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Category: आर.के. सिन्हा

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कितने दूध के धुले हैं उमर खालिद

दिल्ली में इसी साल फरवरी में भड़काए गए दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू)के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को अन्ततः गिरफ्तार कर ही लिया

अर्श से फर्श पर गिरना चंदा कोचर का

सच में जब समाज और देश के कोई सम्मानित और प्रतिष्ठित नायक किसी गलत कृत्य के कारण फंसते हैं, तो उनके प्रशंसकों का मन उदास हो जाता है। उनके गलत कामों

क्या भारत जंग की स्थिति में चीन-पाक को एक साथ देख लेगा

भारत और चीन सीमा पर तनाव अभी बरकरार ही है और भारत-पाकिस्तान के बीच भी गोला-बारूद चल ही रहे हैं। यानी भारत फिलहाल अपने दो घोर शत्रु देशों का सरहद

इमरान जूनागढ़ की मांग कर तोडेंगे पाक को

इमरान  खान कुछ हिल से गए लगते हैं। अब उनकी सरकार ने पाकिस्तान का एक नया मानचित्र जारी करते हुए गुजरात के जूनागढ़ और सर क्रीक लाइन को भी पाकिस्तान का अंग बता दिया है। वे अपने को बार–बार मूर्खसाबित करने पर आमदा हो गये लगते है । वे अपने को इतिहास का विद्यार्थी कहते हैं, पर लगता है कि उन्हें कोई इतिहास का कोई मूल बोध नहीं है । हैरानी की बात तो यह है कि उन्हें इतना भी नहीं पता कि जूनागढ़ में जनमतसंग्रह तक हो चुका है। यह 1948 में हुआ था और वहां के 99.95 फीसद लोगों ने भारत के साथ ही रहने का फैसला किया था। आगे बढ़ने से पहले जरा यह जान लें कि क्या है जूनागढ़ ? यह गुजरात के गिरनार पर्वत के समीप स्थित है। यहीं पूर्व–हड़प्पा काल के स्थलों की खुदाई भी हुई है। इस शहर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था। यह वस्तुतःचूड़ासम राजपूतों की राजधानी थी। यह एक रियासत थी। गिरनार के रास्ते में एक गहरे रंग की बसाल्ट या कसौटी के पत्थर की चट्टान है, जिस पर तीन राजवंशों का प्रतिनिधित्व करने वाला शिलालेख अंकित है। मौर्य शासकअशोक (लगभग 260-238 ई.पू.) रुद्रदामन (150 ई.) और स्कंदगुप्त (लगभग 455-467)। यहाँ 100-700 ई. के दौरान बौद्धों द्वारा बनाई गई गुफ़ाओं के साथ एक स्तूप भी है।  जूनागढ़ शहर के निकट स्थित कई मंदिर औरमस्जिदें भी इसके लंबे और जटिल इतिहास को उद्घाटित करती हैं। यहाँ तीसरी शताब्दी ई.पू. की बौद्ध गुफ़ाएँ, पत्थर पर उत्कीर्णित सम्राट अशोक का आदेशपत्र और गिरनार पहाड़ की चोटियों पर कहीं–कहीं जैन मंदिर स्थितहैं। 15वीं शताब्दी तक राजपूतों का गढ़ रहे जूनागढ़ पर 1472 में गुजरात के महमूद बेगढ़ा ने क़ब्ज़ा कर लिया, जिन्होंने इसे मुस्तफ़ाबाद नाम दिया और यहाँ एक मस्जिद बनवाई, जो अब खंडहर हो चुकी है। जूनागढ़ और भुट्टो कुनबा अब जरा लौटते हैं ताजा इतिहास पर । जूनागढ़ का संबंध  पाकिस्तान के दो प्रधानमंत्रियों जुल्फिकार अली भुटटो और बेनजीर भुट्टों से रहा है। भुट्टो के पिता सर शाहनवाज भुट्टो देश के विभाजन से पहले जूनागढ़ रियासत केप्रधानमंत्री थे। वे गुजरात के नवाब मुहम्मद महाबत खनजी  के खासमखास थे। जुल्फिकार अली अहमद भुट्टों की मां हिन्दू थी। उनका निकाह से पहले का नाम लक्खीबाई था। बाद में हो गया खुर्शीद बेगम। वो मूलत: एकप्रतिष्ठित राजपूत परिवार से संबंध रखती थी। उन्होंने निकाह करने से पहले ही इस्लाम स्वीकार किया था। कहने वाले कहते हैं कि शाहनवाज और लक्खीबाई के बीच पहली मुलाकात जूनागढ़ के नवाब के किले में ही हुई। वहांपर लक्खीबाई भुज से आई थी। शाह नवाज जूनागढ़ के प्रधानमंत्री के पद पर 30 मई,1947 से लेकर 8 नवंबर,1947 तक रहे। लक्खीबाई के पिता जयराज सिंह जडेजा का संबंध राजकोट के पेनेली गांव से था। जबकि भुट्टो कीदादी का रिश्ता लोहाना बिरादरी से था। अब आप समझ गए होंगे कि जूनागढ़ का किस तरह से संबंध है भुट्टो के कुनबे से।दरअसल देश के बंटवारे के बाद भारत सरकार जूनागढ़ के नवाब मुहम्मद महाबत खनजी से बार–बार कह रही थी कि वह भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर भारत संघ का हिस्सा बन जाएं। लेकिन वे तो अड़े हुए थे।भारत सरकार ने उन्हें धमकियां भी दीं।  लेकिन वह नहीं माने। बता दें कि जूनागढ़ की 3 तरफ़ की सीमा रेखाएं भारत से जुड़ी हैं और चौथी समुद्र से। फिर भी जूनागढ़ के नवाब की चाहत थी कि जूनागढ़ पाकिस्तान में समुद्र केरास्ते मिल जाए। मोहम्मद अली जिन्ना ने मंजूरी भी दे दी थी और 15 सितंबर, 1947 को विलय पत्र पर जूनागढ़ के संबंध में हस्ताक्षर भी कर दिए। भारत सरकार के सचिव वी.पी. मेनन ने नवाब को अपना फ़ैसला बदलने कोकहा ताकि  पाकिस्तान के साथ हुआ समझौता रदद् हो जाए। लेकिन नवाब नही माने। तब भारत ने जूनागढ़ के लिए अपने सभी सीमाओं को बंद कर दिया। माल, परिवहन और डाक वस्तुओं की आवाजाही बंद कर दी। स्थितिबिगड़ती देख नवाब और उनके परिवार ने जूनागढ़ छोड़ दिया और 25 अक्टूबर 1947 को समुद्र मार्ग से कराची भाग गये। अब जूनागढ़ के मुख्यमंत्री  भुट्टो, जो जुल्फिकार अली भुट्टो के पिता और बेनजीर के दादा थे, ने पाकिस्तान में चले गए नवाब को एक पत्र लिखा। जवाबी टेलीग्राम में जूनागढ़ के नवाब ने भुट्टो को यह अधिकार दिया की वेमुसलमानों के हित में निर्णय ले लें। तब भुट्टो ने भारत सरकार के साथ परामर्श करने का फैसला लिया। भारत का अभिन्न अंग जूनागढ़ अंत में यह तय हुआ की भारत जूनागढ़ के नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए सत्ता अपने हाथ में लेगी और वहां फरवरी 1948 में एक जनमत संग्रह का आयोजन करेगी। उस जनमत संग्रह में 99 प्रतिशत से भी ज्यादा लोगों नेभारत में शामिल होने के लिए मतदान किया। इसके साथ ही जूनागढ़ पूरी तरह से भारत का अभिन्न अंग हो गया। कहते हैं कि जूनागढ़ के नवाब को अंततः पाकिस्तान में जाकर बसना बहुत ही महंगा साबित हुआ था।पाकिस्तान में उनकी कसकर बेकद्री हुई। फिर वे भारत और जूनागढ़ को याद करते हुए संसार से विदा हुए। तो यह है जूनागढ़ का हालिया इतिहास। यानी जूनागढ़ भारत का अभिन्न अंग है। अब अचानक से इमरान खानबकवास कर रहे हैं कि जूनागढ़ तो उनका है। तो फिर टूटेगा पाकिस्तान कहते हैं कि जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते। इमरान खान  जम्मू व कश्मीर, लेह–लद्दाख और गुजरात के जूनागढ़ और सर क्रीक लाइन को भी पाकिस्तान का अंग बता रहे हैं।  बेहतर होगाकि वे पहले बलूचिस्तान को अपने देश से अलग होने से बचा लें। वहां पर सघन पृथकतावादी आंदोलन चल रहा है। इमरान खान को इसकी पल–पल की जानकारी है। पिछले कुछ सालों से चल रहा पृथकतावादी आंदोलन अबबेकाबू होता जा रहा है। आंदोलन इसलिए हो रहा है, क्योंकि स्थानीय जनता का आरोप है कि चीन जो भी निवेश उनके इलाके में कर रहा है उसका असली मकसद बलूचिस्तान का नहीं बल्कि चीन का फायदा करना है।बलूचिस्तान के प्रतिबंधित संगठनों ने धमकी दी है कि चीन समेत दूसरे देश ग्वादर में अपना पैसा बर्बाद ना करें, दूसरे देशों को बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा को लूटने नहीं दिया जाएगा। इन संगठनों ने बलूचिस्तान में कामकर रहे चीनी इंजीनियरों पर अपने हमले बढ़ा दिए हैं।बलूचिस्तान के अवाम का कहना है कि जैसे 1971 में पाकिस्तान से कटकर बांग्लादेश बन गया था उसी तरह एक दिन बलूचिस्तान अलग देश बन जाएगा। बलूचिस्तान के लोग किसी भी कीमत पर पाकिस्तान से अलग होजाना चाहते हैं। बलूचिस्तान पाकिस्तान के पश्चिम का राज्य है जिसकी राजधानी क्वेटा है। बलूचिस्तान के पड़ोस में ईरान और अफगानिस्तान है। 1944 में ही बलूचिस्तान को आजादी देने के लिए माहौल बन रहा था। लेकिन,1947 में इसे जबरन पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया और हमारी सरकार ने तब बलूची जनता की मांग को मानते हुए इसे बहरत में शामिल करने से इंकार कर दिया । तभी से बलूच लोगों का संघर्ष चल रहा है और उतनीही ताकत से पाकिस्तानी सेना और सरकार बलूच लोगों को कुचलती चली आ रही है। बहरहाल ये लगता है कि इमरान खान भारत के कुछ हिस्सों को अपना बताने के फेर में  अपने देश को ही तुड़वा देंगे। आर.के. सिन्हा (लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तभकार और पूर्व सांसद हैं)

ओवैसी जी ! राम का नाम तो लेगा ही भारतवासी

अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास क्या हो गया कि असदुद्दीन ओवैसी तथा आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की छाती पर सांप लोटने लगा। ये तब से ही यह

क्यों प्रेम का बदला नफरत से देते शोएब- अफरीदी

अब याद रखना शोएब अख्तर-अफरीदी के चरित्र को सचिन तेंदुलकर, रोजर फेडरर, मोहम्मद अली या पेले जैसे खिलाडियों को विश्व नागरिक माना जाता है। ये भले ही भारत, ब्राजील, अमेरिका

चाहकर भी भूल न पायेगा यह देश तिलक को

स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा” जैसा प्रेरक उद्बोधन देने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को क्या देश भूल रहा है? अगर भूला नहीं भी है

आखिर गुरुदेव और बाबा साहेब ने क्यों ली थी मातृभाषा शिक्षा

नई शिक्षा नीति-मातृभाषा में पढ़ोगे तो बनोगे गुरुदेव और राजेन्द्र प्रसाद नई शिक्षा नीति-2020 की घोषणा हो गई है। इसके विभिन्न बिन्दुओं पर बहस तो  होगी ही । पर इसने

क्यों नहीं सारे अफगान-पाक में प्रताड़ित सिख आ जाते भारत

अफगानिस्तान में राक्षसी प्रवृति वाले तेजी से पनप रहे तालिबानियों के चंगुल से आजाद होने के बाद सिखों का एक जत्था दिल्ली पहुंच गया है। अब भारत में नागरिकता संशोधन

जाकिर नाईक भी चला दाऊद के रास्ते

अपने को इस्लामिक विद्वान बताने वाला ढोंगी और खुराफाती जाकिर नाईक बाज आने से रहा । वह सुधरने की कोशिश ही नहीं कर रहा। यह उसकी फितरत ही नहीं है

क्यों बुद्ध देशों के सैलानी जाते हैं भारत की बजाय थार्ईलैंड़

लाओ बुद्ध देशों के सैलानियों को भारत के बौद्ध सर्किट पर विकसित करो भारतीय बौद्ध सर्किट को यह मत सोचें कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण सरकारी कामकाज और भावी

परीक्षाओं में कम अंक लाने वालों को शाबाशी ?

क्या गलत है परीक्षाओं में टॉप करना कम अंक लाने वालों का मनोबल बढ़ायें पर प्रोत्साहित न करें सच में फिर से वही हो रहा है, जिसकी आशंका थी। जैसी

कहां और किस किसके अराध्य राम

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब कह रहे हैं कि भगवान राम भारतीय नहीं, नेपाली थे। वे यह भी कह रहे हैं कि असली अयोध्या भारत में नहीं, नेपाल

अमिताभ बच्चन होने का मतलब

एक युग का नाम है अमिताभ बच्चन। अमिताभ बच्चन अब कालजयी हो चुके हैं। उन्होंने अभिनय के दम पर ही शीर्ष स्थान को प्राप्त कर लिया है। बीती आधी सदी

मुसलमान कब करेंगे महंगाई, बेरोजगारी पर आंदोलन

संसद ने जब से नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को पारित किया है, देश के मुसलमानों का एक हिस्सा नाराज है। कम से कम जगह-जगह धरने प्रदर्शन कर यह बताने की

दिल्ली दंगों को उकसाने-भड़काने वाले कौन?

अब तो आग की लपटों से बाहर निकल आई है दिल्ली। अब मासूमों को मारने के लिए सड़कों पर उतरे मौत के सौदागर अपना सुनियोजित काम करके पतली गली से

सबक सिखानी होगी पाक जिंदाबाद के नारे लगाने वालों को

न चाहते हुए भी यह कहने का मन कर रहा है कि अब भारत तेजी से बदल रहा है। अब अपने देश में ‘पाकिस्‍तान जिंदाबाद’ कहने वालों की तादाद भी

इनकम टैक्स देना शान के खिलाफ क्यों ?

अब यह कहने का मन करने लगा है कि हम हिन्दुस्तानियों को अपना इनकम टैक्स अदा करने में बड़ा ही कष्ट होता है। चूंकि, नौकरीपेशा लोगों का टैक्स तो उनकी

विश्व मातृभाषा दिवस 21 फरवरी के लिए विशेष

निश्चित रूप से भाषा धरती की होती है, न किकिसी धर्म या फिरके की। पर इस छोटे से तथ्य की लम्बे समय से अनदेखी होती रही है। इसके अनेकों घातक

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