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‘साइबर यातना’ के प्रति बहुत सजग रहना होगा

डिजिटल दुनिया के इस दौर में हर काम ऑनलाइन होता है। सरकारें लोगों को डिजिटल लेन-देन के लिए प्रोत्साहित करती हैं। बस, मेट्रो में सफर करें या हवाई जहाज से उड़ान भरें। नौकरियों से लेकर शादियां तक ऑनलाइन ढूंढ़ी जा रही है। सुबह बिस्तर में ऑनलाइन से लेकर देर रात सोने से पहले ऑनलाइन होना हर व्यक्ति की दिन चर्या बन चुकी है। ऐसे समय में अब साइबर ठगी, चोरी, जालसाजी के बाद अब ‘साइबर यातना’ के रूप में नया साइबर क्राइम दिखाई पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने अब दुनिया में साइबर यातना के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। देश-दुनिया में बढ़ते हुए साइबर अपराधों के बीच अब साइबर यातना के मामले बहुत तेजी से बढ़ते दिखाई पड़ रहे हैं। इसमें चिंता का विषय यह है कि इसमें पीड़ित को मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत-बहुत परेशान किया जाता है। उसे डराया जाता है, धमकाया जाता है, प्रताड़ित किया जाता है और उसे निजी और सार्वजनिक रूप से लगातार अपमानित किया जाता है। जिससे पीड़ित टूट जाता है। आज साइबर टेक्नोलॉजी का उपयोग इस तरीके से हो रहा है कि साइबर यातना देकर उसके मान-सम्मान को ठेस भी पहुंचाई जा रही है। इसके लिए विभिन्न प्रकार की साइबर तकनीकों को काम में लेते हुए साइबर यातनाओं के बहुत सारे तरीके काम में लिए जा रहे हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व की लगभग 75% महिलाएं किसी न किसी किस्म की साइबर हिंसा की शिकार हुई है। एक सर्वे में लगभग 86 देशों का साइबर क्राइम अध्ययन किया। इसके मुताबिक भारत में साइबर अपराध के मामले में 35% महिलाओं ने साइबर हिंसा की शिकायत की जबकि 46% महिलाओं ने साइबर हिंसा-प्रताड़ना की शिकायत भी नहीं की। ग्लासगो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नील्स कहते हैं कि आज साइबर टेक्नोलॉजी का अमर्यादित उपयोग हो रहा है। इसके विषम उपयोग से लोगों को भड़काया जा रहा है। उन्हें धमकियां दी जा रही है। उसके मान, सम्मान और इज्जत को ठेस पहुंचाई जा रही है। इसके सबसे ज्यादा मामले महिलाओं के दिखाई पड़ रहे हैं। इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी हाल ही में चेतावनी जारी की है। साथ ही दुनिया भर की विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक प्रताड़ना के साथ ही साइबर यातना के प्रकरण बहुत ज्यादा बढ़े हैं।

दरअसल साइबर यातना इंसान को अंदर से हिला कर रख देती है और पीड़ित का किसी ने भी मन नहीं लगता है। पीड़ित मानसिक रूप से पूर्णत: थक जाता है और इस दुनिया में वह अपने आपको अकेला पाता है। पीड़ित को मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत प्रभावी तरीके से परेशान किया जाता है। साइबर यातना के कुछ प्रमुख तरीके हैं। इनमें साइबर स्टॉकिंग के रूप में टेक्स्ट मैसेज भेजना, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना और उसके स्टेटस पर नजर रखते हुए इंटरनेट की गतिविधियों को ध्यान में रखना शामिल है। बाद में उसके साथ इमोशनल अटैचमेंट करते हुए उसको पीड़ित, उत्पीड़ित किया जाता है। साइबर स्पाइंग में चेंजिंग रूम, लेडीज वॉशरूम, होटल रूम, बाथरूम आदि स्थानों पर रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाए जाते हैं। फिर इनकी मदद से प्रताड़ना शुरू कर दी जाती है। साइबर पोर्नोग्राफी का साइबर यातना में ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें अश्लील फोटो या वीडियो ऑनलाइन पोस्ट की जाती है।अधिकांश मामलों में लोगों को बदनाम करने और उसकी इज्जत उछाल कर पीड़ित किया जाता है। साइबर बुलिंग के रूप में महिलाओं से नज़दीकियां बढ़ा करके, उनसे दोस्ती करके, उनकी फोटो ले कर बाद में उनको निजी जिंदगी में परेशान करने का घिनौना खेल खेला जाता है। उनको मनचाहे तरीके से पीड़ित करने की घटनाएं सामने आ रही है। साइबर यातना में महिलाओं एवं बच्चों को विशेष रूप से पीड़ित करने का काम किया जा रहा है। अतः मनोवैज्ञानिक रूप से पीड़ित, उत्पीड़ित करने वाले इस साइबर यातना से सावधान रहना चाहिए। इंटरनेट का उपयोग सीमित और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए विशिष्ट उपायों पर ही किया जाना चाहिए। साथ ही सरकारों को इस संदर्भ में आगे आकर कड़ा कानून बनाना चाहिए कि कोई किसी को अगर साइबर रूप से पीड़ित, उत्पीड़ित करता है तो उसे शीघ्र ही सजा मिले। अगर ऐसा नहीं होगा तो जल्द ही यह बहुत बड़ी बीमारी का रूप धारण कर लेगा जिसे कंट्रोल करना कठिन हो जाएगा। दुनिया भर में फैल रही साइबर यातना के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जारी किए गए अलर्ट को अब हमें बहुत गंभीरता से सोचना चाहिए।

रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान

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