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बेलगाम महंगाई से बिगड़ा रसोई का बजट

देश में महंगाई का कहर जारी है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे देशवासियों को महंगाई ने बेहाल कर रखा है। आर्थिक मोर्चे पर विफलता और बढ़ती बेरोजगारी से आहत मोदी सरकार पर अब महंगाई ने जोरदार हमला कर दिया है। महंगाई का सीधा अर्थ है वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों का बढ़ जाना यानि रूपये की कीमत का कम हो जाना है। महंगाई पर लगाम लगाने के सरकार के सारे प्रयास फेल हो गए है। बुधवार को अर्थव्यवस्था को तिहरा झटका लगा है। न सिर्फ खुदरा महंगाई बढ़ी है, बल्कि आईआईपी में भी गिरावट दर्ज की गई है। खुदरा महंगाई दर छह साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली विधान सभा के चुनाव खतम होते ही घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों में अप्रत्यासित वृद्धि हो गई है। सिलेंडर में 144 रूपये की बढ़ोतरी हो गयी है। इससे आम घरों में रसोई का बजट बिगड़ेगा। इसके साथ ही खाने-पीने की चीजें महंगी होने से जनवरी में खुदरा महंगाई दर में फिर इजाफा हुआ है। जनवरी में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 7.59 फीसदी पर पहुंच गई है। जबकि दिसंबर-2019 में खुदरा महंगाई दर 7.35 और नवम्बर में 5.54 फीसदी थी। जनवरी में सब्जियों की महंगाई दर बढ़कर 50.19 फीसदी रही, जबकि दिसंबर 2019 में यह आंकड़ा 60.50 फीसदी रहा था। इसी तरह, तिलहन की महंगाई दर 5.25 रही। दालों तथा इससे जुड़े उत्पादों की महंगाई दर 16.71 फीसदी रही। यह लगातार छठा महीना है, जब महंगाई दर में बढ़ोतरी देखी गई। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण महंगाई दर पिछले 6 साल में सबसे ज्यादा हो चुकी है। मोदी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में सुधार का दावा भी इन आंकड़ों से हवा हवाई साबित हो रहा है।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को आंकड़े जारी करते हुए कहा कि अनाजों और दालों की कीमतों में इजाफा होने के बाद खुदरा महंगाई दर में इतनी तेजी आई है। यह लगातार चैथा महीना है, जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के महंगाई लक्ष्य 4 फीसदी के ऊपर गया है। आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में बीते दिसंबर में 1.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले इसी महीने में विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि दर 2.9 फीसदी दर्ज की गई थी। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और निराश करने वाली खबर है। दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन के इंडेक्स में 0.3 फीसदी गिरावट रही।
आजादी के बाद देश में महंगाई लगातार बढ़ी है, इसके कई कारण गिनाये जा सकते है। भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी जनसंघ ने छठे और सातवें दशक में कांग्रेस सरकारों के खिलाफ महंगाई को लेकर कई बार जोरदार आंदोलन किया था। भाजपा बनने के बाद भी महंगाई को लेकर भाजपा काफी मुखर रही है। महंगाई के खिलाफ पार्टी ने भारत बंद से लेकर जेल भरो आंदोलन का आगाज भी किया था। मनमोहन सरकार के दौरान भाजपा और नरेंद्र मोदी ने महंगाई को लेकर कई बार कांग्रेस सरकार को घेरा। मोदी सरकार का यह दूसरा कार्यकाल है। जनता महंगाई से राहत का इंतजार कर रही है मगर महंगाई सुरसा के मुंह की तरह लगातार बढ़ती ही जा रही है।
भारत की राजसत्ता दूसरी बार सँभालने के बाद भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महंगाई से दो दो हाथ करने पड़ रहे है। जन साधारण को फिलहाल महंगाई से राहत मिलती नहीं दिख रही है। महंगाई ने एक बार फिर से देश में दस्तक देकर लोगों का जीना हराम कर दिया है। इसने मोदी द्वारा जनता से किए वादों पर सवाल खड़ा कर दिया हैं। लोगों ने विभिन्न मोर्चों पर राहत पाने के लिए भाजपा के हाथों में सत्ता सौंपी थी, लेकिन महंगाई सरकार की छवि पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
मोदी राज में देश में महंगाई लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसकी सबसे ज्यादा मार दिहाड़ी मजदूरों और गरीबों पर तो लाजिमी रूप से पड़ी ही है साथ ही मध्यम वर्ग भी इसकी बेरहम मार से अछूता नहीं रहा है। हालाँकि भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक लगाम लगाने में मोदी सरकार कामयाब रही है। मगर महंगाई के मोर्चे पर सरकार को आम आदमी के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। महंगाई दर बढ़ने का का अर्थ है कि वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे। महंगाई दर में बढ़ोतरी के साथ रुपये की क्रय शक्ति घटेगी, जिससे खपत घटेगी और जीडीपी ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे लक्ष्य अपनी राह से भटक सकता है।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी .32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 8949519406

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