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कुम्भ राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: इस वर्ष आप स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। सिरदर्द एवं कफ की अधिकता आपको व्यथित कर सकती है। विशेषतः वृक्क (किडनी) के रोगी नियमित चिकित्सा लेते रहें। इस वर्ष आपको मोटापे की समस्या भी हो सकती है। 22 मार्च से 04 मई के मध्य आकस्मिक यात्रा का योग बन रहा है, सावधानीपूर्वक यात्रा करें। 10 सितम्बर से राहु आपकी राशि से चतुर्थ स्थान से गुजरने के कारण शारीरिक सुखः में बाधा उत्पन्न कर सकता है। 20 नवम्बर से स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा।

आर्थिक स्थिति: इस वर्ष आपकी आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। विशेषतः वर्ष के पूर्वार्ध में धनागमन अधिक होगा। 08 फरवरी से 22 मार्च के मध्य ऊपरी आय में वृद्धि हो सकती है। सन्तान को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सम्बन्धी समस्यायें हो सकती हैं। पिता की स्वास्थ्य पर भी धन व्यय होगा। 18 जून से 16 अगस्त के मध्य पैतृक सम्पत्ति प्राप्ति का योग है। स्वयं की स्थिति के अनुसार पिता से सम्पत्ति का लाभ प्राप्त हो सकता है। न्यायिक विवादों (कोर्ट-केस) में सावधानी रखें।

व्यवसाय: व्यवसाय एवं सेवा क्षेत्र के लिये यह वर्ष सामान्य ही रहेगा। कार्य व्यवसाय में सीमेन्ट-सरिया, भवन निर्माण सामग्री, जंगलात सामान में लाभ होगा। व्यापारी वर्ग को तिल, उड़द, काली मिर्च, हल्दी, जीरा, चमड़ा, ऊन, नमक, कागज, लेखन सामग्री आदि के व्यापार में अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है। किसी नवीन व्यवसाय अथवा योजना में निवेश करने के इच्छुक हैं, तो सोच-विचार कर आगे बढ़ें। सरकारी कर्मचारियों की 30 मार्च से 30 जून के मध्य स्थानान्तरण व वेतनवृद्धि हो सकती है। उच्चाधिकारी का दबाव भी रह सकता है।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: यह वर्ष पारिवारिक एवं सामाजिक दृष्टि से मिश्रित फलदायक रहेगा। इस वर्ष स्वयं में अधिक उलझे रहने के कारण परिवार व समाज को अधिक समय नहीं दे पायेंगे। वर्ष के पूर्वार्ध में सन्तान के स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या उत्पन्न हो सकती है, किन्तु रोग अधिक गम्भीर नहीं होगा। वर्ष के उत्तरार्ध में पिता के लिये समय थोड़ा कष्टदायक हो सकता है। इस वर्ष ज्येष्ठ भ्राता तथा मित्रों से लाभ प्राप्त हो सकता है। सामाजिक मान-सम्मान प्राप्त होने के कारण कुटुम्ब में आपकी उपयोगिता में वृद्धि होगी।

प्रणय जीवन: इस वर्ष आपके दाम्पत्यजीवन में सामान्य बातों के कारण वाद-विवाद हो सकता है। छोटी-छोटी बातों से गृह वातावरण अशान्त हो सकता है। प्रेम-प्रसंग में सचेत रहें, स्त्री पात्र का विश्वास अर्जित करें, निष्ठावान बनें तत् पश्चात् जीवन में प्रेम का महत्व ज्ञात करने के उपरान्त ही आगे बढ़ें। प्रेम-सम्बन्ध के मध्य किसी अज्ञात व्यक्ति को न आने दें। प्रेम-प्रसंगों के क्षेत्र में मानसिक रूप से दुविधायें अधिक रहेंगी।

स्त्री जातक फल: इस राशि की स्त्रियों के लिये यह वर्ष माध्यम रहेगा। 24 जनवरी से आपको अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रखना होगा। मासिक धर्म सम्बन्धित रोग हो सकते हैं। 13 फरवरी तक अस्थमा की समस्या रह सकती है। तले हुये आहार से बचाव करें। सास-श्वसुर एवं परिवार के अन्य सदस्यों के प्रति स्नेहभाव रखेंगे तो आनेवाला समय उन्नतिशील होगा। पुराने रोगों के प्रति गम्भीरता रखें तथा नियमित चिकित्सा करायें। जिन जातकों को रक्तस्त्राव, श्वेतप्रदर अथवा माहवारी के समय अधिक रक्तस्त्राव की समस्या है, वह विलम्ब न करते हुये शीघ्र ही चिकित्सीय परामर्श करें।

राजकीय स्थिति: इस वर्ष आप अपने पक्ष के पदाधिकारियों से मधुर सम्बन्ध रखें तथा उन्हें प्रसन्न रखें। अपने स्वयं के मन में जिस राजकीय पद की प्राप्ति की योजना बना रखी हैं, परिश्रम के द्वारा आप उसे प्राप्त कर सकते हैं। किसी के बहकावे में आकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय न लें तथा न ही किसी पर अन्धविश्वास न करें। आपके राजकीय पद की स्थिति व अधिकार प्राप्ति का निर्णय एक सीमा तक आपके जन्म के ग्रह पर भी निर्भर करता है।

विद्यार्थी जीवन: विद्यार्थियों को अध्ययन हेतु विदेश अथवा जन्म स्थान से दूर के क्षेत्र में निवास करना पड़ सकता है। इस वर्ष आप किसी बहुराष्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत हो सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त हो सकती है। स्पर्धात्मक परीक्षाओं में परिश्रम के उपरान्त सफलता प्राप्त हो सकती है तथा इन परीक्षाओं में अन्तिम चरण में चयन हो सकता है। विशेषतः एम बी ए की परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिये वर्ष का उत्तरार्ध उत्तम रहेगा। यथासम्भव परिश्रम करें।

सारांश: इस वर्ष शारीरिक एवं मानसिक स्थिति प्रबल रहेगी, पुराने रोगो के प्रति सतर्क रहें। यदि किसी मानसिक रोग की औषधि ग्रहण कर रहे हैं, तो बिना चिकित्सीय परामर्श के बन्द न करें। अपने आर्थिक आदान-प्रदान का सम्पूर्ण लिखित प्रमाण रखें। शेयर तथा वस्तु बाजार से अत्यधिक लाभ प्राप्ति की अपेक्षा न रखें। वर्ष के उत्तरार्ध में माता के स्वास्थ्य से समबन्धित समस्या हो सकती है, माता जी ध्यान रखें। विद्यार्थी कठोर परिश्रम के माध्यम से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। प्रणय जीवन आनन्दमय एवं सुखमय व्यतीत होगा। पिता जी से वार्तालाप करते समय मान-सम्मान का पूर्ण ध्यान रखें। राजनीति में यदि ध्यान न रखा तो भविष्य में अपने निर्णयों से पलटना पड़ सकता है। स्त्रियाँ यदि सम्मान बनाये रखने की इच्छुक हैं, तो मर्यादा का पालन करें। पति एवं परिवार को सम्भालकर कर अन्य दिशा में ध्यान केंद्रित करें।

मर्यादा: –

  1. वर्ष के आरम्भ में साढ़ेसाती, कण्टक अथवा ढैया नहीं है। 24 जनवरी से साढ़ेसाती का लौह पद मस्तक से चढ़ता हुआ प्रारम्भ होगा। आर्थिक कष्ट, शारीरिक पीड़ा, रक्त विकार, स्त्री-पुत्र व पशु को पीड़ा, राजकीय एवं व्यापर में हानि हो सकती है।
  2. इस वर्ष आपको महत्वपूर्ण कार्य हेतु आत्मविश्वास की आवश्यकता होगी।
  3. किसी को परामर्श एवं कार्य निष्पादन हेतु अपना सुझाव न दें, सम्भव हो तो कार्यस्थल पर किसी के अनुयायी ही बने रहें।
  4. इस वर्ष व्यवहार में धैर्य व सहनशीलता को स्थान दें तथा किसी पर अत्यधिक क्रोध न करें।
  5. विपरीत परिस्थितियों में व्यथित न हों तथा कटु व्यवहार न रखें। जो स्त्रियाँ चालीस वर्ष से अधिक आयु की हैं तथा माहवारी से निवृत होने वाली हैं, वह इस बात का ध्यान रखें।
  6. सभी से प्रतिशोध की भावना रखने के स्थान पर क्षमा करना सीखें।
  7. महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय भ्रामक स्थिति उत्पन्न होने पर परिवारजनों एवं घनिष्ठ मित्रों से विचार-विमर्श करें।

समाधान: –

  • शनिदेव का दान किसी वृद्ध, दिव्यांग, भिक्षुक को शनिवार के दिन सन्ध्याकाल में दान करें। दान में निम्नलिखित सामग्रियों को सम्मिलित करें : काला वस्त्र, काली उड़द, काले तिल, घी, तेल, लोहे का कोई पात्र, छाता, जूता, दक्षिणा आदि।
  • समुद्री जहाज अथवा नाव की कील का छल्ला बनवाकर शनिवार के दिन हनुमान जी के चरणों में रखने के उपरान्त अपनी मध्यमा अँगुली में धारण करें। छल्ला धारण करने से पूर्व पूजन करवायें।
  • शनिवार के दिन मछलियों को खाद्य पदार्थ दान करें।
  • शनिवार की सन्ध्या के समय निम्नलिखित मन्त्र से पूजन-जप करवा कर गले में नीलम रत्न धारण करें-
    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
  • मिथ्या कथन न कहें, मदिरा, परस्त्रीगमन तथा धूम्रपान आदि का त्याग कर दें।
  • शनिवार या किसी भी दिन शनि की होरा में मछली को आटे की गोलियाँ खिलायें।
  • वृद्ध, दिव्यांग तथा भिक्षुक को भोजन करायें।

-निम्नलिखित मन्त्र का प्रतिदिन 108 बार जप करें-
ह्रीं नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

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