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मकर राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: इस वर्ष आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। ऋतुजनित रोगों के अतिरिक्त भी अन्य समस्यायें रहेंगी। जुकाम, खाँसी, पीलिया, अस्थिपीड़ा आदि होने की सम्भावना है। 24 जनवरी से 13 फरवरी तक पित्त, कफ एवं गैस आदि की समस्या अधिक दिखाई देंगी। बैचेनी एवं अनिद्रा भी रहेगी। सम्भव हो तो वसायुक्त आहार का पूर्णतः त्याग कर दें, आपके लिये हितकर रहेगा। यदि नेत्रों का उपचार करवाने के इच्छुक हैं तो विलम्ब न करें, अन्यथा गम्भीर समस्या हो सकती है। अतः स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दें।

आर्थिक स्थिति: वर्ष के प्रारम्भ में आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। सन्तान एवं शिक्षा हेतु धन व्यय में वृद्धि होगी। सन्तान के स्वास्थ्य पर भी आर्थिक व्यय हो सकता है। यदि इस वर्ष आप कोई भौतिक वस्तु उधार क्रय करना चाहते हैं, तो सतर्कता रखें। स्वयं आजीवका प्राप्ति एवं आय का समुचित प्रबन्ध होने के पश्चात् ही नवीन वस्तु क्रय करें। 19 सितम्बर के उपरान्त आर्थिक आय में लाभ होगा। पैतृक सम्पति सम्बधी कार्यों के सम्बन्ध में चर्चा आगे बढ़ेगी।

व्यवसाय: यह वर्ष व्यवसाय एवं सेवा क्षेत्र की दृष्टि से सामान्य ही रहेगा। प्रसाशनिक सेवा में कार्यरत जातकों एवं सरकारी कर्मचारियों के स्थानान्तरण की सम्भावना है। पदोन्नति भी सम्भव है। रँग-रसायन, तम्बाकू सम्बन्धित वस्तुयें, मादक द्रव्य, स्वर्ण-रजत तथा गृह उपयोगी वस्तुओं के व्यापार में लाभ हो सकता है। नौकरीपेशा से सम्बन्धित जातकों के लिये यह समय सतर्क रहने का है। लालच व घूस से बचें अन्यथा अपना पद त्यागना करना पड़ सकता है। नौकरी में स्थायित्व प्राप्त करना कठिन होगा।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: पारिवारिक एवं सामाजिक दृष्टि से इस वर्ष आपको अधिक ध्यान रखना होगा। 24 जनवरी से 11 मई तक का समय विशेष सावधानी का रहेगा। कुटुम्ब के सदस्यों के मध्य न्यायिक वाद-विवाद होंगे। सन्तान के साथ दुर्घटना घट सकती है। सामाजिक सम्पर्क क्षेत्र में विस्तार होगा किन्तु पग-पग पर समस्यायें आपके मार्ग में आयेंगी। अपने हितशत्रुओं एवं प्रतिस्पर्धियों से अधिक सावधान रहें। माता-पिता के स्वास्थ्य से सम्बन्धित समस्या बढ़ सकती है।

प्रणय जीवन: दाम्पत्यजीवन की दृष्टि से यह वर्ष आपके लिये मध्यम रहेगा। पत्नी का स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। सन्तान पक्ष में वृद्धि होगी। घर में नव अतिथि का आगमन होगा। व्यवसाय में पत्नी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। सांसारिक जीवन में शान्ति प्राप्त करने हेतु वाणी पर नियन्त्रण रखें। कुछ घनिष्ठ सम्बन्धी दाम्पत्यजीवन में समस्या को जन्म दे सकते हैं। कौटम्बिक वाद-विवाद हो सकता है किन्तु चिन्ता न करें। प्रेम-सम्बन्ध में अपने व्यवहार को सकारात्मक बनाने का प्रयास करें।

स्त्री जातक फल: स्त्रियों के लिये यह सम्पूर्ण वर्ष आनन्दपूर्ण एवं प्रेम से परिपूर्ण गतिविधियों का रहेगा। गृहस्थ जीवन के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी पूर्ण लाभ प्राप्त होगा। नवयुवतियाँ भी प्रेम-प्रसंग में तल्लीन रहेंगी किन्तु सावधानी से सम्बन्धों एक सीमा तक नियन्त्रित रखें अन्यथा आने वाला समय आपके लिये कष्टदायक हो सकता है। मई मास के पश्चात् घरेलु मतभेद से पीड़ित रहेंगी एवं स्वास्थ्य भी दुर्बल रहेगा। पारिवारिक मतभेद का सामना करना पड़ सकता है।

राजकीय स्थिति: इस वर्ष अधिक साहसिक कार्य करना अनुकूल नहीं। शीर्ष नेताओं के क्रोध का पात्र बनना पड़ सकता है। आपका आत्मविश्वास एवं लोकप्रियता तथा आपके क्षेत्र में आपके बढ़ता प्रभाव विरोधियों के साथ आपकी स्वयं की पार्टी के कार्यकर्ताओं के मध्य भी प्रतिस्पर्धा का कारण बन जायेगा। विश्वासघात करने वालों से सावधान। 19 सितम्बर तक विशेषतः दलबदलुओं का ध्यान रखें, वह आपके साथ विश्वासघात करने का प्रयास करेंगे। विरोधी आपकी प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाने का प्रयास करेंगे।

विद्यार्थी जीवन: यह वर्ष आपके लिये मिश्रित फल प्रदान करने वाला है। प्रतियोगी परीक्षाओं, साक्षात्कार में सफलता तभी प्राप्त हो सकती है, जब आपके जन्म ग्रह की दशा भी अनुकूल चल रही हो। इस वर्ष शिक्षण संस्थानों की राजनीति से बचे रहे तो कुछ उपलब्धि सम्भव है। जो विद्यार्थी किसी नवीन महाविद्यालय में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं तो प्रवेश में थोड़ा विलम्ब हो सकता है, किन्तु वर्ष के उत्तरार्ध में आपका प्रवेश किसी सम्मानित महाविद्यालय में हो जायेगा। संघर्ष के पश्चात् अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे।

सारांश: सन् 2020 का वर्ष परिश्रम एवं आपके विचार आधारित लेकिन थोड़ा सा कष्टदायक भी हो सकता है। शारीरिक रोग से अधिक मानसिक रोग का भय रहेगा तथा अज्ञात भय की अनुभूति होगी। यदि मानसिक शान्ति एवं आर्थिक उन्नति बनाये रखें चाहते हैं, तो ऋण तथा ब्याज आदि से दूर रहें। आय की तुलना में व्यय अधिक होगा। विद्यार्थी यदि अभ्यास में सफलता के इच्छुक हैं, तो सोशल मीडिया एवं मनोरंजन इत्यादि पर काम ध्यान दें। दाम्पत्यजीवन में किसी अन्य व्यक्ति का आगमन न होने दें। विवाह इच्छुकों की मनोकामना पूर्ण होने के योग बन रहे हैं, निरन्तर प्रयत्न करते रहें। आपके राजकीय जीवन को रंगारंग से दूर ही रखें। विपक्षी पार्टी एवं आपके सहयोगी की कुदृष्टि से सावधान रहें। गर्भवती स्त्रियाँ नियमित रूप से जाँच करवाती रहें। सास-बहु के सम्बन्ध में सुमधुरता लाने का पूर्णतः प्रयास करें तथा हृदय में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना रखें।

मर्यादा:

  1. 24 जनवरी तक साढ़ेसाती लौह पद पर मस्तक से पड़ती हुई होगी, जो कष्टकारक होगी। 24 जनवरी से साढ़ेसाती का सुवर्ण पद हृदय के मध्य से प्रारम्भ होगा। रोगादि भय, शत्रु की प्रबलता, विरोध, पारिवारिक कष्ट, धनहानि, चिन्ता आदि के कारण कष्टदायक समय हो सकता है।
  2. सभी के समक्ष स्वयं की कही-सुनी किसी बात को ही पकड़ कर न बैठिये, परिवर्तन आवश्यक है।
  3. इस वर्ष आर्थिक उपार्जन में ध्यान केंद्रित करें, व्यय पर नियन्त्रण करें
  4. भौतिक साधन एवं विद्युत संचालित उपकरणों को आवश्यकतानुसार ही क्रय करें, अनुपयोगी वस्तुयें पर धन व्यय न करें।
  5. व्यापर में उधार लेन-देन न करें ऋण एवं ब्याज आदि से दूर रहें।
  6. विद्यार्थियों को इस वर्ष सफलता को ध्यान में रखते हुये अधिक परिश्रम करना होगा।
  7. शेयर-बाजार एवं वस्तु-बाजार से इस वर्ष दूरी बनाके रखें।
  • समाधान: –
  • शनिवार के दिन सन्ध्याकाल में शनिदेव का दान किसी वृद्ध, दिव्यांग, भिक्षुक को दान करें। दान में निम्नलिखित सामग्रियों को सम्मिलित करें: काला वस्त्र, काली उड़द, काले तिल, घी, तेल, लोहे का कोई पात्र, छाता, जूता, दक्षिणा आदि।
  • शनिवार के दिन सन्ध्याकाल में निम्नलिखित मन्त्र का जप तथा पण्डित जी से पूजन करवा कर गले में नीलम रत्न धारण करें-
    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैचराय नमः।
  • काले घोड़े की असली नाल प्रतिष्ठित करवाने के उपरान्त घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर जड़वायें।
  • शिवजी के मन्त्र, उपासना, अभिषेक, पूजन इत्यादि भी साथ में करें।
  • मांस-मदिरा, धूम्रपान तथा परस्त्रीगमन से दूर रहें।
  • एकादशमुखी रुद्राक्ष, शिवजी का पूजन करने धारण करें। निम्नलिखित मन्त्र से एकादशमुखी रुद्राक्ष की पूजा-जप करें-
    ॐ ह्रीं ह्रूं नमः।
    ॐ सर्वेभ्यो रुद्रेभ्यो नमः।
  • पारद के पञ्चमुखी हनुमान जी के समक्ष किसी शनिवार ससंकल्प 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

-निम्नलिखित मन्त्र का श्रद्धापूर्वक 108 बार जप करें-
ह्रीं नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

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