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मेष राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: स्वास्थ्य की द्रष्टि से वर्ष का प्रारम्भ अनुकूल रहेगा। शारीरिक एवं मानसिक स्थिति अनुकूल होने के कारण आप अपने दैनिक कार्य योग्य तरीके से पूर्ण कर सकेंगे। 07 फरवरी तक छोटी-मोटी शारीरिक समस्या हो सकती है। सावधानीपूर्वक कार्य करें, अन्यथा गिरने या चोट लगने से अस्थि सम्बन्धित समस्या हो सकती है। छोटे-मोटे व्यसन के कारण गम्भीर शारीरिक समस्या हो सकती है, सावधान रहें। नेत्रों में धुंधलेपन की समस्या भी हो सकती है। श्वेत अथवा काले दाग (कोढ़) की समस्या से पीड़ित हैं, तो विशेष ध्यान रखें। 14 मार्च से 14 अप्रैल के मध्य एवं 18 जून से 16 अगस्त के मध्य मुख, गला तथा रक्त सम्बन्धी समस्या हो सकती है। ऋतु सम्बन्धित रोग तथा उच्च या निम्न रक्तचाप, मधुमेह,श्वास, दमा आदि जैसे स्थायी रोगों के प्रति सचेत रहें। आवश्यकता होने पर समय के अनुकूल अपने विचारों में परिवर्तन करें। हठी स्वभाव का त्याग करें तथा आवश्यकतानुसार समझौता करें।

आर्थिक स्थिति: वर्ष के आरम्भ में आर्थिक स्थिति आपकी अपेक्षा के अनुरूप रहेगी। आपकी निजी एवं पारिवारिक आय में वृद्धि होगी। यदि आपकी आय संयुक्त है अथवा पैतृक है, तो आय में चमत्कारिक परिवर्तन होगा। 14 जनवरी से 13 फरवरी तक एवं 16 जुलाई से 16 अगस्त तक आर्थिक आदान-प्रदान में सतर्क रहें। 19 सितम्बर से धन सम्बधित कार्यों में सतर्कता रखें। बिना लिखित विवरण के आर्थिक आदान-प्रदान न करें तथा ऋण व ब्याज से दूर रहें। वर्ष के अन्त में आर्थिक स्थिरता बनाने का प्रयत्न करे।

व्यवसाय: वर्ष प्रारम्भ में आपके कर्म स्थान में शनि महाराज विराजमान हैं। 24 जनवरी से शनि आपके लाभ स्थान में प्रवेश करेंगे। कृषि सम्बन्धित व्यवसाय में आपकी मनोकामनाओ की पूर्ति होगी। नोकरिपेशा वाले जातकों को पदोन्नति का लाभ प्राप्त हो सकता है। 11 मई से 29 सितम्बर तक व्यवसाय के क्षेत्र में आप परिवर्तन के विषय में विचार करेंगे। लाभ मध्यम गति से होगा। समय के साथ समझौता करने की आवश्यकता होगी। 29 सितम्बर से, समय व ग्रह आपके पक्ष में होने के कारण आपको तीव्र गति से पुन: व्यवसायिक सफलता की प्राप्ति होगी।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: इस वर्ष की पारिवारिक स्थिति के अनुसार 08 फरवरी तक कौटुम्बिक मनमुटाव रहेगा, पड़ोसियों से अनबन रहेगी। सामाजिक स्तर पर आपके आगे बढ़ने के स्वप्न साकार होते प्रतीत होंगे। 30 मार्च से 30 जून तक समाज एवं कुटुम्ब के प्रति आपका दृष्टिकोण परिवर्तित होता दिखेगा। निकटीय कुटुम्ब के सदस्यों के साथ व्यवहारिक सम्बन्ध गहरा बनाये रखें। समाज में आप अपनी एक नवीन छवि बनाने का प्रयत्न करेंगे, किन्तु आपका उत्साहपूर्ण स्वभाव बनाये रखें।

प्रणय जीवन: वर्ष प्रारम्भ में प्रणय स्थान में कोई ग्रह विचरण नहीं कर रहा है। 29 फरवरी से 28 मार्च तक दाम्पत्य जीवन व प्रणय जीवन का कारक ग्रह शुक्र आपकी राशि में रहेगा जो सप्तम स्थान पर अपनी पूर्ण द्रष्टि रखेगा। अत: इन दिनों में अपनी कामेच्छा पर नियन्त्रण बनायें रखें। जीवनसाथी या प्रेमिका के साथ अविस्मरणीय समय व्यतित कर पायेंगे। आमोद-प्रमोद एवं भोग-विलास के साधन शुलभ होंगे। सौन्दर्य प्रसाधनों, सुगँधित द्रव्यों तथा उतम वस्त्राभूषण का भी प्रणय-जीवन में आदान प्रदान होगा। विवाह इच्छुक जातकों की कामना इस वर्ष पूर्ण होगी। दाम्पत्यजीवन में एक-दूसरे पर विश्वास बनायें रखें।

स्त्री जातक फल: यदि आप अविवाहित हैं, तो इस वर्ष आपकी विवाह की इच्छा पूर्ण हो सकती है। इस वर्ष स्त्री चिकित्सक की सहायता लेनी पड़ सकती है, सावधान रहें। वर्ष के प्रारम्भ से 07 फरवरी तक पति की शारीरिक पीड़ा को लेकर चिन्ता सकती है। 16 जुलाई से 16 अगस्त तक यदि वक्ष सम्बन्धित पुरानी समस्या है, तो चिकित्सक की सलाह लें। 22 मार्च से 04 मई के मध्य परिवार, पिता एवं मित्रों पर धन व्यय होगा। व्यावहारिक, सामाजिक तथा धार्मिक कर्मों में व्यस्तता अधिक रहेगी, जिससे आर्थिक व्यय तथा अस्वस्थ्यता हो सकती है। पति-पत्नी के सम्बन्धों में मधुरता रहेगी।

राजकीय स्थिति: वर्ष का प्रारम्भिक समय आपको विशिष्ट स्थिति में भी विजय दिलवायेगा। आपके उत्साहपूर्ण व्यक्तित्व से ही सफलता का आँकलन हो जायेगा। 24 जनवरी से मन्द ही सही किन्तु एक निश्चित गति मिलेगी। यदि आप अपने गौरवपूर्ण स्वभाव में थोड़ी शीतलता लायेंगे तो समाज मे एक विशिष्ट एवं आदर्श स्थान प्राप्त होगा। कटु-सत्य बोलने के स्थान पर सुमधुर भाषा बोलने पर ध्यान केन्द्रित करें। आप स्पष्ट वक्ता हैं, किन्तु कटु वचनों से निष्फलता ही प्राप्त हो सकती है, अतः जैसा मस्तक वैसा टीका लगायें अथार्त व्यक्ति के अनुसार व्यवहार करें तथा फल की प्राप्ति करें।

विद्यार्थी जीवन: विधार्थीवर्ग के लिये यह वर्ष प्रगतिदायक एवं सफलता से पूर्ण रहेगा। योग्य विद्यालय या शिक्षण संस्थान ढूँढ़ने में सक्षम रहेंगे। जिन छात्रों का अन्तिम वर्ष है, उनके पूर्व में किये हुये परिश्रम के फलस्वरूप सफलता प्राप्ति से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। 16 जुलाई से 16 अगस्त के मध्य अपने मित्र अथवा सहाध्यायी के जीवन की नकल करने का प्रयास न करें। एकाग्रता या अभ्यास में मन नहीं लगने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। 14 जनवरी से 13 फरवरी तक तथा 22 मार्च से 04 मई के मध्य पारिवारिक समस्या के कारण मानसिक अशान्ति हो सकती है, मन को स्थिर रखें। यदि जन्म के ग्रह प्रबल होंगे तो विदेश अभ्यास का स्वप्न साकार भी हो सकता है, अपना मनोबल बनायें रखें।

सारांश: वर्ष 2020 का समग्रतया आंकलन करने पर आपको इस वर्ष में मध्यम लाभ होगा। प्रगति, सफलता एवं आनन्द का अनुभव होगा। शनि के गोचर के सकारात्मक प्रभाव से भाग्योदय होगा। गुरु के प्रभाव से अभ्यास एवं पुत्र-पौत्र के बाधित कार्य सफल होंगे। राहु के प्रभाव के कारण यात्रा-प्रवास, धार्मिक यज्ञ-अनुष्ठान आदि में व्यय होगा। व्यवसाय में लाभ, कम्पनी का विस्तृतिकरण, नौकरीपेशा लोगो को पदोन्नति, आय के स्त्रोत में वृधि होगी। शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे, रोगी जातकों को लाभ मिलेगा। योग, व्यायाम तथा ध्यान का प्रतिदिन निरन्तर अभ्यास करें। विद्यार्थी मन लगाकर अभ्यास कर पायेंगे। उच्च अभ्यास के पूर्ण योग बन रहे हैं, अवसर का लाभ प्राप्त करें।

मर्यादा: –

  1. सन् 2020 में आप पर किसी प्रकार की लघु कल्याणी, कण्टक, अष्टम ढैया या साढ़ेसाती नहीं है।
  2. वर्ष के प्रारम्भ में वाहन चलते समय एवं आहार-विहार में सावधान रहें।
  3. सम्भवतः प्रगति धीमी हो, किन्तु मन में निराशा न उत्पन्न होने दें, उत्साह बनाये रखें।
  4. अपनी लोभी प्रवृत्ति के कारण किसी को हानि न पहुँचायें।
  5. गम्भीर परिस्थिति में सुझाव की आवश्यकता होने पर ही योग्य निर्णय करें, आपका महत्वपूर्ण निर्णय कठोर व क्रोध से भरा हो सकता है।
  6. आप एक स्पष्टवादी हैं, अतः बिना किसी भूमिका एवं भ्रम के अपनी बात कहना पसन्द करते हैं, किन्तु सामने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति को भी समझने का प्रयास करें।
  7. किसी के द्वारा आपके नेतृत्व को ललकारने, स्वाभिमान की मानहानी होने तथा अपने विचारों को मनवाने की स्थिति में आप क्रोधित हो उठते हैं तथा क्रोध शीध्र शान्त भी नहीं हो पाता है। कभी-कभी आप प्रतिशोध लेने की इच्छा भी रखते हैं, अतः मन को शान्त रखें।

 

समाधान: –केतु की माला जपते वक्त दीपक के पास काली किसमीस का भोग लगायें तथा पूजनोपरान्त उन्हें प्रसाद-स्वरूप ग्रहण करें।
-श्री लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्ति हेतु निम्न मे से किसी एक समय पर 21 गुंजा (लाल या श्वेत) ला कर अपनी तिजोरी या पूजा स्थान पर रखें।
१- रविपुष्यामृत या गुरुपुष्यामृत की रात्रि में।
२- सूर्य/चन्द्र ग्रहण के पुण्यकाल में या रोहिणी नक्षत्र तथा शुक्रवार रात्रि में।
३- हस्त नक्षत्र एवं कृष्ण अष्टमी की रात्रि में।

आकस्मिक विपदा से रक्षा तथा कृपा प्राप्ति हेतु निम्नलिखित चौपाई का 108 बार प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक जाप करें-

दीनदयाल विरद संभारी, हरहु नाथ मम संकट भारी।
मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी॥
-केतु को प्रसन्न करने हेतु निम्नलिखित मन्त्र की 200 मालायें 41 दिन में जपें-
धूं धूं धूमावती स्वाहा।
-निम्नलिखित मन्त्र का श्रद्धापूर्वक 108 बार प्रतिदिन जप करें।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

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