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कैंसर समिट 2020 : सरकार कैंसर को लेकर मिशन मोड मे

  • सरकार कैंसर को लेकर मिशन मोड मे; मरीज़ों की मदद के लिए पेश की गई कई योजनाएं; कैंसर समिट 2020 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा
  • जन औषधि स्टोर्स में उपलब्ध कैंसर दवाओं की कीमतें बाज़ार से 50-80 फीसदी कमः फार्मा सचिव
  • उच्च स्तरीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन विश्व कैंसर दिवस के मौके पर इंटीग्रेटेड हेल्थ एण्ड वैलबींग काउन्सिल ने किया
  • स्वास्थ्य पर व्यय बीपीएल और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ा बोझ, सचिव, फार्मास्युटिकल विभाग, डाॅ पी.डी. वघेला
  • अश्विनी कुमार चैबे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कैंसर के इलाज को सुलभ बनाने के लिए नेशनल कैंसर टिश्यू बैंक स्थापित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया
  • सम्मेलन को बायोकोन बायोलोजिक्स और ग्लोबल कैंसर एडवोकेसी ग्रुप युनियन फाॅर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल का समर्थन प्राप्त है।

विजय न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली। विश्व कैंसर दिवस के मौके पर आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अश्विनी कुमार चैबे ने ऐलान किया कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कैंसर को जड़ से बाहर निकालने केे मिशन की दिशा में अपने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उन्होनंे कहा कि सरकार ने कैंसर मरीज़ों के लिए कई योजनाएं और नीतियां पेश की हैं क्योंकि पाया गया है कि कैंसर के कारण होने वाली 50 फीसदी मौतें इलाज के अभाव में हो रही हैं।

अश्विनी कुमार चैबे कैंसर सम्मेलन 2020 को संबोधित कर रहे थे, जो इंटीग्रेटेड हेल्थ एण्ड वैलनैस काउन्सिल की एक पहल है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोगों को इस बीमारी से डरना नहीं चाहिए बल्कि इस पर खुल कर सामने आना चाहिए क्योंकि कैंसर मरीज़ों की हर ज़रूरत के लिए कई नीतियां पेश की जा रही हैं।

‘‘मुझे खुशी है और मैं आईएचडब्ल्यू काउन्सिल के प्रति आभारी हूं, जिन्होंने लोगों कैंसर के बारे में जागरुक बनाने के लिए यह पहल की है। सरकार द्वारा कैंसर मरीज़ों के लिए पेश की गई वित्तपोषण योजनाओं में शामिल हैं- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय आरोग्य निधी, जो बीपीएल परिवार के मरीज़ को रु 100000 तक का अनुदान देती है, जिसकी मदद से वह सुपर स्पेशलटी अस्पताल/ संस्थान या अन्य सरकारी अस्पताल में इलाज करवा सकता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक और योजना है स्टेट इलनैस असिस्टेन्स फंड जिसमें बीपीएल मरीज सरकारी अस्पताल में कैंसर एवं अन्य जानलेवा बीमारियों के इलाज के लिए रु 150000 तक की सहायता पा सकता है। हमें लोगों के लिए कैंसर के उपचार को सुलभ बनने के लिए कैंसर टिश्यू बैंक भी स्थापित करना होगा।’’ श्री अश्विनी कुमार चैबे, माननीय राज्य मंत्री, स्वाथ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा।

सरकार द्वारा जन औषधिक स्टोर की स्थापना तथा दवाओं की कीमतों के विनियम के संदर्भ में डाॅ पी डी वघेला, सचिव, फार्मास्युटिकल विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि इसने बड़ी संख्या में मरीज़ों के लिए कैंसर की दवाओं को किफ़ायती बनाया है। यह पहल भारतीय मध्यमवर्ग के कैंसर मरीज़ों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।’’

‘‘भारत में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य व्यय रु 2500 है, जिसका 50 फीसदी हिस्सा दवाओं पर खर्च किया जाता है। स्वास्थ्य पर खर्च बीपीएल एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या है। ऐसे में हमें जेनेरिक दवाओं के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। जन औषधि स्टोर 6000 प्रकार की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराते हैं, इनमें 38 प्रकार की एंटी-कैंसर दवाएं शामिल हैं, जिनकी कीमत बाज़ार से 50 से 80 फीसदी तक कम है। हालांकि कैंसर का इलाज सिर्फ मल्टी स्पेशलटी अस्पतालों में ही किया जाता है। हम सभी अस्पतालों से अनुरोध करते हैं कि अपने परिसर में जन औषधि स्टोर खोलें और चिकित्सक भी जेनेरिक दवाएं ही लिखें, ताकि मध्यमवर्गीय लोगों पर कैंसर केे इलाज के कारण अनावश्यक बोझ न बढ़े। जेनेरिक दवाएं भी ब्राण्डेड दवाओं की तरह अच्छी हैं; वास्तव में इनकी सफलता ब्राण्डेड दवाओं से अधिक पाई गई है।’’ डाॅ पी डी वघेला, सचिव, फार्मास्युटिकल्स विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने सम्मेलन के दौरान कहा।

एनपीपीए एक कीमत निर्धारण प्रणाली है, जिसके बारे में बात करते हुए डाॅ वघेला ने कहा, ‘‘हम कीमतों पर नियन्त्रण नहीं करना चाहते बल्कि इनका विनियमन करना चाहते हैं। इसी दृष्टिकोण के साथ हमने कैंसर की 42 दवाओं को मरीज़ों के लिए किफ़ायती बनाया है- जिन्हें पहले रु 10000 और रु 25400 में बेचा जाता था, वे अब रु 892 और रु 2510 में उपलब्ध हैं। इससे देश में कैंसर के 1000 करोड़ मरीज़ों को फायदा हुआ है।’’

सम्मेलन बायोकोन बायोलोजिक्स द्वारा पावर्ड है और युनियन फाॅर इंटरनेशनल कैंसर काउन्सिल एवं पीपीएचएफ इसके लिए साझेदार हैं। सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले दिग्गजों में शामिल थे – डाॅ क्रिश्चियन हैमेचर, सीईओ, बायोकोन बायोलोजिक्स, डाॅ अनिल डीक्रूज़, प्रेज़ीडेन्ट- इलेक्ट, युनियन इंटरनेशनल फाॅर कैंसर कंट्रोल एण्ड डायरेक्टर, ओंकोलोजी, अपोलो हाॅस्पिटल्स डाॅ भावना सिरोही, डायरेक्टर- मेडिकल ओंकोलोजी, मैक्स इन्सटीट्यूट आॅफ कैंसर केयर तथा श्री कमल नारायण, सीईओ, इंटेग्रेटेड हेल्थ एण्ड वैलबींग काउन्सिल।

‘‘आज हम पहले से अधिक मामलों का निदान कर सकते हैं। लोग भी कैंसर के भौतिक एवं पर्यावरणी कारकों के बारे में अधिक जागरुक हैं। मैं खुद कैंसर से उबरा हूं, और 8 साल पहले मेरी बीमारी का निदान हुआ। मैं भाग्यशाली था कि मुझे अपने प्रियजनों का सहयोग मिला, अच्छा इलाज मिला। कैंसर के कारण मरीज़ के परिवार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता है। ऐसे में हमें लागत प्रबंधन के द्वारा कैंसर के इलाज को किफ़ायती बनाना होगा। महिलाएं कैंसर के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं क्योंकि स्तन एवं सरवाइकल कैंसर की जांच के लिए कैम्प उपलब्ध नहीं होते। हालांकि कैंसर को हराना आसान नहीं है, बायोकोन विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं भारत सरकार के साथ मिलकर कैंसर के उपचार को किफ़ायती बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्री-कैंसर घाव के निदान के लिए कोई भी अवसर चूकना नहीं चाहिए, इसलिए ज़रूरी है लोगों को नियमित रूप से जांच के लिए जागरुक बनाया जाए।’’ डाॅ क्रिश्चियन हैमेचर, सीईओ, बायोकोन बायोलोजिक्स ने कहा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर के कारण होने वाली मौतें आहार एवं व्यवहार से जुड़े 5 मुख्य कारणों से होती हैं। ये कारण हैं बीएमआई अधिक होना, फलों और सब्जियों का सेवन कम मात्रा में करना, शारीरिक व्यायाम की कमी, तंबाकू का सेवन और शराब का सेवन।

‘‘कैंसर एक बड़ी चिंता का विषय है और हर साल इसके कारण 1300 से अधिक लोग मरते हैं। जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, खासतौर पर जब व्यक्ति अपने जीवन के उत्पादक वर्षों में रोग का शिकार हो जाता है। आज कैंसर के कारण होने वाली ज़्यादातर मौतें सिर्फ तंबाकू या एचपीवी के कारण ही नहीं होतीं, बल्कि पर्यावरण और आहार भी इसका मुख्य कारण बन चुके हैं। सरकार ने आयुष्मान भारत एवं अन्य पहलों के माध्यम से कैंसर मरीज़ों की मदद की है। हाल ही में पेश किए गए बजट में वित्तमंत्री जी ने ‘टीबी हारेगा देश जीतेगा’ का संदेश दिया। मुझे उम्मीद है कि अगले बजट में ‘कैंसर हारेगा देश जीतेगा’ का संदेश दिया जाएगा।’ श्री कमल नारायण, सीईओ, इंटीग्रेटेड हेल्थ एण्ड वैलबींग काउन्सिल ने कहा।

देश में महिलाओं और पुरूषों में होने वाले कैंसर के पांच मुख्य प्रकार हैं- सतन, सर्विक्स, ओरल, लंग और कोलोरेक्टल। इनके कारण होने वाली मौतों की संख्या दिल की बीमारियों के बाद सबसे अधिक है, जिनकी रोकथाम संभव है। कार्यक्रम में आयोजित एक अन्य सत्र में कैंसर के परिप्रेक्ष्य पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें जल्दी निदान, नैदानिक देखभाल, किफ़ायती दरों पर उपचार तथा कैंसर के लिए प्रभावी रिस्पाॅन्स जैसे पहलुओं पर चर्चा की गई।

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