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कर्क राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: इस वर्ष आपका स्वास्थ्य कुछ नरम-गरम रहेगा। किसी गम्भीर रोग का योग तो नही है, किन्तु सजग रहें। गम्भीरता से अवलोकन करें तो 08 फरवरी से 22 मार्च तक ऋतुजन्य रोग, दाद, खुजली या मुँह में छाले की समस्या हो सकती है। आत्मबल में कमी रहेगी। 14 जून से 16 जुलाई तक यदि आप कहीं भ्रमण हेतु जाते हैं, तो आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। यात्रा के समय आवश्यक वस्तुयें एवं औषधि इत्यादि साथ ले जायें।

आर्थिक स्थिति: इस वर्ष आपकी आर्थिक स्थिति यथावत बनी रहेगी, किन्तु समय-समय पर कुछ उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। धन का आगमन तो होगा परन्तु अपने परिवार के सदस्यों तथा सम्बन्धियों के मांगलिक कार्यो में धन का व्यय भी होगा। जो व्यक्ति भूमि-भवन या वाहन क्रय करने का विचार कर रहे हैं, उनके लिये यह समय आर्थिक व्यय का हो सकता है। घर के पुन: निर्माण पर भी व्यय होगा। वर्ष का उतरार्ध आर्थिक द्रष्टि से उत्तम होगा। इस वर्ष धन की चिन्ता से मुक्ति प्राप्त होगी तथा अचानक धन प्राप्ति का योग बनेगा।

व्यवसाय: व्यवसायिक दृष्टि से वर्ष के पूर्वार्ध में स्थिति सामान्य रहेगी। सफलता प्राप्ति हेतु निरन्तर परिश्रम करना होगा। यदि अपना कार्य दूसरों पर छोड़ेंगे तो इस स्थिति में लाभ कम रहेगा। व्यवसाय के क्षेत्र से जुड़े जातक अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखें, अन्यथा कार्यो में सफलता प्राप्ति नहीं होगी। नौकरीपेशा से जुड़े जातकों के लिये वर्ष के उतरार्ध में पदोन्नति होने के अवसर बनेंगे। कार्य परिवर्तन कर पायेंगे। जो लोग स्वरोजगार में हैं, उनके कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान में वृद्धि होगी।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: यह वर्ष पारिवारिक एवं सामाजिक दृष्टि से शान्तिपूर्ण रहेगा। बड़े भाई तथा मित्रों से लाभ प्राप्त हो सकता है। सन्तान की शिक्षा व अध्ययन तथा स्वयं की आजीविका हेतु यह समय अनुकूल है। 19 सितम्बर से स्वयं के तथा सन्तान के स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। सामाजिक क्षेत्र में आपके प्रभाव में वृद्धि होगी, किन्तु पारिवारिक क्षेत्र में आपको अपमानित करने का प्रयास किया जायेगा। घरेलु मतभेद उभरेंगे। माता-पिता, भाइयों, सास-श्वसुर से अनबन रहेगी। वैचारिक मतभेद उत्पन्न होंगे।

प्रणय जीवन: दम्पत्यसुख की दृष्टि से यह वर्ष आपके लिये अनुकूल रहेगा। सन्तान व स्त्री सुखः यथावत बना रहेगा। पारिवारिक क्लेश के कारण चिन्तित हो सकते हैं। स्वजनों का सहयोग एवं सुखः भी प्राप्त होगा। स्त्री (पत्नी) के पूर्ण सहयोग से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। सन्तान के स्वास्थ्य को लेकर चिन्ता बनी रहेगी। प्रेम-सम्बन्ध में एक-दूसरे पर विश्वास न बनाये रखने से ताल-मेल बिगड़ सकता है। अपने विचारों को सकारात्मक बनाने का प्रयास करें। दाम्पत्य जीवन के विवादों से दूर ही रहें।

स्त्री जातक फल: स्त्रियाँ इस वर्ष कुछ आकांक्षा लिये रहेंगी जो की बहुत हद तक पूरी भी होंगी। आप जो कुछ भी करने के इच्छुक हैं, उसे करने की पूर्ण स्वतन्त्रता तथा आनन्द आपको प्राप्त होगा। इस वर्ष आप प्रेम करते रहेंगे एवं आपको प्रेम प्राप्ति होती रहेगी। सन्तान तथा प्रियजन आपके साथ अच्छा व्यवहार करेंगे। विवाहित स्त्रियाँ यदि सन्तान प्राप्ति की इच्छुक हैं, तो उनकी मनोकामना इस वर्ष में अवश्य पूर्ण होगी। उच्च या निम्न रक्तचाप से पीड़ित स्त्रियाँ यात्रा में सावधानी रखे, औषधि साथ ही ले जायें।

राजकीय स्थिति: इस वर्ष में आप बड़ी कल्पना करेंगे, बड़ी महत्वकांक्षा रहेगी, किन्तु आपका निर्णय आपके जन्म के ग्रह एवं जनता ही करेगी। यह बात आप कभी न भूलें कि कल्पनाशक्ति सदैव इच्छाशक्ति को परास्त ही करती है। समाज के मध्यम वर्ग को प्राधान्यता दें। आपके प्रभाव क्षेत्र में अप्रत्याशित वृद्धि होगी तथा आपके नाम का प्रभाव एवं वर्चस्व बना रहेगा। राजनैतिक मेल-मिलाप में वृद्धि होगी।

विद्यार्थी जीवन: आपकी राशि से 12वे स्थान में राहुमहाराज चल रहे हैं जो अभ्यास में रूकावट दे सकता हैं। अध्ययन में मन नहीं लगेगा। आपकी दैनिक नियमावली में परिवर्तन की आवश्यकता रहेगी। अत्यधिक भोजन एवं आलस्यता के कारण विधाध्ययन के प्रति अरुचि बढ़ सकती है। किसी कारणवश पारिवारिक स्थानान्तरण एवं व्यस्तता के चलते भी समस्या बढ़ेगी। अतः सतर्कता एवं एकाग्रता की अत्यन्त आवश्यकता है। अपना अधिक से अधिक समय विधाध्ययन में निवेश करें।

सारांश: वर्ष 2020 आपको मध्यम शुभाशुभ फल प्रदान करेगा। शारीरिक रोग में सतर्कता बनायें रखें। नवीन एवं ऋतुजन्य रोगों के प्रति सावधान रहें। मधुमेह एवं रक्तचाप के रोगी सन्तुलित आहार ग्रहण करें। नौकरीपेशा जातकों की आर्थिक उन्नति होगी, शान्त रहें। 19 सितम्बर से अर्थात वर्ष के उतरार्ध में मानसिक हल्कापन अनुभव करेंगे। व्यापारी जातक किसी वस्तु का संग्रह करने से पूर्व बाजार की स्थिति का अवलोकन कर लें एवं अपने जन्म के ग्रहमान को ध्यान में रखकर संग्रह करें। राजकीय क्षेत्र से जुड़े जातक सामाजिक राजकीय परिस्थिति की उपेक्षा न करें। विद्यार्थी यदि सफलता प्राप्ति के इच्छुक हैं, तो सत्रारम्भ में ही उचित दिशा में परिश्रम करें, शिक्षा में किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह से दूर ही रहें। नौकरी के इच्छुक जातक सफलता प्राप्त करने हेतु, यथोचित जानकारी के साथ ही परिश्रम करें। निवेश करने में सावधानी रखें।

मर्यादा: –

  1. वर्ष 2020 में आप पर किसी प्रकार की लघु कल्याणी, कण्टक, अष्टम ढैया या साढ़ेसाती नहीं है।
  2. अपने अधीनस्थों से विचार-विमर्श किये बिना, किसी प्रकार का निर्णय न लें तथा उन निर्णयों को क्रियान्वयित करने हेतु किसी को बाध्य न करें।
  3. आप लक्ष्य प्राप्ति में आयी हुई बाधाओं से शीध्र व्यथित हो जाते हैं तथा लक्ष्य परिवर्तित करने का प्रयत्न करने लगते हैं, स्वभाव पर नियन्त्रण रखें।
  4. आप तर्कशील हो, किन्तु अपने विचारों को मनवाने में हठधर्मिता का प्रदर्शन न करें।
  5. विलासप्रियता अवश्य रखें, परन्तु अपनी समृद्धता एवं आय का भी ध्यान रखें।
  6. आपकी प्रवृति शंकालु होती है तथा इसी कारण आप प्रत्येक व्यक्ति पर शंका करते हैं, विचारों में परिवर्तन करें।
  7. जिनके प्रति आपका सम्मान, स्नेह या प्रेम होता है, उनकी सही-गलत बातों को भी आप स्वीकार करते हैं तथा जिनके प्रति शंका उत्पन्न होती है उनके प्रति उनकी उचित बाते भी आप स्वीकार नहीं करते। इसी बात का प्रभाव आपके दाम्पत्य जीवन पर भी पड़ता है।

समाधान: –

  • प्रत्येक शनिवार सन्ध्याकाल 100 बार हनुमान चालीसा का ससंकल्प पाठ करें।
  • समय की अनुकूलता रहने पर शनिवार के दिन पञ्चमुखी या एकादशमुखी हनुमानजी के समक्ष या चित्र के समक्ष दीपक तथा आसन लगाके सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।
  • धुम्रपान, मदिरा, अनीतिपूर्वक अर्जित धन, परस्त्रीगमन, अस्वाधान्न भक्षण आदि का त्याग करें।
  • प्रतिदिन नित्य पूजा में श्री सुक्तम का पाठ करें।
  • पूर्णिमा (व्रतवाली पूर्णिमा) का व्रत रखकर प्रदोष में चन्द्रमा को दूध, पौहा, चीनी का भोग लगाके स्वयं भी प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।
  • सोमवार को शिवजी पर गौदुग्ध का अभिषेक पण्डितजी से करवायें।
  • किसी पवित्र स्थल पर या मन्दिर में यथासम्भव आर्थिक एवं शारीरिक योगदान दें।
  • आत्मविश्वास एवं स्वास्थ्य की अनुकूलता हेतु श्री सूर्यनारायण देव को अर्ध्य अर्पित करने के साथ-साथ यथासम्भव सूर्यनमस्कार करें। स्वस्थ रहें मस्त रहें।

-निम्नलिखित मन्त्र का प्रतिदिन 108 बार मन्त्र का पाठ करें।
ह्रीं नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

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