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कूल्हों की अर्थराइटिस अब युवाओं में भी सामान्य

विजय न्यूज़। उमेश कुमार सिंह
अर्थराइटिस के कारण कूल्हे में दर्द होना सामान्य समस्या है, जो न केवल बड़ी उम्र के लोगों में देखी जाती है, बल्कि युवाओं में भी देखी जाती है, विशेषरूप से महिलाओं में जो 40-50 आयुवर्ग की होती हैं। अर्थराइटिस एक लगातार गंभीर होती स्वास्थ्य समस्या है, जो सामान्यतौर पर धीरे-धीरे शुरू होती है और समय बीतने से साथ गंभीर हो जाती है। इससे पीडि़त लोगों को अक्सर चलने में समस्या आती है, कुल्हे में अकडऩ या हल्के से लेकर तेज दर्द होता है। गाजियाबाद स्थित सेंटर फॉॅर नी एंड हिप केयर के वरिष्ठ प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. अखिलेश यादव का कहना है कि अगर सामान्य शब्दों में इसे समझाने का प्रयास करें तो, अर्थराइटिस तब होता है जब कुल्हे के जोड़ का स्थान संकरा हो जाता है और जो मुलायम ऊतक उसे घेरे हुए होते हैं वो सिकुडऩे लगते हैं और कड़े हो जाते हैं। यह स्थिति समय के साथ जोड़ों की टूट-फूट या कड़ी ट्रेनिंग के कारण मोटापा या अनुवांशिक कारण और कुछ अन्य कारणों से उत्पन्न होती है। अगर हम अपने कूल्हे के जोड़ की संरचना का परीक्षण करें, यह बॉल और सॉकेट का ज्वाइंट होता है और काफी गतिशील होता है। अर्थराइटिस में जब हम कूल्हे के जोड़ को हिलाते-डुलाते या खींचते हैं, तो उसमें दर्द होता है और जैसे-जैसे समय बीतता जाता है इसमें और अधिक अकडऩ आ जाती है और स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है जिससे दर्द अधिक बढ़ जाता है। इसलिए माना जाता है कि कुल्हे का जोड़ सबसे सामान्य जोड़ों में से एक है, जो अर्थराइटिस से प्रभावित होता है। हिप अर्थराइटिस का उपचार अर्थराइटिस के प्रकार, इसका डायग्नोसिस कितनी जल्दी होता है, मरीज की उम्र, उसकी मेडिकल हिस्ट्री (अगर कोई है) आदि जैसे कारकों के आधार पर किया जाता है।

हिप अर्थराइटिस के प्रकार

  • ऑस्टियोअर्थराइटिस (बुजुर्गों में सामान्य)।
  • रुमैटाइड अर्थराइटिस (युवाओं में सामान्य)।
  • एन्कायलोसिंग स्पोंडलाइटिस (युवाओं में सामान्य)।
  • सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमैटोसस (कम प्रचलित)।
  • सोरियाटिक अर्थराइटिस (युवाओं द्वारा बॉडी बिल्डिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले स्टेरॉयड या सप्लीमेंट के कारण होता है)।

ऑस्टियोअर्थराइटिस
यह अर्थराइटिस का सबसे सामान्य रूप है, जो उम्रदराज लोगों में दिखाई देता है। हालांकि यह कुल्हे के जोड़ों की संरचना में परिवर्तन आने, उम्र बढऩे, मोटापे, कुल्हे में चोट लगने आदि के कारण होता है।

रुमैटाइड अर्थराइटिस
डॉ. अखिलेश यादव का कहना है कि रुमैटाइड अर्थराइटिस (आरए) केवल कुल्हे के जोड़ को नहीं बल्कि आपके पूरे शरीर को प्रभावित करता है। यह सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित करता है जिसमें बच्चे भी सम्मिलित हैं। यह सामान्यता महिलाओं और पुरुषों में दिखाई देता है। आरए में सूजन टूट-फूट की बजाय इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया के कारण होती है। इसके कारण दोनों कूल्हों में दर्द और सूजन होती है जबकि ऑस्टियोअर्थराइटिस में केवल एक ही कूल्हे में दर्द होता है। इसके कारण जोड़ की हड्डी और कार्टिलेज क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। दर्द और सूजन के अलावा, आरए के कारण कमजोरी और थकान भी होती है।

एन्कायलोसिंग स्पोंडलाइटिस
यह स्पाइन और सैक्रॉइलिएक ज्वाइंट (जोड़ जहां स्पाइन पेल्विस से मिलती है) की गंभीर सूजन है। यह स्थिति सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित करती है, जिसमें बच्चे भी सम्मिलित हैं, लेकिन आमतौर पर यह समस्या 17-35 वर्ष के आयुवर्ग के लोगों में अधिक होती है। आरए के विपरीत, एन्कायलोसिंग स्पोंडलाइटिस महिलाओं के मुकाबले पुरु षों में अधिक सामान्य है।

सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमैटोसस
डॉ. अखिलेश यादव का कहना है कि यह एक सिस्टमिक ऑटोइम्यून डिसॉर्डर है जो शरीर के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकता है, जिसमंस कुल्हे का जोड़ भी सम्मिलित है। अगर ल्यूपस कुल्हे को प्रभावित करता है, तो जोड़ में सूजन आ जाती है और वह क्षतिग्रस्त हो सकता है। यह स्थिति सभी आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित करती है और सामान्यता महिलाओं में अधिक पाई जाती है।

सोरियाटिक अर्थराइटिस
इस प्रकार के अर्थराइटिस में त्वचा की समस्या सोरायसिस से संबंधित है। सोरियाटिक अर्थराइटिस के कारण जोड़ों में दर्द, सूजन और कड़ापन हो जाता है और यह शरीर के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है, जिसमें कूल्हा भी शामिल है।

लक्षण
कूल्हे के अर्थराइटिस से संबंधित सामान्य लक्षण हैं:-
कूल्हे के जोड़ में दर्द जिसमें सम्मिलित हैं-जांघों का बाहरी भाग और नितंब। सुबह-सुबह दर्द अधिक होता है, दिन चढऩे के साथ कम होता जाता है। चलने में कठिनाई होना। कूल्हे में अकडऩ। पीठ में दर्द जो जांघों से होकर घुटनों तक विकिरण करता है।

डायग्नोसिस
अगर आपको संदेह है कि आपको कूल्हे का अर्थराइटिस है, तो तुरंत डायग्नोसिस कराएं। इसमें सम्मिलित हो सकते है।
आपकी मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण-
रेडियोग्रॉफी या एक्स-रे, यह निर्धारित करने के लिए कि जोड़ों में कोई आसामान्या तो नहीं है। एमआरआई/सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट।

उपचार
नॉन-सर्जिकल विकल्प।
आपके डायग्नोज के आधार पर, आपका सर्जन उपचार का प्रकार बताएगा जो आपकी स्थिति के लिए उपयुक्त होगा।
कूल्हे के अर्थराइटिस के नॉन-सर्जिकल विकल्पों में सम्मिलित हो सकते हैं।
सूजन कम करने वाली दवाईयां।
जोड़ में सूजन को रोकने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड के इंजेक्शन मांसपेशियों के लचीलेपन और शक्ति को सुधारने के लिए फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज प्रोग्राम। एन्कायलोसिंग अर्थराइटिस के लिए स्विमिंग (तैरना) एक शानदार एक्सरसाइज है। जिन मरीजों का भार अधिक है उनके लिए वजन कम करना। वॉकर या छड़ी आदि उपकरणों की मदद से चलने में आसानी होगी।

सर्जिकल विकल्प
कूल्हों के अर्थराइटिस वाले कई लोगों के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। सर्जरी की मदद से दर्द कम हो जाता है, जीवन बेहतर हो जाता है और दिन-प्रतिदिन के कार्यों में कम समस्या होती है।

मिनिमली इनवेसिव हिप सर्जरी
यदि आपके कूल्हों के जोड़ क्षतिग्रस्त हो गए हैं या दर्द और सूजन के कारण चलना-फिरना मुश्किल हो गया है, इस स्थिति में यह सर्जरी इस का सबसे बेहतर विकल्प है। हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी सबसे ज्यादा सफल मॉडर्न ऑर्थोपेडिक सर्जरियों में से एक है और इसकी प्रक्रिया एक छोटे चीरे के साथ ही पूरी हो जाती है, जिससे रिकवरी में कम समय लगता है। हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान सर्जन क्षतिग्रस्त हुए कार्टिलेज और हड्डी को बाहर निकाल कर उनकी जगह पर कृत्रिम हिस्सों का उपयोग करता है।

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