग कर रही है। वहीं कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी लगातार सरकार पर निशाना साध रहे हैं। माकपा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र रिलीफ फंड बनाने पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब पहले से ही देश में प्रधानमंत्री सहायता कोष मौजूद है तो दूसरा कोष बनाने का क्या औचित्य है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे कांग्रेस व वामदलों के नेताओं को कहीं समर्थन मिलता नहीं नजर नहीं आ रहा है।

एक तरफ जहां देश वैश्विक महामारी की आपदा से जूझ रहा है वही कांग्रेस के नेताओं का केंद्र सरकार पर निशाना साधना समय अनुसार सही नहीं है। कांग्रेस पार्टी देश में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। उनकी चार प्रदेशों में सरकारी चल रही है। कांग्रेस ने अभी तक पार्टी स्तर पर कोरोना से बचाव के लिए लोगों की किसी भी प्रकार की सहायता का कोई प्रबंध नहीं किया है। कई प्रदेश कांग्रेस कमेटियों ने प्रदेश व जिला स्तर पर राहत कमेटी का गठन किया है मगर महज कागजों में ही। जबकि लाखों समाजसेवी व सामाजिक संगठन विभिन्न तरीके से लोगों की मदद कर रहे हैं। देश में सरकार विरोधी दलों के नेताओं को फिलहाल सरकार द्धारा किये जा रहे राहत कार्यो में कमी निकालने की बजाय सरकार की मदद करनी चाहिये ताकि लोगों में उनकी विश्वसनीयता बनी रह सके व सरकार भी सुचारू रूप से कार्य कर सके।

रमेश सर्राफ धमोरा

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